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घर में शहनाई और बैंक से मिल रही रुसवाई
Updated Fri, 20 Apr 2018 02:08 AM IST
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हल्द्वानी। सहालग के सीजन में लोगों को घर के जरूरी काम छोड़कर बैंकों की कतार में नोटों के लिए खड़ा होना पड़ रहा है। शादी वाले घरों में दो लाख रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक की जरूरत नए नोटों की पड़ रही है मगर बैंकों से मिल रही रुसवाई के कारण खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
शादियों का सीजन अब शुरू हो गया है। शादी वाले घरों में कई अवसरों में नगदी की जरूरत पड़ती है। बुकिंग कराने से लेकर अन्य कई कामों के लिए नगद धनराशि की जरूरत पड़ती है। शगुन की राशि के लिए लोग बैंक नए नोट लेने के लिए जा रहे हैं मगर लोगों को बैंक से निराश लौटना पड़ रहा है। बैंकों से नए नोट लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो एटीएम में नए नोट ही डालने पड़ते हैं। पुराने नोट डालने पर नोट एटीएम में फंस जाता है। पर्याप्त करेंसी न मिलने के कारण भी नए नोट नहीं मिल पा रहे हैं।
सहालग के सीजन में बैंक में नहीं मिल रहे हैं नए नोट
टीका लगाने से लेकर कुछ अन्य रीति रिवाजों के लिए पड़ती है नगदी की जरूरत
दो लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक की है नए नोट की डिमांड
जरूरत एक हजार करोड़ प्रतिमाह की और मिल रहे तीन सौ करोड़
हल्द्वानी। कुमाऊं में प्रतिमाह लगभग एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत होती है मगर मांग के अनुरूप रिजर्व बैंक आफ इंडिया से पर्याप्त करेंसी नहीं मिल पा रही है। मांग के अनुरूप करेंसी न मिलने के कारण करेंसी का संकट गहरा गया है।
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सबसे अधिक करेंसी की जरूरत ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी के लिए पड़ती है। तीन बड़ी बैंकों की पहाड़ों पर शाखाएं हैं। इसमें से एक बैंक की सबसे अधिक शाखाएं कुमाऊं में हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो ऊधमसिंह नगर के लिए दो से ढाई माह में एक हजार करोड़ की डिमांड भेजी जाती है। एक बैंक की अगर पांच करेंसी चेस्ट की बात प्रत्येक के लिए दो सौ करोड़ रुपये की मांग की जाती है। दो सौ करोड़ की राशि दो से ढाई माह चलते हैं। उक्त बैंक पूरे कुमाऊं के लिए तीन माह में दो से ढाई हजार करोड़ रुपये की मांग की जाती है मगर चार सौ से पांच सौ करोड़ रुपये मिलते हैं। दो अन्य बैंकों को भी प्रतिमाह में डेढ़ सौ से दो सौ करोड़ रुपये की जरूरत होती है मगर सिर्फ 30 से 40 करोड़ रुपये ही मिलते हैं। करेंसी भी छोटी मिल रही है। आरबीआई से पर्याप्त करेंसी न मिलने के कारण संकट हो रहा है। हालांकि बैंक के सूत्रों के कहते हैं कि भुगतान लेने के लिए किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है।
ऊधमसिंह नगर में होती है सबसे अधिक धनराशि की जरूरत
पर्याप्त करेंसी न मिलने के कारण हो रहा है संकट
कहीं होल्ड तो नहीं हो रही है करेंसी
हल्द्वानी। नोटबंदी के बाद कालेधन के रूप में जमा धन भी बाहर आया था। छापों में भी बड़ी संख्या में एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट पकड़े गए थे। बैंक सूत्रों की मानें तो करेंसी का संकट होने की एक वजह करेंसी का होल्ड होना भी हो सकता है। कालेधन के रूप में धनराशि लेने वाले बैंक में धनराशि जमा नहीं करते हैं। ऐसे में करेंसी के होल्ड होने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
बॉब का दावा पर्याप्त नकदी है
