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समिति करेगी वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के प्रभावों का परीक्षण
Updated Fri, 15 Jun 2018 01:56 AM IST
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हल्द्वानी। परिवहन मुख्यालय ने स्पीड गवर्नर के विवाद और टैक्सी चालकों की हड़ताल के बाद आरटीओ देहरादून की अध्यक्षता में चार सदस्य समिति का गठन किया है। यह समिति एक महीने में स्पीड गवर्नर लगाने से वाहनों के संचालन में रही कठिनाई का परीक्षण कर रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने तक पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का काम स्थगित रखने का भी फैसला किया गया है। इस फैसले से कुमाऊं के करीब 70 हजार व्यावसायिक वाहन संचालकों को फौरी तौर पर राहत मिली है।
सड़क हादसों का एक बड़ा कारण वाहनों का तेज गति से चलाना भी है। इसके मद्देनजर 2015 से वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का फैसला किया गया था। इसमें नए वाहनों में स्पीड गवर्नर लगा कर आने की व्यवस्था की गई, इसके साथ ही एक जनवरी तक राज्य में पुराने सभी वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का निर्देश दिया गया। परिवहन मुख्यालय लंबे समय तक यह तय नहीं कर पाया कि स्पीड गवर्नर लगाने का काम किस कंपनी को दिया जाए। करीब डेढ़ महीना पहले स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कंपनियों को अधिकृत किया जा सका। वाहन चालकों का कहना है कि 2015 से पूर्व निर्मित वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने से खासकर पर्वतीय मार्गों पर संचालन में समस्या आ रही है। इसे लेकर चालकों ने हड़ताल की। पर्यटन सीजन में हड़ताल होने से यात्रियों, सैलानियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। अब परिवहन मुख्यालय की नींद टूटी और परिवहन आयुक्त के निर्देश पर अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह ने आरटीओ देहरादून सुधांशु गर्ग की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें रावत सिंह एआरटीओ कोटद्वार, चंद्रकांत भट्ट संभागीय निरीक्षक हरिद्वार, आशीष शुक्ला उप निदेशक आईडीटीआर झाझरा देहरादून शामिल हैं। समिति को परीक्षण कर एक महीने में रिपोर्ट और संस्तुति देने का निर्देश दिया गया है। समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की अनिवार्यता के आदेश को स्थगित कर दिया गया है।
परिवहन मुख्यालय ने स्पीड गवर्नर लगाने को लेकर समिति का गठन किया
समिति स्पीड गवर्नर लगाने से आ रही दिक्कतों का एक महीने में परीक्षण कर देगी रिपोर्ट
70 हजार पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाया जाना है कुमाऊं में
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सड़क हादसों का एक बड़ा कारण वाहनों का तेज गति से चलाना भी है। इसके मद्देनजर 2015 से वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का फैसला किया गया था। इसमें नए वाहनों में स्पीड गवर्नर लगा कर आने की व्यवस्था की गई, इसके साथ ही एक जनवरी तक राज्य में पुराने सभी वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का निर्देश दिया गया। परिवहन मुख्यालय लंबे समय तक यह तय नहीं कर पाया कि स्पीड गवर्नर लगाने का काम किस कंपनी को दिया जाए। करीब डेढ़ महीना पहले स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कंपनियों को अधिकृत किया जा सका। वाहन चालकों का कहना है कि 2015 से पूर्व निर्मित वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने से खासकर पर्वतीय मार्गों पर संचालन में समस्या आ रही है। इसे लेकर चालकों ने हड़ताल की। पर्यटन सीजन में हड़ताल होने से यात्रियों, सैलानियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। अब परिवहन मुख्यालय की नींद टूटी और परिवहन आयुक्त के निर्देश पर अपर परिवहन आयुक्त सुनीता सिंह ने आरटीओ देहरादून सुधांशु गर्ग की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें रावत सिंह एआरटीओ कोटद्वार, चंद्रकांत भट्ट संभागीय निरीक्षक हरिद्वार, आशीष शुक्ला उप निदेशक आईडीटीआर झाझरा देहरादून शामिल हैं। समिति को परीक्षण कर एक महीने में रिपोर्ट और संस्तुति देने का निर्देश दिया गया है। समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की अनिवार्यता के आदेश को स्थगित कर दिया गया है।
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परिवहन मुख्यालय ने स्पीड गवर्नर लगाने को लेकर समिति का गठन किया
समिति स्पीड गवर्नर लगाने से आ रही दिक्कतों का एक महीने में परीक्षण कर देगी रिपोर्ट
70 हजार पुराने वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाया जाना है कुमाऊं में