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घायल तेंदुए ने तोड़ा दम
Nainital
Updated Mon, 22 Jul 2013 05:33 AM IST
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हल्द्वानी/लालकुआं। लालकुआं में रेस्क्यू किए गए तेंदुए ने रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया है। रविवार को टांडा रेंज में तेंदुए का पोस्टमार्टम हुआ है, इसमें तेंदुए के शरीर में चोट और गोली के निशान नहीं मिलने की बात अधिकारी कह रहे हैं, लेकिन आशंका है कि तेंदुए को जहर दिया गया हो। इसे देखते हुए बिसरा को जांच के लिए बरेली स्थित आईवीआरआई भेजा जा रहा है। वहीं, पशु चिकित्सकों ने प्रथमदृष्ट्या तेंदुए की मौत का कारण हार्ट अटैक बताया है।
शनिवार को लालकुआं के आबादी क्षेत्र में मादा तेंदुआ घुस आने से खलबली मच गई थी। बाद में जंगलात की टीम तेंदुए को रेस्क्यू कर रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर में इलाज के लिए ले गई। वनाधिकारियों के अनुसार तेंदुए ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बाद में पशु चिकित्सकों की टीम ने टांडा रेंज के कार्यालय में तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया है। अभी रिपोर्ट आनी है। शव को विभागीय प्रक्रिया के दौरान तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ एसपी सिंह, एसडीओ किच्छा बी निसाद, आरओ गणेश त्रिपाठी के अलावा पंतनगर विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सक डा. मुनीष बत्रा, कालाढूंगी के पशु चिकित्सक डा. अनिल रावत एवं लालकुआं के पशु चिकित्सक डा. गणेश परिहार की निगरानी में टांडा रेंज कार्यालय के निकट आग लगाकर नष्ट कर दिया गया, लेकिन जिस अवस्था में तेंदुआ मिला है उसे देखते हुए जहर देने की आशंका लग रही है। जब तेंदुआ पकड़ा गया था, उसके पीछे के दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे और लकवा जैसे लक्षण थे। पांच साल के हष्ट-पुष्ट तेंदुए के अचानक लकवा होने को संदिग्ध माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीवों को अगर जहर दिया जाता है, उसमें पहले लकवे के लक्षण प्रकट होते हैं, जिसके बाद वन्यजीव की मौत हो जाती है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग डीएफओ एसपी सिंह कहते हैं कि किसी भी आशंका को खारिज नहीं किया जा रहा है। बिसरा जांच के लिए भेजा जा रहा है।
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शनिवार को लालकुआं के आबादी क्षेत्र में मादा तेंदुआ घुस आने से खलबली मच गई थी। बाद में जंगलात की टीम तेंदुए को रेस्क्यू कर रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर में इलाज के लिए ले गई। वनाधिकारियों के अनुसार तेंदुए ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। बाद में पशु चिकित्सकों की टीम ने टांडा रेंज के कार्यालय में तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया है। अभी रिपोर्ट आनी है। शव को विभागीय प्रक्रिया के दौरान तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ एसपी सिंह, एसडीओ किच्छा बी निसाद, आरओ गणेश त्रिपाठी के अलावा पंतनगर विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सक डा. मुनीष बत्रा, कालाढूंगी के पशु चिकित्सक डा. अनिल रावत एवं लालकुआं के पशु चिकित्सक डा. गणेश परिहार की निगरानी में टांडा रेंज कार्यालय के निकट आग लगाकर नष्ट कर दिया गया, लेकिन जिस अवस्था में तेंदुआ मिला है उसे देखते हुए जहर देने की आशंका लग रही है। जब तेंदुआ पकड़ा गया था, उसके पीछे के दोनों पैर काम नहीं कर रहे थे और लकवा जैसे लक्षण थे। पांच साल के हष्ट-पुष्ट तेंदुए के अचानक लकवा होने को संदिग्ध माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीवों को अगर जहर दिया जाता है, उसमें पहले लकवे के लक्षण प्रकट होते हैं, जिसके बाद वन्यजीव की मौत हो जाती है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग डीएफओ एसपी सिंह कहते हैं कि किसी भी आशंका को खारिज नहीं किया जा रहा है। बिसरा जांच के लिए भेजा जा रहा है।
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