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राशि के अनुसार वस्तु खरीदना होगा शुभ
Nainital
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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हल्द्वानी। पंच पर्व का आरंभ हमेशा धनतेरस से होता है। ज्योतिषियों के मुताबिक पंच पर्व में क्रमश: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजन और भैया दूज इन पांचों को सम्मिलित किया जाता है। पर्व का आरंभ धनतेरस से होने के कारण यह महत्वपूर्ण है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी या तेरस पर पड़ने के कारण इसे तेरस शब्द दिया गया है और धनधान्य की वृद्धि कराने वाली तिथि के कारण धन शब्द लिया गया।
ज्योतिषाचार्य पं. डा. नवीन जोशी और डा. गोपाल दत्त त्रिपाठी बताते हैं कि इस दिन पूजन करने से सालभर धन का अभाव नहीं रहता है। इस दिन स्वर्ण आभूषण, नए बर्तन, नए वस्त्र आदि खरीदे जाते हैं। दीपावली के दिन सोने और चांदी के आभूषण, सिक्के का पूजन करना माता लक्ष्मी के पूजन के अंग हैं। इसके लिए भी सोने, चांदी का क्रय धनतेरस को ही करना शुभ है। इस बार रविवार को सुबह 10.36 बजे तक द्वादशी तिथि है। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। वस्तु खरीददारी मुहूर्त प्रात: नौ बजे से शुरू हो जाएगा। धनतेरस पर खरीददारी के लिए उत्तम समय सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.00 तक है। इस अवधि में अमृत और लाभ का योग है। दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक शुभ और सायं 6.00 से 7.00 बजे तक भी खरीददारी के योग हैं। सर्वाधिक शुभ काल सायं 7.00 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक अमृत योग में है। धन्वंतरि पूजन का समय सायं 5.55 के बाद शुभ रहेगा। अपनी राशि के अनुसार सामान खरीदने के लिए अपनी राशि का अवलोकन कर सकेत हैं।
मेष : सफेद वस्तु, चांदी में अति लाभ (यत्न: वृक्ष के नीचे पांच दीये जलाएं)
वृष : आभूषण, रसोई का सामान (यत्न: सायंकाल दक्षिण की ओर चार दीपक जलाएं)
मिथुन : लोहे से निर्मित सामान, वाहन, वस्त्र शुभ (यत्न: तीन या सात दीपक पूर्व की ओर जलाएं)
कर्क : सफेद वस्तु, चांदी के आभूषण, जल पात्र शुभ (यत्न: सायं खीलों के ऊपर घी का दीपक जलाएं)
सिंह : सोने के आभूषण, वस्त्र, देव प्रतिमा, वाहन शुभ (यत्न: पेड़ के नीचे दीपदान)
कन्या : चांदी, लोहे के उपकरण, वस्त्र (यत्न: विशेष लाभ के लिए पीले वस्त्र में लक्ष्मी, गणेश की पूजा)
तुला : चांदी के आभूषण, रत्न, सफेद वस्तु क्रय करें (यत्न: सायंकाल दीपदान)
वृश्चिक : स्वर्ण आभूषण, देव प्रतिमाएं, रत्न (यत्न: रक्त चंदन से लक्ष्मी, गणेश का पूजन करें)
धनु : चांदी, लोहे के उपकरण (यत्न: घी के तीन या नौ दीपक जलाएं)
मकर : स्वर्ण, वस्त्र (यत्न: सायं वृक्ष के नीचे दीपदान करें)
कुंभ : तांबे के बर्तन, नया प्रतिष्ठान शुभ (यत्न: खीले के ऊपर विषम संख्या का दीपदान)
मीन : सफेद रंग के धातु, नए उद्योग का आरंभ (यत्न: चंद्रमा, बृहस्पति का विशेष पूजन)
दीपदान से टलती है अल्प मृत्यु
हल्द्वानी। धनतेरस पर्व पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपोत्सव पर्व की शुरूआत इसी दिन होती है। ज्योतिषियों के मुताबिक धनतेरस को व्रत और पूजन करने से अल्प मृत्यु टलती है। अल्प मृत्यु निवारक होने के कारण अधिकांश लोग धनतेरस व्रत धारण कर पूजा-अर्चना करते हैं।
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ज्योतिषाचार्य डा. गोपाल दत्त त्रिपाठी और डा. नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक सुंदर स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के साथ किए जाने वाले व्रत पर सुविज्ञ लोग दीपदान करते हैं। वर्ष कृत्य में लिखा है, ‘कार्तिकस्या सिते पक्षे, त्रयोदश्यां निशामुखे, यम दीपं बर्हिदद्यात, अपमृत्युर्विनस्यति।’ लक्ष्मी द्वारा प्रदत्त सुख, भोग, समृद्धि का भोग सुशास्त्र वाला व्यक्ति करता है। धनतेरस पर सांय काल धातु, वस्त्र आदि खरीदने से दरिद्र दूर होता है।
नौ के अंक का है विशेष महत्व
