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हज यात्रा - कोटे से चार गुना अधिक आवेदन
Updated Sat, 23 Dec 2017 01:50 AM IST
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हल्द्वानी। हज यात्रा के लिए आवेदन करने का समय शुक्रवार की शाम समाप्त हो गया। प्रदेश भर से करीब चार हजार लोगों ने आवेदन किया, जबकि उत्तराखंड का कोटा 1061 है। इस लिहाज से हर सीट पर चार दावेदार हैं।
इस बार हज यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन मांगे गए थे। आखिरी तारीख 22 दिसंबर निर्धारित की गई थी। शुक्रवार की शाम तक हज कमेटी के रुड़की स्थित कार्यालय में करीब 4000 लोगों ने आवेदन किया, इनमें 1200 आवेदन ऑनलाइन आए। हज यात्रा के लिए आवेदकों का चयन कुर्राअंदाजी (ड्रा) से किया जाएगा। ड्रा की तारीख सेंट्रल हज कमेटी मुंबई की ओर से तय की जाएगी। ड्रा में चयनित लोगों को ही हज यात्रा की अनुमति मिलेगी।
इस बार सेंट्रल हज कमेटी ने पांच साल से लगातार आवेदन करने वालों को आरक्षित श्रेणी में नहीं रखा, केवल 70 साल की उम्र के बुजुर्ग आवेदकों को ही आरक्षण दिया गया है। प्रदेश से करीब 200 लोगों ने इस श्रेणी में आवेदन किया है। उनका जाना तय माना जा रहा है। प्रदेश हज कमेटी के चेयरमैन हाजी राव शेर मोहम्मद ने बताया कि प्रदेश का हज कोटा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा आवेदकों को जाने का मौका मिल सके।
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बिना बेहरम चार महिलाओं ने किया आवेदन
हज यात्रा पर महिलाएं अपने मेहरम (जिस व्यक्ति से खून का रिश्ता हो) के साथ ही जाती हैं। इस बार सेंट्रल हज कमेटी ने 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मेहरम की बाध्यता को खत्म कर दिया है। इसके लिए एक ग्रुप में चार महिलाओं का होना जरूरी है। इसके तहत हल्द्वानी और रुद्रपुर की चार महिलाओं ने ग्रुप बनाकर हज के लिए आवेदन किया है। इनमें हल्द्वानी के लाइन नंबर 13 निवासी जमीला (65) पत्नी मोहम्मद सिद्दीक, लाइन नंबर 17 निवासी फातिमा बेगम (61) पत्नी अच्छन, नई बस्ती निवासी रमजानो (66) पत्नी जमील अहमद और रुद्रपुर की इंदिरा कालोनी निवासी रफीकन (62) पत्नी नजीर अहमद ने आवेदन किया है।
शिविर न लगने से घट गए आवेदक
पिछले वर्षों तक प्रदेश हज कमेटी जगह-जगह कैंप लगाकर हज के आवेदन पत्र जमा करती थी। इस बार कमेटी ने कहीं कैंप नहीं लगाए, हज कमेटी के कार्यालय में ही आवेदन मंगाए गए। कमेटी का तर्क है कि समय कम होने और ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा देने की वजह से कैंप नहीं लगाए गए। शिविर न लगने से महज चार हजार लोगों ने ही आवेदन किया, जबकि पिछले साल 4800 आवेदन आए थे।
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इस बार हज यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन मांगे गए थे। आखिरी तारीख 22 दिसंबर निर्धारित की गई थी। शुक्रवार की शाम तक हज कमेटी के रुड़की स्थित कार्यालय में करीब 4000 लोगों ने आवेदन किया, इनमें 1200 आवेदन ऑनलाइन आए। हज यात्रा के लिए आवेदकों का चयन कुर्राअंदाजी (ड्रा) से किया जाएगा। ड्रा की तारीख सेंट्रल हज कमेटी मुंबई की ओर से तय की जाएगी। ड्रा में चयनित लोगों को ही हज यात्रा की अनुमति मिलेगी।
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इस बार सेंट्रल हज कमेटी ने पांच साल से लगातार आवेदन करने वालों को आरक्षित श्रेणी में नहीं रखा, केवल 70 साल की उम्र के बुजुर्ग आवेदकों को ही आरक्षण दिया गया है। प्रदेश से करीब 200 लोगों ने इस श्रेणी में आवेदन किया है। उनका जाना तय माना जा रहा है। प्रदेश हज कमेटी के चेयरमैन हाजी राव शेर मोहम्मद ने बताया कि प्रदेश का हज कोटा बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा आवेदकों को जाने का मौका मिल सके।
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बिना बेहरम चार महिलाओं ने किया आवेदन
हज यात्रा पर महिलाएं अपने मेहरम (जिस व्यक्ति से खून का रिश्ता हो) के साथ ही जाती हैं। इस बार सेंट्रल हज कमेटी ने 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मेहरम की बाध्यता को खत्म कर दिया है। इसके लिए एक ग्रुप में चार महिलाओं का होना जरूरी है। इसके तहत हल्द्वानी और रुद्रपुर की चार महिलाओं ने ग्रुप बनाकर हज के लिए आवेदन किया है। इनमें हल्द्वानी के लाइन नंबर 13 निवासी जमीला (65) पत्नी मोहम्मद सिद्दीक, लाइन नंबर 17 निवासी फातिमा बेगम (61) पत्नी अच्छन, नई बस्ती निवासी रमजानो (66) पत्नी जमील अहमद और रुद्रपुर की इंदिरा कालोनी निवासी रफीकन (62) पत्नी नजीर अहमद ने आवेदन किया है।
शिविर न लगने से घट गए आवेदक
पिछले वर्षों तक प्रदेश हज कमेटी जगह-जगह कैंप लगाकर हज के आवेदन पत्र जमा करती थी। इस बार कमेटी ने कहीं कैंप नहीं लगाए, हज कमेटी के कार्यालय में ही आवेदन मंगाए गए। कमेटी का तर्क है कि समय कम होने और ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा देने की वजह से कैंप नहीं लगाए गए। शिविर न लगने से महज चार हजार लोगों ने ही आवेदन किया, जबकि पिछले साल 4800 आवेदन आए थे।