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‘पाप तुम्हारे सारे धो गई, मलिन भले खुद गंगा हो गई’...

Mon, 01 Apr 2019 01:52 AM IST
madan singh Madan Singh
Updated Mon, 01 Apr 2019 01:52 AM IST
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‘पाप तुम्हारे सारे धो गई, मलिन भले खुद गंगा हो गई’...
नैनीताल में कवि सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला
नैनीताल। लायंस क्लब नैनीताल गोल्ड की ओर से रविवार को आर्य समाज हॉल में ‘कविता की दोपहर’ कार्यक्रम हुआ। इसमें रामपुर, लालकुआं, सितारगंज, हल्द्वानी, बरेली, अल्मोड़ा, गदरपुर और काशीपुर के कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं। नैनीताल के स्थानीय कवियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया।
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काशीपुर के अनिल सारस्वत ने ‘वीर रस की कविता मैं अपने हर सैनिक भगवान की मूरत पाता हूं’, सितारगंज की पुष्पा जोशी प्राकाम्य ने ‘तिरंगा शान है अपनी, तिरंगा जान है अपनी’, बरेली की राजबाला धैर्य ने ‘पाप तुम्हारे सारे धो गई, मलिन भले खुद गंगा हो गई’, डॉ.शालिनी शर्मा मुक्ता ने ‘साल में बस एक बार आती है होली’, अल्मोड़ा की डॉ.शशि जोशी ने ‘दिल की धरती बंजर न हो, कुछ रंगत धानी बनी रहे’, प्रियंका जोशी ने ‘धन्य है वो वीर जिनको वीरगति का गम नहीं’, बरेली के डॉ.महेश मधुकर ने ‘मां का मन है गहन समुंदर उच्च विशाल गगन’, रामपुर के राम किशोर वर्मा ने ‘जनता अगर विवेक से नहीं करेगी वोट’, ऊधम सिंह नगर के सुबोध कुमार शर्मा ने ‘अचल हिमालय अंक शिवालय, करता सबका आह्वान’ का पाठ कर प्रस्तुति दी। इस दौरान नीलू एलहेंस, आशा रामी, रेखा त्रिवेदी, प्रो. गंगा बिष्ट, ईशा साह, गीता साह आदि थे, जबकि अतिथियों में पत्रकारिता विभाग के विभाग के अध्यक्ष डॉ.गिरीश रंजन तिवारी, केएमवीएम के पूर्व क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ.डीके शर्मा, पूर्व विधायक डॉ.नारायण सिंह जंतवाल, एडवोकेट ज्योति प्रकाश, समाज सेवी अनूप शाही आदि थे।
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पाप तुम्हारे सारे धो गई, मलिन भले खुद गंगा हो गई...
‘कविता की दोपहर’ कार्यक्रम में कवियों ने सुनाई अपनी रचनाएं


कविता शब्द में ही छिपा है कविता का अर्थ : डॉ. तिवारी
कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारिता विभाग के विभाग के अध्यक्ष डॉ. गिरीश रंजन तिवारी ने कहा कि कविता शब्द में ही इसका अर्थ छिपा है। उन्होंने कहा कि कविता रोते को सुलाने और सोये को जगाने का कार्य करती है। जैसे रोता बच्चा मां की लोरी सुनकर सो जाता है और मधु कैटव के उत्पात मचाने पर देवताओं की स्तुति पर विष्णु भगवान जाग गए थे। उसी तरह वर्तमान समय में शासक को उसकी जिम्मेदारी का अहसास एक कवि से बेहतर कोई नहीं दिला सकता।
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