हल्द्वानी। इस बार धनतेरस अर्थात धन्वंतरि जयंती रविवार 11.11.2012 को पड़ रही है। ज्योतिषियों के मुताबिक अंक विज्ञान के अनुसार योग करने पर इसका योग नौ आता है। जो विशेष प्रकार का भाग्यांक कहा जाता है। ज्योतिषी डा. नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक ज्योतिष शास्त्र में भी नौ अंक को विशेष महत्व वाला माना गया है। नवां स्थान कुंडली में भाग्य का स्थान होता है। इस दिन नौ के महायोग या नौ बजे खरीददारी अति शुभ रहेगी।
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ज्योतिषाचार्य पं. डा. नवीन जोशी और डा. गोपाल दत्त त्रिपाठी बताते हैं कि इस दिन पूजन करने से सालभर धन का अभाव नहीं रहता है। इस दिन स्वर्ण आभूषण, नए बर्तन, नए वस्त्र आदि खरीदे जाते हैं। दीपावली के दिन सोने और चांदी के आभूषण, सिक्के का पूजन करना माता लक्ष्मी के पूजन के अंग हैं। इसके लिए भी सोने, चांदी का क्रय धनतेरस को ही करना शुभ है। इस बार रविवार को सुबह 10.36 बजे तक द्वादशी तिथि है। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। वस्तु खरीददारी मुहूर्त प्रात: नौ बजे से शुरू हो जाएगा। धनतेरस पर खरीददारी के लिए उत्तम समय सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.00 तक है। इस अवधि में अमृत और लाभ का योग है। दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक शुभ और सायं 6.00 से 7.00 बजे तक भी खरीददारी के योग हैं। सर्वाधिक शुभ काल सायं 7.00 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक अमृत योग में है। धन्वंतरि पूजन का समय सायं 5.55 के बाद शुभ रहेगा। अपनी राशि के अनुसार सामान खरीदने के लिए अपनी राशि का अवलोकन कर सकेत हैं।
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मेष : सफेद वस्तु, चांदी में अति लाभ (यत्न: वृक्ष के नीचे पांच दीये जलाएं)
वृष : आभूषण, रसोई का सामान (यत्न: सायंकाल दक्षिण की ओर चार दीपक जलाएं)
मिथुन : लोहे से निर्मित सामान, वाहन, वस्त्र शुभ (यत्न: तीन या सात दीपक पूर्व की ओर जलाएं)
कर्क : सफेद वस्तु, चांदी के आभूषण, जल पात्र शुभ (यत्न: सायं खीलों के ऊपर घी का दीपक जलाएं)
सिंह : सोने के आभूषण, वस्त्र, देव प्रतिमा, वाहन शुभ (यत्न: पेड़ के नीचे दीपदान)
कन्या : चांदी, लोहे के उपकरण, वस्त्र (यत्न: विशेष लाभ के लिए पीले वस्त्र में लक्ष्मी, गणेश की पूजा)
तुला : चांदी के आभूषण, रत्न, सफेद वस्तु क्रय करें (यत्न: सायंकाल दीपदान)
वृश्चिक : स्वर्ण आभूषण, देव प्रतिमाएं, रत्न (यत्न: रक्त चंदन से लक्ष्मी, गणेश का पूजन करें)
धनु : चांदी, लोहे के उपकरण (यत्न: घी के तीन या नौ दीपक जलाएं)
मकर : स्वर्ण, वस्त्र (यत्न: सायं वृक्ष के नीचे दीपदान करें)
कुंभ : तांबे के बर्तन, नया प्रतिष्ठान शुभ (यत्न: खीले के ऊपर विषम संख्या का दीपदान)
मीन : सफेद रंग के धातु, नए उद्योग का आरंभ (यत्न: चंद्रमा, बृहस्पति का विशेष पूजन)
दीपदान से टलती है अल्प मृत्यु
हल्द्वानी। धनतेरस पर्व पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। दीपोत्सव पर्व की शुरूआत इसी दिन होती है। ज्योतिषियों के मुताबिक धनतेरस को व्रत और पूजन करने से अल्प मृत्यु टलती है। अल्प मृत्यु निवारक होने के कारण अधिकांश लोग धनतेरस व्रत धारण कर पूजा-अर्चना करते हैं।
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ज्योतिषाचार्य डा. गोपाल दत्त त्रिपाठी और डा. नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक सुंदर स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के साथ किए जाने वाले व्रत पर सुविज्ञ लोग दीपदान करते हैं। वर्ष कृत्य में लिखा है, ‘कार्तिकस्या सिते पक्षे, त्रयोदश्यां निशामुखे, यम दीपं बर्हिदद्यात, अपमृत्युर्विनस्यति।’ लक्ष्मी द्वारा प्रदत्त सुख, भोग, समृद्धि का भोग सुशास्त्र वाला व्यक्ति करता है। धनतेरस पर सांय काल धातु, वस्त्र आदि खरीदने से दरिद्र दूर होता है।
नौ के अंक का है विशेष महत्व
हल्द्वानी। इस बार धनतेरस अर्थात धन्वंतरि जयंती रविवार 11.11.2012 को पड़ रही है। ज्योतिषियों के मुताबिक अंक विज्ञान के अनुसार योग करने पर इसका योग नौ आता है। जो विशेष प्रकार का भाग्यांक कहा जाता है। ज्योतिषी डा. नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक ज्योतिष शास्त्र में भी नौ अंक को विशेष महत्व वाला माना गया है। नवां स्थान कुंडली में भाग्य का स्थान होता है। इस दिन नौ के महायोग या नौ बजे खरीददारी अति शुभ रहेगी।