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पश्चिमी विक्षोभ पर शोध करने के लिए बीएस कोटलिया को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
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नैनीताल के वैज्ञानिक कोटलिया
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। राष्ट्रीय भू विज्ञान पुरस्कार के लिए चुने गए प्रो. बीएस कोटलिया जलवायु परिवर्तन के ज्ञाता हैं। वह आंकड़ों के जोड़तोड़ से दस हजार साल की जलवायु के विषय में बताने के लिए जाने जाते हैं। वह बता सकते हैं कि दस हजार साल पहले हिमालयन क्षेत्रों की जलवायु कैसी थी। किसी भी साल के विषय में कह सकते हैं कि उस साल हिमालय में कितनी और कहां बर्फबारी हुई थी। बारिश हुई थी या सूखा पड़ गया था।
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उन्होंने पश्चिमी विक्षोभ पर विशेष शोध कर यह बताया है कि इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। किसी भी वैज्ञानिक ने यह बात नहीं बताई थी। सभी पश्चिमी विक्षोभ को छोटा-मोटा ही बताते रहे हैं। प्रो. कोटलिया ने बताया कि पुरानी सरस्वती नदी (हड़प्पा सभ्यता) पानी न मिलने के कारण ही विलुप्त हुई थी। इसके विनाश का एक प्रमुख कारण पश्चिमी विक्षोभ भी था। इसके नष्ट होने का कोई अन्य भूवैज्ञानिक कारण नहीं था। उन्होंने खोजा है कि हड़प्पा की सभ्यता नष्ट होने के बाद हिमालय क्षेत्रों में मौसम बहुत अच्छा हो गया था। उनकी खोज के अनुसार साल 2013 की आपदा दोनों मानसूनों के चरम पर होने के कारण आई थी। उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित हमबोल्ट फेलोशिप मिल चुकी है। इसी तरह अर्थबाथ एजूकेशन अवार्ड, आचार्य नरेंद्र देव मेडल, इंसा पुलिस एकेडमी फेलोशिप, सीएएस फेलोशिप से भी नवाजा जा चुका है।
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झीलों, गुफाओं, पेड़ों पर करते हैं कार्य
प्रो. कोटलिया मुख्य रूप से झीलों, पेड़ों और गुफाओं पर शोध करते हैं। इन पर शोध करने के बाद ही वह बताते हैं कि अब से नौ हजार साल पहले या दस हजार साल पहले हिमालयन क्षेत्रों की जलवायु कैसी थी। उनकी भविष्यवाणी है कि फरवरी में एक बार फिर सरोवर नगरी में बर्फबारी होगी।
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प्रोफाइल
-नैनीताल जिले के ओखलकांडा गांव के मूल निवासी प्रो. कोटलिया ने 1979 में कुमाऊं विवि से एमएससी भू विज्ञान करने के बाद अहमदाबाद में फिजिकल रिसर्च लैब में सेवा शुरू की।
-1992 में कुमाऊं विवि में बतौर यूजीसी प्राध्यापक कॅरिअर शुरू किया।
-उनके अंतरराष्ट्रीय जनरलों में 150 से अधिक शोध प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने कई किताबों का भी संपादन किया है।