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न अपना भवन और न स्थायी निदेशक
Nainital
Updated Thu, 06 Nov 2014 05:30 AM IST
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हल्द्वानी। निदेशालय यानि की वो दफ्तर, जहां प्रदेश के हर जनपद से जुड़ी योजनाओं को लेकर गहन मंथन ही नहीं, बल्कि उन्हें अमलीजामा पहनाने के लिए फाइलें इधर से उधर दौड़ती हैं, लेकिन डेयरी विकास निदेशालय इससे बिल्कुल अलग है। निदेशालय दफ्तर में हर समय सन्नाटा इस बात की तस्दीक करता है कि यहां प्रदेश में डेयरी विकास के लिए कितनी योजनाएं बनती हैं और उन पर कितना अमल होता होगा। प्रदेश में दूध की नदियां बहाना तो दूर डेयरी विकास निदेशालय को अपना भवन और स्थायी निदेशक तक नहीं मिल सका। दोनों व्यवस्थाएं कामचलाऊ हैं।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद शासन को हल्द्वानी में डेयरी विकास निदेशालय का दफ्तर स्थापित करने का निर्णय लेने में डेढ़ वर्ष से अधिक समय लग गया। आनन-फानन में मंगलपड़ाव स्थित लालकुआं दुग्ध संघ के खस्ताहाल भवन में निदेशालय खोला गया। आज तक डेयरी निदेशालय को अपना भवन तो दूर स्थायी निदेशक तक नहीं मिल सका। डेयरी के पहले निदेशक के रूप में पीएस गुसांई ने 12 मार्च 2001 को चार्ज संभाला। एक साल के भीतर 2 फरवरी 2002 को बीके पाठक को चार्ज दे दिया। इस तरह राज्य गठन के 14 साल में इस निदेशालय में 18 निदेशक तैनात हो चुके हैं। यह वो अधिकारी होते हैं जिनके पास दूसरे विभागों का चार्ज भी रहता है। सीनियर पीसीएस अफसर एमएम खान 6 मार्च 2014 से 13 सितंबर 14 की अवधि में एक ऐसे निदेशक रहे जिनके पास डेयरी के अलावा कोई दूसरा चार्ज नहीं था, लेकिन कुछ लोगों के स्वार्थों की पूर्ति न करने पर उन्हें हटा दिया गया। वर्तमान में सीडीओ ललित मोहन रयाल के पास डेयरी निदेशक का अतिरिक्त चार्ज है। डेयरी की फाइलें भीमताल सीडीओ दफ्तर जाती हैं।
दुग्ध मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल भी लालकुआं क्षेत्र के हैं, बावजूद निदेशालय की दशा नहीं सुधरी है। डेयरी विकास निदेशालय खुद के भवन निर्माण के लिए उत्तराखंड मुक्त विवि के पास वन भूमि ढूंढ रहा है। वनभूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव पर कार्यवाही चल रही है। फिलहाल खस्ताहाल इसी भवन को मरम्मत कर दुरुस्त करने का काम हो रहा है।
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डेयरी फेडरेशन में अफसरों की कमी
इसी परिसर में उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन लि. का मुख्यालय भी है। इसके चेयरमैन अर्जुन सिंह रौतेला हैं। यह राजनैतिक पद है, लिहाजा फेडरेशन का भवन जरूर नया बना है। डेयरी फेडरेशन में वर्ष 2002 से कोई नियुक्ति न होने से इसमें अधिकारियों एवं कर्मचारियों की काफी कमी है। जीएम बीसी पांडे, पीपी लोहनी, डीसी जोशी, डीएस नेगी, बीडी जोशी, बीडी शर्मा, टीसी भट्ट समेत दर्जन भर अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं मगर नियुक्ति एक भी नहीं हुई।
एक नजर में डेयरी फेडरेशन
-प्रदेश में दूध की डिमांड करीब ढाई लाख लीटर है मगर डेयरी केवल 1,44,057 लीटर दूध सप्लाई कर पा रहा है। बाकी पूर्ति मदर डेरी, आनंदा डेरी, अमूल और दूसरे ब्रांड कर रहे हैं।
-वर्ष 2002-03 में दूध उत्पादन 1 लाख 1,855 लीटर था जो कि इतने साल में बढ़कर 1 लाख 49 हजार 856 ही पहुंच सका है।
-3,807 दुग्ध समितियां गठित हुई मगर संचालित सिर्फ 2,259 हैं।
- प्रदेश में 11 दुग्ध डेयरी हैं जिनमें से गढ़वाल की टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी और चमोली डेयरी घाटे में हैं।
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उत्तराखंड राज्य गठन के बाद शासन को हल्द्वानी में डेयरी विकास निदेशालय का दफ्तर स्थापित करने का निर्णय लेने में डेढ़ वर्ष से अधिक समय लग गया। आनन-फानन में मंगलपड़ाव स्थित लालकुआं दुग्ध संघ के खस्ताहाल भवन में निदेशालय खोला गया। आज तक डेयरी निदेशालय को अपना भवन तो दूर स्थायी निदेशक तक नहीं मिल सका। डेयरी के पहले निदेशक के रूप में पीएस गुसांई ने 12 मार्च 2001 को चार्ज संभाला। एक साल के भीतर 2 फरवरी 2002 को बीके पाठक को चार्ज दे दिया। इस तरह राज्य गठन के 14 साल में इस निदेशालय में 18 निदेशक तैनात हो चुके हैं। यह वो अधिकारी होते हैं जिनके पास दूसरे विभागों का चार्ज भी रहता है। सीनियर पीसीएस अफसर एमएम खान 6 मार्च 2014 से 13 सितंबर 14 की अवधि में एक ऐसे निदेशक रहे जिनके पास डेयरी के अलावा कोई दूसरा चार्ज नहीं था, लेकिन कुछ लोगों के स्वार्थों की पूर्ति न करने पर उन्हें हटा दिया गया। वर्तमान में सीडीओ ललित मोहन रयाल के पास डेयरी निदेशक का अतिरिक्त चार्ज है। डेयरी की फाइलें भीमताल सीडीओ दफ्तर जाती हैं।
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दुग्ध मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल भी लालकुआं क्षेत्र के हैं, बावजूद निदेशालय की दशा नहीं सुधरी है। डेयरी विकास निदेशालय खुद के भवन निर्माण के लिए उत्तराखंड मुक्त विवि के पास वन भूमि ढूंढ रहा है। वनभूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव पर कार्यवाही चल रही है। फिलहाल खस्ताहाल इसी भवन को मरम्मत कर दुरुस्त करने का काम हो रहा है।
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डेयरी फेडरेशन में अफसरों की कमी
इसी परिसर में उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन लि. का मुख्यालय भी है। इसके चेयरमैन अर्जुन सिंह रौतेला हैं। यह राजनैतिक पद है, लिहाजा फेडरेशन का भवन जरूर नया बना है। डेयरी फेडरेशन में वर्ष 2002 से कोई नियुक्ति न होने से इसमें अधिकारियों एवं कर्मचारियों की काफी कमी है। जीएम बीसी पांडे, पीपी लोहनी, डीसी जोशी, डीएस नेगी, बीडी जोशी, बीडी शर्मा, टीसी भट्ट समेत दर्जन भर अधिकारी रिटायर्ड हो चुके हैं मगर नियुक्ति एक भी नहीं हुई।
एक नजर में डेयरी फेडरेशन
-प्रदेश में दूध की डिमांड करीब ढाई लाख लीटर है मगर डेयरी केवल 1,44,057 लीटर दूध सप्लाई कर पा रहा है। बाकी पूर्ति मदर डेरी, आनंदा डेरी, अमूल और दूसरे ब्रांड कर रहे हैं।
-वर्ष 2002-03 में दूध उत्पादन 1 लाख 1,855 लीटर था जो कि इतने साल में बढ़कर 1 लाख 49 हजार 856 ही पहुंच सका है।
-3,807 दुग्ध समितियां गठित हुई मगर संचालित सिर्फ 2,259 हैं।
- प्रदेश में 11 दुग्ध डेयरी हैं जिनमें से गढ़वाल की टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी और चमोली डेयरी घाटे में हैं।