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... मुझे ममता की छांव दे दो
Nainital
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। ‘मां’। ...ममता, स्नेह और दुलार का आंचल। जन्म देकर जीना सिखाने वाली एक छांव। जन्मदात्री की बदौलत ही तो ये दुनिया टिकी है, लेकिन 22 दिन की नवजात के लिए मां के कोई मायने नहीं। नौ महीने तक कोख में रखा तो उसे दर्द नहीं हुआ और पैदा होते ही वो बेदर्द बन गई। झाड़ियों में फेंककर अपनी ममता की हत्या कर गई। इस संसार में जीना था तो मौत कैसे आती। आज नन्हे शरीर में जान है, लेकिन ममता, स्नेह का आंचल देने वाला कोई नहीं।
28 अक्तूबर को बेतालघाट पुलिस जिस नवजात बच्ची को राजकीय मेडिकल कालेज लेकर आई थी, आज वो 22 दिन की हो गई है। वो मां के दूध के लिए चीखती है, लेकिन जन्म देने वाली का दूध इस कोमल जान को नसीब नहीं। अपनी मां के बजाए वो उन माताओं के दूध से पल रही है जिनका उससे कोई रिश्ता ही नहीं। उसकी आंखों में हर पल आंसू हैं। बेबस निगाहों को हर तरफ घुमाती है कि कहीं मेरी मां तो नहीं आई। मासूम को तो यह तक पता नहीं कि कोख में रखने वाली ही उसकी हत्या करने के लिए उसे झाड़ियों में फेंककर गई थी।
वो संसार से अंजान है। मां की गोद और उसका आंचल नहीं मिलने के कारण बस मेडिकल कालेज में यह गुड़िया दिन गुजार रही है। उसके करुण क्रंदन में बस एक ही शब्द झलकता है। ‘मां’। वो असहाय ममत्व की छांव को तड़प रही है। ...क्या कोई है जो इस नन्ही गुड़िया को गोद लेकर उसका जीवन संवारेगा? इधर, बच्ची के स्वस्थ होने के बाद समाजसेवी गुरविंदर चड्डा ने बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष तथा जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बच्ची को बाल सदन भेजने की मांग की है।
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28 अक्तूबर को बेतालघाट पुलिस जिस नवजात बच्ची को राजकीय मेडिकल कालेज लेकर आई थी, आज वो 22 दिन की हो गई है। वो मां के दूध के लिए चीखती है, लेकिन जन्म देने वाली का दूध इस कोमल जान को नसीब नहीं। अपनी मां के बजाए वो उन माताओं के दूध से पल रही है जिनका उससे कोई रिश्ता ही नहीं। उसकी आंखों में हर पल आंसू हैं। बेबस निगाहों को हर तरफ घुमाती है कि कहीं मेरी मां तो नहीं आई। मासूम को तो यह तक पता नहीं कि कोख में रखने वाली ही उसकी हत्या करने के लिए उसे झाड़ियों में फेंककर गई थी।
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वो संसार से अंजान है। मां की गोद और उसका आंचल नहीं मिलने के कारण बस मेडिकल कालेज में यह गुड़िया दिन गुजार रही है। उसके करुण क्रंदन में बस एक ही शब्द झलकता है। ‘मां’। वो असहाय ममत्व की छांव को तड़प रही है। ...क्या कोई है जो इस नन्ही गुड़िया को गोद लेकर उसका जीवन संवारेगा? इधर, बच्ची के स्वस्थ होने के बाद समाजसेवी गुरविंदर चड्डा ने बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष तथा जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बच्ची को बाल सदन भेजने की मांग की है।
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