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धुत प्रतिनिधि ने मरीज के तीमारदार से बंटवाया खाना
Nainital
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:34 AM IST
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हल्द्वानी। अभी एक सप्ताह पहले ही वित्त मंत्री की मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार पर लगाई फटकार बेअसर हो गई। बेस अस्पताल में आज अति की भी अति हो गई। नशे में कथित रूप से धुत ठेकेदार के प्रतिनिध ने मरीज के भाई से मरीजों को खाना बंटवाया। नशे का सुरूर और नेता के रिश्तेदार के नाम ठेका होने के गुरूर में चूर प्रतिनिधि ने कहा जो मर्जी आए छाप दो मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। डाक्टर भी मेडिकल कराने से काफी देर तक बचते रहे। बेस अस्पताल में मरीजों का खाना बांटने का जिम्मा एलर डेकोर कंपनी को मिला है। यह कंपनी एक नेता के रिश्तेदार की बताई जाती है। खाना बांटने का जिम्मा मुकेश चंद द्विवेदी को दिया गया है। मुकेश बुधवार की देर रात हड्डी वार्ड के बेड नंबर 31 पर भर्ती वीर बहादुर के भाई रवि से खाना बंटवा रहा था। वीर बहादुर नेपाल का रहने वाला है और यहां मजदूरी करने आया था। सड़क दुर्घटना में घायल होने के कारण उसे बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरटीआई कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्ढा जब बेस अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने रवि को खाना बांटते देखा। चड्ढा का कहना है कि द्विवेदी नशे में धुत था और चल नहीं पा रहा था। चड्ढा ने दो अक्तूबर को भी अस्पताल के रजिस्टर में खराब खाना परोसने और द्विवेदी के नशे में होने की शिकायत की थी। उन्होंने आज फिर रजिस्टर में शिकायत दर्ज की। अस्पताल प्रशासन के पास इतना समय नहीं है कि मरीजों के साथ हो रहे खिलवाड़ और अस्पताल में नशाखोरी पर रोक लगा सके। चड्ढा का आरोप है कि जब डाक्टर से मेडिकल कराने को कहा गया तो काफी देर तक टाल-मटोल करते रहे। इमरजेंसी में तैनात डाक्टर डीपी सिंह ने मेमो (पुलिस सूचना) भरकर पुलिस को भेजने की बात कही। देर रात तक मेमो थाने नहीं पहुंचा था। इस संबंध में द्विवेदी का कहना था कि उसने शराब नहीं पी है। द्विवेदी ने कहा कि सुबह आठ से शाम को आठ बजे तक खाना बांटने की ड्यूटी है। बुधवार को 48 मरीजों को खाना बांटना था। उसने बताया कि खाना बांटने का ठेका एलर डेकोर कंपनी को मिला है। कंपनी के मालिक रमेश जीना है। जीना एक नेता के रिश्तेदार हैं। न लौकी दिखी न दाल
हल्द्वानी। मरीजों को खाने में चने-लौकी की दाल और रोटी परोसी जा रही थी। दाल की बाल्टी में न तो लौकी का पता चल रहा था और न ही चने की दाल का। एक बास्केट में रोटी रखी हुई थीं और उसे कपड़े से ढक रखा था।
इनसेट
मरीज के तीमारदार से खाना बंटवाना कोई अपराध तो नहीं
हल्द्वानी। कंपनी के प्रतिनिधि मुकेश चंद द्विवेदी ने कहा कि साथ में चार कर्मचारी काम करते हैं। तीन कर्मचारी छुट्टी पर गए हैं। ऐसे में खाना किससे बंटवाया जाए। मरीज के तीमारदार से खाना बंटवाना कोई अपराध तो नहीं है।
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बाहरी व्यक्ति खाने में कुछ मिला देता तो कौन होता जिम्मेदार
हल्द्वानी। आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत को बेस अस्पताल प्रशासन ने कतई गंभीरता से नहीं लिया। कंपनी का प्रतिनिधि नेपाल मूल के रहने वाले एक व्यक्ति से खाना बंटवा रहा था। जहरखुरानी आदि की तमाम घटनाएं अकसर होती हैं। अगर खाने में कुछ मिलाकर मरीजों को दे दिया जाता तो कौन होता इसका जिम्मेदार।
सीएमएस को ठेकेदार का पता नहीं
हल्द्वानी। बेस अस्पताल में खाना बांटने का ठेका किसको दिया गया है इसकी जानकारी कार्यवाहक सीएमएस को ही नहीं है। वैसे ये संभव तो नहीं लगता लेकिन यदि है तो बेस अस्पताल की व्यवस्थाएं कैसे होंगी इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है।
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हल्द्वानी। मरीजों को खाने में चने-लौकी की दाल और रोटी परोसी जा रही थी। दाल की बाल्टी में न तो लौकी का पता चल रहा था और न ही चने की दाल का। एक बास्केट में रोटी रखी हुई थीं और उसे कपड़े से ढक रखा था।
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मरीज के तीमारदार से खाना बंटवाना कोई अपराध तो नहीं
हल्द्वानी। कंपनी के प्रतिनिधि मुकेश चंद द्विवेदी ने कहा कि साथ में चार कर्मचारी काम करते हैं। तीन कर्मचारी छुट्टी पर गए हैं। ऐसे में खाना किससे बंटवाया जाए। मरीज के तीमारदार से खाना बंटवाना कोई अपराध तो नहीं है।
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बाहरी व्यक्ति खाने में कुछ मिला देता तो कौन होता जिम्मेदार
हल्द्वानी। आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत को बेस अस्पताल प्रशासन ने कतई गंभीरता से नहीं लिया। कंपनी का प्रतिनिधि नेपाल मूल के रहने वाले एक व्यक्ति से खाना बंटवा रहा था। जहरखुरानी आदि की तमाम घटनाएं अकसर होती हैं। अगर खाने में कुछ मिलाकर मरीजों को दे दिया जाता तो कौन होता इसका जिम्मेदार।
सीएमएस को ठेकेदार का पता नहीं
हल्द्वानी। बेस अस्पताल में खाना बांटने का ठेका किसको दिया गया है इसकी जानकारी कार्यवाहक सीएमएस को ही नहीं है। वैसे ये संभव तो नहीं लगता लेकिन यदि है तो बेस अस्पताल की व्यवस्थाएं कैसे होंगी इसका सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है।