फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   मिसकॉल ने बांधा सात जन्मों का बंधन

मिसकॉल ने बांधा सात जन्मों का बंधन

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Nainital
Nainital Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
हल्द्वानी। प्यार को कभी सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता और न ही यह मुलाकातों का मोहताज होता है। प्यार का बीज तो एक छोटी सी मिसकॉल भी बो सकती है, बस दिल में प्यार होना चाहिए। ऐसी ही एक मिसकॉल ने करीब एक साल पहले सैकड़ों मील दूर एक-दूसरे से अंजान बैठे दो दिलों को मिला दिया। हाथरस के सुधीर के मोबाइल पर एक दिन बागेश्वर की अंजलि ने गलती से फोन क्या किया दोनों के दिल की रिंगटोन एक-दूजे के लिए बजने लगी। एक मिसकॉल धीरे-धीरे घंटों की कॉल में बदली। फोन पर ही साथ जीने-मरने की कसमें खाईं और शनिवार को दोनों सात जन्मों के बंधन में बंध गए। इन दोनों के प्यार का गवाह बना हल्द्वानी का गोलज्यू मंदिर।
विज्ञापन

सुधीर रावत मूलरूप से हाथरस का रहने वाला है और अंजलि टाकुली बागेश्वर के झुनी गांव की। सालभर पहले तक पहाड़ और मैदान के दो छोरों पर बसे इन दोनों का एक-दूसरे के जीवन में कोई दखल न था लेकिन आज ये दो शरीर और एक जान हैं। प्यार की ये कहानी जितनी रोचक है उतनी ही नैतिक भी। सुधीर ने बताया कि करीब एक साल पहले उसके मोबाइल पर एक मिसकॉल आई। सुधीर ने जब मिसकॉल का जवाब दिया तो दूसरी तरफ फोन एक लड़की ने उठाया। इस लड़की नाम अंजलि था। अंजलि के मुंह से ही सुधीर ने पहली बार बागेश्वर का नाम सुना था। इसके बाद अक्सर, फिर रोज और धीरे-धीरे हर घंटे दोनों में बात होने लगी। प्यार ऐसा परवान चढ़ा कि दोनों ने फोन पर ही सात जन्मों तक साथ रहने की कसमें खालीं। अब सवाल था दोनों के लिए घर वालों को मनाना।
विज्ञापन

सुधीर ने हिम्मत बांधी और सीधे बात की अंजलि के पिता से लेकिन अंजलि के पिता के लिए एक अंजान लड़के के हाथ में अपनी बेटी का हाथ देना मुश्किल था। अंजलि के पिता की न-नुकुर से सुधीर ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि हौसला बांधकर वह पहाड़ों को चीरते हुए झुनी गांव पहुंच गया। पहाड़ों के बीच बसा ये गांव उसके लिए एक सपने जैसा था। झुनी में सुधीर और अंजलि की पहली मुलाकात हुई। सुधीर की हिम्मत का सम्मान अंजलि के पिता ने भी किया और बिल्कुल मेहमानों की तरह उसे अपने घर में रखा। लेकिन सुधीर के अतीत और परिवार के बारे में अंजलि के पिता अब भी बहुत कुछ नहीं जानते थे। इस कारण उन्होंने शादी से साफ इनकार कर दिया। सुधीर को समझाकर वापस भेजने वाले अंजलि के पिता अपनी बेटी के आंसुओं के आगे हार गए। अंजलि ने अपने पिताजी को भरोसा दिलाया कि वह सुधीर के अलावा किसी के साथ खुश नहीं रह पाएगी। इसके बाद सुधीर और अंजलि ने दोनों परिवारों को मिलाया। सुधीर की माताजी ने भी अंजलि के परिजनों को भरोसा दिलाया कि उनके बेटी हमेशा खुशी रहेगी। सबकी जिद के आगे अंजलि के पिता भी हार गए और एक मिसकॉल से उपजा प्यार शनिवार को हल्द्वानी में शादी में बदल गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed