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आखिर कब होगा लोअर मॉलरोड के क्षतिग्रस्त हिस्से का स्थायी ट्रीटमेंट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 24 May 2022 12:10 AM IST
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After all, when will there be permanent treatment of the damaged part of Lower Mall Road
नैनीताल की लोअर मालरोड । - फोटो : NAINITAL
नैनीताल। नैनीताल की लोअर माल रोड का चार साल बीतने के बाद भी स्थाई रूप से ट्रीटमेंट नहीं हुआ है। कई भूगर्भवेत्ताओं और कई संस्थानों के निरीक्षण के बाद भी आज तक यहां यातायात व्यवस्था अस्थाई ट्रीटमेंट के भरोसे चल रही है। 82 लाख रुपये का बजट खर्च होने के बाद भी सड़क का स्थायी ट्रीटमेंट नहीं हुआ है। अब मॉलरोड के ट्रीटमेंट की डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी टीएचडीसी को सौंपी गई है, जिसके बाद शासन से ट्रीटमेंट के लिए बजट की मांग की जाएगी।
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बता दें कि नैनीताल में 18 अगस्त 2018 की शाम लोअर मॉल रोड का 25 मीटर हिस्सा भरभराते हुए झील में समा गया था जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने जल्द अस्थाई ट्रीटमेंट कर यातायात सुचारू करने के निर्देश दिए। विभाग ट्रीटमेंट के लिए व्यवस्थाएं जुटा रहा था कि एक सप्ताह बाद फिर पांच मीटर हिस्सा झील में जा समा गया। तब लोनिवि ने जियो बैग और लोहे के पाइप डालकर किसी तरह अस्थाई व्यवस्था बनाई। बाद में आईआईटी रुड़की की टीम और कई भूगर्भवेत्ताओं ने क्षतिग्रस्त सड़क और आसपास के क्षेत्र में निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की और सड़क के स्थायी ट्रीटमेंट के लिए कई सुझाव दिए। भूगर्भवेत्ताओं ने लोनिवि को ट्रीटमेंट से पहले क्षेत्र का सीबीआर, ओएमसी व नाला डाईवरजेशन पर काम करने की राय दी थी जिसके बाद लोनिवि ने 82 लाख के बजट से झील में बेस बनाकर मशीन लगाकर ड्रीलिंग कर व पाइप डालकर सड़क का अस्थाई ट्रीटमेंट किया। अस्थाई ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद स्थाई ट्रीटमेंट की डीपीआर बनाने का जिम्मा टीएचडीसी को सौंपा गया था। टीएचडीसी ने सर्वे तो कर लिया है लेकिन रिपोर्ट लोनिवि तक नहीं पहुंची है। ऐसे में इस बरसात में भी लोअर मॉल रोड में यातायात व्यवस्था अस्थाई ट्रीटमेंट पर ही चलेगी।
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लोनिवि के सहायक अभियंता जीएस जनौटी ने बताया कि टिहरी हाइड्रो डबलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) लोअर मॉलरोड का जियोलॉजिकल निरीक्षण कर लिया है। स्थलीय निरीक्षण कर टीएचडीसी डीपीआर बनाकर लोनिवि को सौंपेगी जिसके बाद ट्रीटमेंट का प्रस्ताव बनाकर स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा। फिलहाल टीएचडीसी से सर्वे की रिपोर्ट आनी बाकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की योजना बनाई जा सकेगी।
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