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नई तकनीकी मशीनों में रेडियोलॉजिस्ट का महत्वपूर्ण योगदान
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:45 AM IST
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भीमताल में डॉक्टरों का सेमिनार शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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भीमताल (नैनीताल)। नई तकनीकी मशीनों के बदौलत गर्भ में पल रहे शिशु की हृदय संबंधी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। यह कहना है औरंगाबाद महाराष्ट्र के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विमल साहनी का।
मेहरागांव में आयोजित 10वीं दो दिवसीय इंडियन रेडियोलॉजिस्ट एवं इमेजिंग एसोसिएशन की कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे डॉ. विमल साहनी ने बताया कि आज टेक्नोलॉजी इतनी विकसित हो गई है कि हम महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु की कुछ हृदय संबंधी बीमारियों का अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन के माध्यम से पता लगाकर इलाज करने में सफल हो रहे हैं। हृदय की हर समस्या के लिए गर्भपात कराना जरूरी नहीं है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस नई दिल्ली से पहुंचे कार्डियो वेस्कुलियर रेडियोलॉजिस्ट एवं एंड्रो वेसकुलर इंटरवेशन डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि छाती में बहुत सारी ऐसी बीमारियां हो जाती हैं, जिनका शुरुआत में पता नहीं चल पाता। एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एनजियोग्राफी आदि से मरीज की बीमारी को प्रमाणित किया जा सकता है। इसमें सॉफ्टवेयर और वॉचर प्लानिंग के तहत भी काम किया जा सकता है। दोनों डॉक्टरों ने बताया कि कार्यशाला आयोजित कर लोगों को बीमारियों से बचने के लिए जागरुक किया जा सकता है।
भीमताल में पहुंचे देश भर के डॉक्टर
भीमताल (नैनीताल)। मेहरागांव स्थित एक होटल में इंडियन रेडियोलॉजिस्ट एवं इमेजिंग एसोसिएशन उत्तराखंड ने शनिवार से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है। कार्यशाला का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्रधानाचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा ने किया। कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि एम्स ऋषिकेश के डॉ सुधीर सक्सेना रहे।
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पहले दिन की कार्यशाला में औरंगाबाद महाराष्ट्र के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विमल साहनी ने कहा कि गर्भ में पल रहे शिशु की बीमारियों का आधुनिक मशीनों से इलाज करना सिखाया। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद के लीवर विशेषज्ञ डॉ. राजुल रस्तोगी ने लीवर से संबधित रोगों की जानकारी दी। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली की डॉ. अंजली प्रकाश ने छाती, दिल्ली एम्स के रेडियोलॉजिस्ट डॉ संजीव कुमार ने फेफड़ों, धमनियां की समस्याओं को आधुनिक मशीनों से दूर करना बताया। इस दौरान आयोजक सचिव डॉ. एनसी निगम, डॉ. जेएस जोशी, डॉ. एसपी कोरियाल, डॉ. बीएम गोयल आदि मौजूद रहे।
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मेहरागांव में आयोजित 10वीं दो दिवसीय इंडियन रेडियोलॉजिस्ट एवं इमेजिंग एसोसिएशन की कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे डॉ. विमल साहनी ने बताया कि आज टेक्नोलॉजी इतनी विकसित हो गई है कि हम महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु की कुछ हृदय संबंधी बीमारियों का अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन के माध्यम से पता लगाकर इलाज करने में सफल हो रहे हैं। हृदय की हर समस्या के लिए गर्भपात कराना जरूरी नहीं है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस नई दिल्ली से पहुंचे कार्डियो वेस्कुलियर रेडियोलॉजिस्ट एवं एंड्रो वेसकुलर इंटरवेशन डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि छाती में बहुत सारी ऐसी बीमारियां हो जाती हैं, जिनका शुरुआत में पता नहीं चल पाता। एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई, एनजियोग्राफी आदि से मरीज की बीमारी को प्रमाणित किया जा सकता है। इसमें सॉफ्टवेयर और वॉचर प्लानिंग के तहत भी काम किया जा सकता है। दोनों डॉक्टरों ने बताया कि कार्यशाला आयोजित कर लोगों को बीमारियों से बचने के लिए जागरुक किया जा सकता है।
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भीमताल में पहुंचे देश भर के डॉक्टर
भीमताल (नैनीताल)। मेहरागांव स्थित एक होटल में इंडियन रेडियोलॉजिस्ट एवं इमेजिंग एसोसिएशन उत्तराखंड ने शनिवार से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है। कार्यशाला का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्रधानाचार्य डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा ने किया। कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि एम्स ऋषिकेश के डॉ सुधीर सक्सेना रहे।
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पहले दिन की कार्यशाला में औरंगाबाद महाराष्ट्र के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विमल साहनी ने कहा कि गर्भ में पल रहे शिशु की बीमारियों का आधुनिक मशीनों से इलाज करना सिखाया। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद के लीवर विशेषज्ञ डॉ. राजुल रस्तोगी ने लीवर से संबधित रोगों की जानकारी दी। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली की डॉ. अंजली प्रकाश ने छाती, दिल्ली एम्स के रेडियोलॉजिस्ट डॉ संजीव कुमार ने फेफड़ों, धमनियां की समस्याओं को आधुनिक मशीनों से दूर करना बताया। इस दौरान आयोजक सचिव डॉ. एनसी निगम, डॉ. जेएस जोशी, डॉ. एसपी कोरियाल, डॉ. बीएम गोयल आदि मौजूद रहे।