{"_id":"5b79cdd542c792466c1000c0","slug":"51534709205-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्मोड़ा-राष्ट्रीय राजमार्ग में पहाड़ी से गिर रहे है पत्थर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्मोड़ा-राष्ट्रीय राजमार्ग में पहाड़ी से गिर रहे है पत्थर
Updated Mon, 20 Aug 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
स्वाला के समीप एनएच में आए मलबे को हटाती जेसीबी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गरमपानी (नैनीताल)। बरसात में भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ियाें से पत्थर गिरने से यात्रियों और वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
पिछले तीन साल से पाड़ली की पहाड़ी से पांच और छह सौ मीटर ऊंचाई से पत्थर मलबा गिरने से कई बार यातायात बाधित हुआ। खैरना से काकड़ीघाट के बीच में दस किमी सड़क चौड़ीकरण के बाद भौर्याबैंड, लोहाली, जैरासी, नावली, काकड़ीघाट की पहाड़ियों से कई बार मलबा, पत्थर गिरने से लोगों को जान हथेली में रखकर सफर करना पड़ रहा है। खैरना से काकड़ीघाट के बीच कई पहाड़ियां खतरनाक बन चुकी हैं। इसके चलते कई बार खैरना से क्वारब के बीच रूट डायवर्ट करना पड़ता है। भौर्याबैंड, लोहाली, जैरासी, नावली, काकड़ीघाट की पहाड़ी से मलबा रोने के लिए कोई सुरक्षात्मक कार्य नहीं किया गया। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एनएच के एई एलएम तिवारी ने कहा कि फिलहाल पहाड़ियों से मलबा रोकने के लिए कोई भी प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजा है।
विज्ञापन
पिछले तीन साल से पाड़ली की पहाड़ी से पांच और छह सौ मीटर ऊंचाई से पत्थर मलबा गिरने से कई बार यातायात बाधित हुआ। खैरना से काकड़ीघाट के बीच में दस किमी सड़क चौड़ीकरण के बाद भौर्याबैंड, लोहाली, जैरासी, नावली, काकड़ीघाट की पहाड़ियों से कई बार मलबा, पत्थर गिरने से लोगों को जान हथेली में रखकर सफर करना पड़ रहा है। खैरना से काकड़ीघाट के बीच कई पहाड़ियां खतरनाक बन चुकी हैं। इसके चलते कई बार खैरना से क्वारब के बीच रूट डायवर्ट करना पड़ता है। भौर्याबैंड, लोहाली, जैरासी, नावली, काकड़ीघाट की पहाड़ी से मलबा रोने के लिए कोई सुरक्षात्मक कार्य नहीं किया गया। इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। एनएच के एई एलएम तिवारी ने कहा कि फिलहाल पहाड़ियों से मलबा रोकने के लिए कोई भी प्रस्ताव सरकार को नहीं भेजा है।
विज्ञापन