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वन विकास निगम अध्यक्ष के आदेश को चुनौती

Mon, 04 Nov 2013 05:43 AM IST
Nainital
Nainital Updated Mon, 04 Nov 2013 05:43 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में खनन के लिए गौला नदी में तमाम गेटों पर लगे धर्मकाटों के मामले में वन विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के आदेश पर निविदा निरस्त कर पांच सालों तक कांट्रेक्ट मैसर्स आंचल धर्मकांटा एसोसिएशन को देने के प्रकरण में वन विकास निगम को एक हफ्ते में प्रतिशपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मैसर्स आंचल को समन भी जारी किया है। अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तिथि नियत की गई है।
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मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। श्री उत्तराखंड सेवा समिति हल्द्वानी ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि हल्द्वानी में खनन के लिए गौला में जितने भी गेटों पर धर्मकांटे स्थापित हैं। उनका कांट्रेक्ट वन विकास निगम और मैसर्स आंचल धर्मकांटा के बीच तीन साल के लिए था और यह जून, 2013 में खत्म हो गया।
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छह सितंबर, 2013 को वन विकास निगम ने इसके लिए निविदा आमंत्रित की लेकिन 16 सितंबर 2013 को निगम के तत्कालीन अध्यक्ष चैंपियन के आदेश पर निविदा निरस्त कर दी गई। याचिका में कहा गया कि 30 सितंबर 2013 को निगम के अध्यक्ष चैंपियन के आदेश अनुपालन में वन विकास निगम ने अगले पांच सालों के लिए बिना किसी निविदा और विज्ञापन के मैसर्स आंचल के साथ कांट्रेक्ट कर 21 अक्तूबर को कार्यादेश भी जारी कर दिया। याचिका में कहा गया है कि बंद कमरे में कैसे कांट्रेक्ट दिया जा सकता है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने वन विकास निगम को एक सप्ताह के भीतर प्रतिशपथपत्र दाखिल करने और मैसर्स आंचल को समन जारी किया है।
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