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Nainital News: ओरियोनिड उल्का बौछार का अद्भुत नजारा, लोगों ने कैमरों में कैद किए टूटते तारे
Fri, 23 Oct 2026 12:32 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 23 Oct 2026 12:32 AM IST
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नैनीताल। अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वालों और खगोल प्रेमियों के लिए यह हफ्ता बेहद रोमांचक साबित हुआ। प्रसिद्ध हैली धूमकेतु के मलबे से होने वाली ओरियोनिड उल्का बौछार अपने चरम पर दिखाई दी। देश के कई हिस्सों में आसमान साफ होने के कारण लोगों को यह अनोखी खगोलीय आतिशबाजी देखने को मिली जिसे कई स्टारगेजर्स और फोटोग्राफर्स ने अपने कैमरों में कैद किया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस घटना का सबसे बेहतरीन और सटीक नजारा बृहस्पतिवार तड़के तीन बजे से लेकर सूर्योदय से ठीक पहले तक देखा गया। शुरुआत में आसमान में करीब 77 फीसदी चमकीला चांद मौजूद होने की वजह से रोशनी बाधक बन रही थी लेकिन तड़के तीन बजे के बाद जैसे ही चंद्रमा अस्त हुआ, आसमान में पूरी तरह अंधेरा छा गया। इसके बाद बिना किसी दूरबीन या विशेष उपकरण के केवल नग्न आंखों से ही आसमान में रोशनी की खूबसूरत लकीरें साफ तैरती हुई नजर आईं। इस रात का रोमांच तब और बढ़ गया जब ओरियोनिड के साथ-साथ नॉर्दर्न टॉरिड उल्का बौछार की भी शुरुआत हो गई। इसके कारण आसमान में यदा-कदा बेहद चमकीले फायरबॉल्स भी चमकते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हुईं। साथ ही, सौरमंडल के दो विशाल ग्रह बृहस्पति और मंगल भी अपनी पूरी चमक के साथ आसमान में मौजूद रहे जिसने इस आकाशीय दृश्य की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, ओरियोनिड उल्काओं की तेज गति और विशेष चमक की वजह से शहरों की कृत्रिम रोशनी से दूर खुले और अंधेरे स्थानों पर गए लोगों को टाइमलैप्स और फोटोग्राफी के जरिये बेहद शानदार विजुअल्स हासिल हुए हैं।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस घटना का सबसे बेहतरीन और सटीक नजारा बृहस्पतिवार तड़के तीन बजे से लेकर सूर्योदय से ठीक पहले तक देखा गया। शुरुआत में आसमान में करीब 77 फीसदी चमकीला चांद मौजूद होने की वजह से रोशनी बाधक बन रही थी लेकिन तड़के तीन बजे के बाद जैसे ही चंद्रमा अस्त हुआ, आसमान में पूरी तरह अंधेरा छा गया। इसके बाद बिना किसी दूरबीन या विशेष उपकरण के केवल नग्न आंखों से ही आसमान में रोशनी की खूबसूरत लकीरें साफ तैरती हुई नजर आईं। इस रात का रोमांच तब और बढ़ गया जब ओरियोनिड के साथ-साथ नॉर्दर्न टॉरिड उल्का बौछार की भी शुरुआत हो गई। इसके कारण आसमान में यदा-कदा बेहद चमकीले फायरबॉल्स भी चमकते हुए कैमरे में रिकॉर्ड हुईं। साथ ही, सौरमंडल के दो विशाल ग्रह बृहस्पति और मंगल भी अपनी पूरी चमक के साथ आसमान में मौजूद रहे जिसने इस आकाशीय दृश्य की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, ओरियोनिड उल्काओं की तेज गति और विशेष चमक की वजह से शहरों की कृत्रिम रोशनी से दूर खुले और अंधेरे स्थानों पर गए लोगों को टाइमलैप्स और फोटोग्राफी के जरिये बेहद शानदार विजुअल्स हासिल हुए हैं।
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