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प्रमुख सचिव वित ने निदेशक आडिट से सूचना तलब की
Updated Fri, 18 May 2018 02:13 AM IST
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हल्द्वानी। आडिट विभाग में वर्षों से लंबित पदोन्नति के मामलों को लेकर लेखा परीक्षा कर्मियों में गुस्सा है। उत्तराखंड लेखा परीक्षा संयुक्त कर्मचारी संगठन ने प्रमुख सचिव वित्त राधा रतूड़ी से भेंट कर इस मांग को प्रमुखता से रखा।
उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के मुख्य संयोजक रमेश चंद्र पांडे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने प्रमुख सचिव वित्त से भेंट कर बताया कि शासन स्तर पर नियम विरुद्ध जून 2015 से पदोन्नति पर रोक लगाई गई है। कई कर्मचारी पदोन्नति की बाट जोहते सेवानिवृत्त हो गए। जुलाई 2017 में शासन ने निदेशक आडिट से इस संबंध में आख्या मांगी तो निदेशक द्वारा शासन को बताया गया कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने और नए ढांचे के अनुरूप अंतिम ज्येष्ठता सूची जारी न होने के कारण राज्य में कार्यरत 11 ज्येष्ठ लेखा परीक्षकों की सेवा नियमावली के अनुसार पदोन्नति नहीं हुई है। पांडे ने बताया कि शासन और विभाग ने 9 मार्च 2017 को उच्च न्यायालय में दिए शपथ पत्र में कहा था कि सेवा नियमावली जारी होते ही स्वीकृत ढांचे के पदों पर पदोन्नति कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2017 में सेवा नियमावली जारी होने के बाद शपथ पत्र के अनुसार पदोन्नति आदेश जारी कर न्यायालय को सूचित किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। शिष्टमंडल में महीप कुमार सिंह, गणेश दत्त शर्मा, भूपेंद्र सिंह बिष्ट आदि शामिल थे।
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उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच के मुख्य संयोजक रमेश चंद्र पांडे के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने प्रमुख सचिव वित्त से भेंट कर बताया कि शासन स्तर पर नियम विरुद्ध जून 2015 से पदोन्नति पर रोक लगाई गई है। कई कर्मचारी पदोन्नति की बाट जोहते सेवानिवृत्त हो गए। जुलाई 2017 में शासन ने निदेशक आडिट से इस संबंध में आख्या मांगी तो निदेशक द्वारा शासन को बताया गया कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन होने और नए ढांचे के अनुरूप अंतिम ज्येष्ठता सूची जारी न होने के कारण राज्य में कार्यरत 11 ज्येष्ठ लेखा परीक्षकों की सेवा नियमावली के अनुसार पदोन्नति नहीं हुई है। पांडे ने बताया कि शासन और विभाग ने 9 मार्च 2017 को उच्च न्यायालय में दिए शपथ पत्र में कहा था कि सेवा नियमावली जारी होते ही स्वीकृत ढांचे के पदों पर पदोन्नति कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2017 में सेवा नियमावली जारी होने के बाद शपथ पत्र के अनुसार पदोन्नति आदेश जारी कर न्यायालय को सूचित किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। शिष्टमंडल में महीप कुमार सिंह, गणेश दत्त शर्मा, भूपेंद्र सिंह बिष्ट आदि शामिल थे।
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