{"_id":"5a95c1d14f1c1b3f658b544f","slug":"91519763921-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हल्\nद्वानी जू में बनेगा अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हल् द्वानी जू में बनेगा अस्पताल
Updated Wed, 28 Feb 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। समय पर इलाज न मिलने पर बेमौत मर जाने वाले वन्यजीवों का अब हल्द्वानी में उपचार किया जा सकेगा। अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर गौला पार में वन्यजीवों का अस्पताल बनाने की तैयारी है। इस अस्पताल में पश्चिमी वन वृत्त के जंगली जानवरों का उपचार किया जाएगा। अस्पताल शुरू करने के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करने की तैयारियां की जा रही हैं। पश्चिमी वन वृत्त प्रदेश का पहला वृत्त बन जाएगा, जहां खुद का वन्यजीव अस्पताल होगा।
गौला पार में 100 हेक्टेयर वन भूमि में अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर बनाया जाना है। इसी चिड़ियाघर में अब वन्य जीवों का अस्पताल भी बनाया जाएगा। पश्चिमी वन वृत्त में तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, रामनगर, हल्द्वानी के जंगल आते हैं जो करीब 1500 वर्ग किमी में फैले हैं। पिछली बार की गणना में इस वृत्त में सबसे ज्यादा बाघ, तेंदुए मिले थे। इधर जंगली जानवरों के गांवों या आबादी में आने से आए दिन मानव वन्यजीव टकराव होता है। इस टकराव में इंसान के अलावा वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचता है जिसमें अक्सर वन्यजीवों को जान गंवानी पड़ती है। चिड़ियाघर में अस्पताल बनने के जानवरों को समय से उपचार मिलेगा। वन अधिकारियों ने अस्पताल के लिए जरूरी मानक क्लीनिक, स्टाफ क्वाटर, प्रयोगशाला विशेषज्ञ आदि को पूरा करने के लिए तैयारियां कर ली हैं।
बाघ, तेंदुए के लिए होंगे चार-चार पिंजरे
वन्य जीव अस्पताल में बाघ, तेंदुए के लिए चार-चार पिंजरे होंगे। जहां घायल बाघ, तेंदुए का इलाज किया जाएगा। हाथियों, नीलगाय, चीतल के लिए भी अलग सेक्शन बनाया जाएगा। पक्षी, सरीसृप (सांप) के लिए भी उपचार कक्ष होगा।
विज्ञापन
जानवरों के बच्चों के लिए होगा बेबी केयर जोन
मानव वन्य जीव टकराव में अक्सर जानवर की मौत हो जाती है। इससे जानवरों के नए पैदा हुए बच्चों के सामने भी जीवन का संकट हो जाता है। ऐसे बच्चों की देखभाल के लिए एक बेबी केयर जोन भी बनाया जाएगा। जहां उनका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
फोरेंसिक, पैथोलॉजी लैब भी होगी
जंगली जानवरों की मौत के रहस्य की गुत्थी सुलझाने के लिए फोरेंसिक जांच के लिए भी लैब बनाई जाएगी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की जांचों के लिए पैथ लैब भी होगी।
गौला पार जू में वन्यजीवों का अस्पताल बनाया जाएगा। इस अस्पताल में बाघ, तेंदुआ, हाथी, सांप, पक्षी के उपचार के इंतजाम होंगे।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक, पश्चिमी वन वृत्त
विज्ञापन
गौला पार में 100 हेक्टेयर वन भूमि में अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर बनाया जाना है। इसी चिड़ियाघर में अब वन्य जीवों का अस्पताल भी बनाया जाएगा। पश्चिमी वन वृत्त में तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, तराई पश्चिमी, रामनगर, हल्द्वानी के जंगल आते हैं जो करीब 1500 वर्ग किमी में फैले हैं। पिछली बार की गणना में इस वृत्त में सबसे ज्यादा बाघ, तेंदुए मिले थे। इधर जंगली जानवरों के गांवों या आबादी में आने से आए दिन मानव वन्यजीव टकराव होता है। इस टकराव में इंसान के अलावा वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचता है जिसमें अक्सर वन्यजीवों को जान गंवानी पड़ती है। चिड़ियाघर में अस्पताल बनने के जानवरों को समय से उपचार मिलेगा। वन अधिकारियों ने अस्पताल के लिए जरूरी मानक क्लीनिक, स्टाफ क्वाटर, प्रयोगशाला विशेषज्ञ आदि को पूरा करने के लिए तैयारियां कर ली हैं।
विज्ञापन
बाघ, तेंदुए के लिए होंगे चार-चार पिंजरे
वन्य जीव अस्पताल में बाघ, तेंदुए के लिए चार-चार पिंजरे होंगे। जहां घायल बाघ, तेंदुए का इलाज किया जाएगा। हाथियों, नीलगाय, चीतल के लिए भी अलग सेक्शन बनाया जाएगा। पक्षी, सरीसृप (सांप) के लिए भी उपचार कक्ष होगा।
विज्ञापन
जानवरों के बच्चों के लिए होगा बेबी केयर जोन
मानव वन्य जीव टकराव में अक्सर जानवर की मौत हो जाती है। इससे जानवरों के नए पैदा हुए बच्चों के सामने भी जीवन का संकट हो जाता है। ऐसे बच्चों की देखभाल के लिए एक बेबी केयर जोन भी बनाया जाएगा। जहां उनका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
फोरेंसिक, पैथोलॉजी लैब भी होगी
जंगली जानवरों की मौत के रहस्य की गुत्थी सुलझाने के लिए फोरेंसिक जांच के लिए भी लैब बनाई जाएगी। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की जांचों के लिए पैथ लैब भी होगी।
गौला पार जू में वन्यजीवों का अस्पताल बनाया जाएगा। इस अस्पताल में बाघ, तेंदुआ, हाथी, सांप, पक्षी के उपचार के इंतजाम होंगे।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, वन संरक्षक, पश्चिमी वन वृत्त