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रेलवे सुरक्षा कर्मी अब जीपीएस लेकर गश्त करेंगे
Updated Mon, 15 Jan 2018 02:13 AM IST
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हल्द्वानी। रेलवे ट्रैक की पटरियों के रखरखाव में तकनीकी को मददगार बनाया जा रहा है। इन पटरियों की निगरानी के लिए जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) गश्त की जाएगी। पटरियों के गश्ती दल को जीपीएस उपकरण दिया जाएगा।
ट्रेन के संचालन में पटरियां सबसे अहम हिस्सा होती हैं। इन पटरियों के रखरखाव के लिए एक गश्ती दल होता है। पटरियों के पेनरोल क्लिक, फ्रेक्चर, नट बोल्ट आदि की जांच करने की जिम्मेदारी इसी गश्ती दल के कंधों पर होती है ताकि ट्रेन हादसे एवं संचालन में परेशानी नहीं हो। इधर इस गश्ती दल को अब तकनीकी तौर पर मजबूत किया जा रहा है। अब यह गश्त जीपीएस आधारित होगी। रेलवे ने ट्रैक पर गश्त करने वाले कर्मियों को जीपीएस उपकरण देने का फैसला किया है। इसका सीधा मकसद पटरियों में होने वाली गड़बड़ी से रेल हादसों एवं ट्रेनों की लेटलतीफी को कम करना है। साथ ही गश्त करने वाले कर्मियों पर भी अधिकारी सीधी नजर रख सकेंगे। प्रयोग के तौर पर अभी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों को यह उपकरण प्रयोग के तौर पर दिया गया है। वर्तमान में हल्द्वानी, लालकुआं, काशीपुर रूट पर शेड्यूल पेट्रोलिंग हो रही है। जल्द ही पेट्रोलिंग करने वाले कर्मियों को भी यह उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।
अभी होती है कॉपी गश्त
रेलवे में अभी कॉपी गश्त की जाती है। जैसे हल्द्वानी स्टेशन से गश्त करने वाला कर्मी स्टेशन मास्टर के हस्ताक्षर की हुई कॉपी लेकर लालकुआं की तरफ चलेगा। वहीं लालकुआं से भी कर्मी स्टेशन मास्टर की हस्ताक्षर की हुई कॉपी लेकर हल्द्वानी की ओर चलेगा। दोनों निश्चित दूरी पर मिलेंगे जहां एक दूसरे की कॉपी बदलेंगे और लौटकर आएंगे। इस दौरान वे पटरियों के पेनरोल क्लिक, फ्रेक्चर, नट बोल्ट आदि की जांच करेगा। वर्तमान में एक कर्मी को चार किमी पैदल गश्त करनी होती है।
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खतरे में भी मददगार होगा उपकरण
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक पेट्रोलिंग में इस्तेमाल होने वालेे इस उपकरण में एक ऐसा फीचर दिया गया है कि यदि कर्मी कोई मुसीबत में है तो तत्काल संदेश भेज सकता है जिससे समीपवर्ती रेलवे अधिकारी एवं कर्मी उसकी मदद को पहुंचेंगे।
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ट्रेन के संचालन में पटरियां सबसे अहम हिस्सा होती हैं। इन पटरियों के रखरखाव के लिए एक गश्ती दल होता है। पटरियों के पेनरोल क्लिक, फ्रेक्चर, नट बोल्ट आदि की जांच करने की जिम्मेदारी इसी गश्ती दल के कंधों पर होती है ताकि ट्रेन हादसे एवं संचालन में परेशानी नहीं हो। इधर इस गश्ती दल को अब तकनीकी तौर पर मजबूत किया जा रहा है। अब यह गश्त जीपीएस आधारित होगी। रेलवे ने ट्रैक पर गश्त करने वाले कर्मियों को जीपीएस उपकरण देने का फैसला किया है। इसका सीधा मकसद पटरियों में होने वाली गड़बड़ी से रेल हादसों एवं ट्रेनों की लेटलतीफी को कम करना है। साथ ही गश्त करने वाले कर्मियों पर भी अधिकारी सीधी नजर रख सकेंगे। प्रयोग के तौर पर अभी वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों को यह उपकरण प्रयोग के तौर पर दिया गया है। वर्तमान में हल्द्वानी, लालकुआं, काशीपुर रूट पर शेड्यूल पेट्रोलिंग हो रही है। जल्द ही पेट्रोलिंग करने वाले कर्मियों को भी यह उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।
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अभी होती है कॉपी गश्त
रेलवे में अभी कॉपी गश्त की जाती है। जैसे हल्द्वानी स्टेशन से गश्त करने वाला कर्मी स्टेशन मास्टर के हस्ताक्षर की हुई कॉपी लेकर लालकुआं की तरफ चलेगा। वहीं लालकुआं से भी कर्मी स्टेशन मास्टर की हस्ताक्षर की हुई कॉपी लेकर हल्द्वानी की ओर चलेगा। दोनों निश्चित दूरी पर मिलेंगे जहां एक दूसरे की कॉपी बदलेंगे और लौटकर आएंगे। इस दौरान वे पटरियों के पेनरोल क्लिक, फ्रेक्चर, नट बोल्ट आदि की जांच करेगा। वर्तमान में एक कर्मी को चार किमी पैदल गश्त करनी होती है।
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खतरे में भी मददगार होगा उपकरण
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक पेट्रोलिंग में इस्तेमाल होने वालेे इस उपकरण में एक ऐसा फीचर दिया गया है कि यदि कर्मी कोई मुसीबत में है तो तत्काल संदेश भेज सकता है जिससे समीपवर्ती रेलवे अधिकारी एवं कर्मी उसकी मदद को पहुंचेंगे।