हल्द्वानी। नकदी संकट के बीच बैंक आफ बड़ौदा ने जारी विज्ञप्ति में दावा किया है कि नकदी की पर्याप्त उपलब्धता है। बैंक के सभी एटीएम विधिवत और सुचारु रूप से संचालित है और नकदी उपलब्ध है। बैंक की ओर से जनता को आवश्यकतानुसार नकदी दी जा रही है।
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शादियों का सीजन अब शुरू हो गया है। शादी वाले घरों में कई अवसरों में नगदी की जरूरत पड़ती है। बुकिंग कराने से लेकर अन्य कई कामों के लिए नगद धनराशि की जरूरत पड़ती है। शगुन की राशि के लिए लोग बैंक नए नोट लेने के लिए जा रहे हैं मगर लोगों को बैंक से निराश लौटना पड़ रहा है। बैंकों से नए नोट लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो एटीएम में नए नोट ही डालने पड़ते हैं। पुराने नोट डालने पर नोट एटीएम में फंस जाता है। पर्याप्त करेंसी न मिलने के कारण भी नए नोट नहीं मिल पा रहे हैं।
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सहालग के सीजन में बैंक में नहीं मिल रहे हैं नए नोट
टीका लगाने से लेकर कुछ अन्य रीति रिवाजों के लिए पड़ती है नगदी की जरूरत
दो लाख से लेकर पांच लाख रुपये तक की है नए नोट की डिमांड
जरूरत एक हजार करोड़ प्रतिमाह की और मिल रहे तीन सौ करोड़
हल्द्वानी। कुमाऊं में प्रतिमाह लगभग एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत होती है मगर मांग के अनुरूप रिजर्व बैंक आफ इंडिया से पर्याप्त करेंसी नहीं मिल पा रही है। मांग के अनुरूप करेंसी न मिलने के कारण करेंसी का संकट गहरा गया है।
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सबसे अधिक करेंसी की जरूरत ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी के लिए पड़ती है। तीन बड़ी बैंकों की पहाड़ों पर शाखाएं हैं। इसमें से एक बैंक की सबसे अधिक शाखाएं कुमाऊं में हैं। बैंक सूत्रों की मानें तो ऊधमसिंह नगर के लिए दो से ढाई माह में एक हजार करोड़ की डिमांड भेजी जाती है। एक बैंक की अगर पांच करेंसी चेस्ट की बात प्रत्येक के लिए दो सौ करोड़ रुपये की मांग की जाती है। दो सौ करोड़ की राशि दो से ढाई माह चलते हैं। उक्त बैंक पूरे कुमाऊं के लिए तीन माह में दो से ढाई हजार करोड़ रुपये की मांग की जाती है मगर चार सौ से पांच सौ करोड़ रुपये मिलते हैं। दो अन्य बैंकों को भी प्रतिमाह में डेढ़ सौ से दो सौ करोड़ रुपये की जरूरत होती है मगर सिर्फ 30 से 40 करोड़ रुपये ही मिलते हैं। करेंसी भी छोटी मिल रही है। आरबीआई से पर्याप्त करेंसी न मिलने के कारण संकट हो रहा है। हालांकि बैंक के सूत्रों के कहते हैं कि भुगतान लेने के लिए किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं है।
ऊधमसिंह नगर में होती है सबसे अधिक धनराशि की जरूरत
पर्याप्त करेंसी न मिलने के कारण हो रहा है संकट
कहीं होल्ड तो नहीं हो रही है करेंसी
हल्द्वानी। नोटबंदी के बाद कालेधन के रूप में जमा धन भी बाहर आया था। छापों में भी बड़ी संख्या में एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट पकड़े गए थे। बैंक सूत्रों की मानें तो करेंसी का संकट होने की एक वजह करेंसी का होल्ड होना भी हो सकता है। कालेधन के रूप में धनराशि लेने वाले बैंक में धनराशि जमा नहीं करते हैं। ऐसे में करेंसी के होल्ड होने की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
बॉब का दावा पर्याप्त नकदी है
हल्द्वानी। नकदी संकट के बीच बैंक आफ बड़ौदा ने जारी विज्ञप्ति में दावा किया है कि नकदी की पर्याप्त उपलब्धता है। बैंक के सभी एटीएम विधिवत और सुचारु रूप से संचालित है और नकदी उपलब्ध है। बैंक की ओर से जनता को आवश्यकतानुसार नकदी दी जा रही है।