फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   नए कुलपति को पूर्व कुलपति के अध्यादेश को पलटने की कोशिश पड़ी भारी

नए कुलपति को पूर्व कुलपति के अध्यादेश को पलटने की कोशिश पड़ी भारी

Sat, 10 Jun 2017 12:07 AM IST
Updated Sat, 10 Jun 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
नए कुलपति को पूर्व कुलपति के अध्यादेश को पलटने की कोशिश पड़ी भारी
सेमेस्टर प्रणाली में अचानक बदलाव पड़ा भारी
विज्ञापन


हल्द्वानी।
आईआईटी के अपने अनुभव के आधार सेमेस्टर प्रणाली में बदलाव ही कुमाऊं विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति प्रोफेसर डीके नौड़ियाल पर भारी पड़ा। नौड़ियाल की कोशिश सुधार की रही होगी, लेकिन जल्दबाजी कहें या सही समय का चुनाव न करना ही वजह रहा कि विश्वविद्यालय को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

हालांकि कुछ लोग इस सारे मामले को विश्वविद्यालय की अंदरूनी खींचतान से भी जोड़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय के पूर्व के अध्यादेश को बदलने से अचानक ढेरों छात्रों के फेल हो जाने से छात्र आंदोलित हो गए थे। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली सत्र 2016-17 से लागू की थी।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कमेटी की संस्तुति पर स्नातक सेमेस्टर प्रणाली के लिए जो अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) लागू किया था, उसमें प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट करने की व्यवस्था थी। यानी कि बीए, बीएससी या फिर बीकॉम प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी अगर सभी प्रश्नपत्रों में भी फेल होंगे तब भी उन्हें द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में विद्यार्थियों को उदाहरण स्वरूप बीएससी के छात्र को प्रथम सेमेस्टर, द्वितीय सेमेस्टर के कुल 18 पेपरों में से कम से कम नौ पेपर में परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। अन्यथा वे छात्र जो कम पेपर में उत्तीर्ण होगा, उसे सेमेस्टर बैक में पुन: प्रथम सेमेस्टर में लौटना पड़ेगा।

अध्यादेश के यही नियम कायदे पिछले वर्ष जुलाई में प्रवेश के बाद कुमाऊं विवि ने अपने परीक्षा फार्म के प्रकाशित किए गए थे। कुलपति प्रो. धामी का पहली नवंबर को कार्यकाल समाप्त हो गया। इसके बाद करीब चार माह तक उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कुमाऊं विवि के कुलपति का कार्यभार अतिरिक्त रूप से संभाला लेकिन उन्होंने पूर्व कुलपति प्रो. धामी के फैसलों में कोई बदलाव नहीं किया।

दो माह पूर्व आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डीके नौड़ियाल को कुमाऊं विवि का कुलपति बनाया गया। इस बीच स्नातक प्रथम सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम प्रश्नपत्रों में अंक देने का फार्मूला फंसा। कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने कुछ सलाहकारों की राय पर पूर्व कुलपति प्रो. धामी के अध्यादेश में ही बदलाव कर नया अध्यादेश लागू कर दिया।


परीक्षा के बाद लागू किए गए नए अध्यादेश से बीएससी के हजारों छात्र फेल हो गए। बताते हैं कि स्नातक सेमेस्टर प्रणाली के अध्यादेश को तत्कालीन कुलपति प्रो. धामी ने विद्या परिषद से मंजूर नहीं कराया था और मौजूदा कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने भी बिना स्वीकृति के अपने अध्यादेश को लागू करवा दिया। छात्रों का आंदोलन भड़का तो कुलपति को पुराने छात्रों के मामले में रोल बैक करना पड़ा और विद्या परिषद के जरिए भी नए अध्यादेश पर मुहर लगवानी पड़ी।

- कुमाऊं विश्वविद्यालय में आईआईटी की व्यवस्था लागू करना सुधार की कोशिश, पर समय गलत
- बैक फुट पर आना पड़ा विश्वविद्यालय को
- विद्या परिषद में फिर भी कुछ हद तक अपनी बात मनवा ले गए कुलपति
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed