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हल्द्वानी के दो शूरवीरों ने पाकिस्तानों को धूल चटाया
Updated Sat, 16 Dec 2017 02:41 AM IST
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हल्द्वानी। हल्द्वानी के शूरवीरों ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तानियों को धूल चटा दी थी और उन्हें भागने के लिए मजबूर कर दिया था। 16 दिसंबर को नगर निगम में आयोजित कार्यक्रम में इनको सम्मानित किया जाएगा।
सेवानिवृत्त कर्नल मनोहर सिंह चौहान
पिथौरागढ़ जिले के दंतोली के मूल निवासी सेवानिवृत्त कर्नल मनोहर सिंह चौहान सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार के साथ डहरिया में रहते हैं। उन्होंने बताया कि तीन दिसंबर 1971 को वह जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में गोरखा रेजीमेंट के 27 जवानों के साथ मोर्चा संभाले हुए थे। रात के समय अचानक दुश्मनों ने घास में आग लगा दी। उस समय वह चार माह की नौकरी में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। हमारे जवानों ने पाक सेना के नजदीक आने पर जवाबी फायरिंग की। दुश्मन नुकसान उठाने के बाद पीछे लौट गए। पाकिस्तान की सेना ने तीन बार हमला किया। गोरखा रेजीमेंट के दो जवान मारे गए। वह खुद भी घायल हो गए थे। दुश्मनों ने पानी, रसद की लाइन काट दी थी लेकिन भारतीय सेना ने उनको भागने पर मजबूर कर दिया। युद्ध के बाद उनको वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 2004 में कर्नल के पद से मनोहर सिंह सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्त सूबेदार शेर सिंह
पॉलीशीट में रहने वाले सूबेदार शेर सिंह युद्ध को याद करते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश की राजनीति और खटास के बारे में बताते हैं। उन्होंने बताया कि तीन दिसंबर की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा युद्ध का ऐलान होने पर उन्होंने भारत बांग्लादेश की सीमा निर्भयपुर में मोर्चा संभाला। उस समय शेर सिंह नायक के पद पर तैनात थे। नायक की टुकड़ी ने पाकिस्तान के दो मोर्चों को ध्वस्त किया और आठ पाक सैनिकों को ढेर किया। यहां चार पाकिस्तानियों को बंदी बनाया गया। इसके पहले उन्होंने मुक्तिवाहिनी के साथ बांग्लादेश की तरफ से भी पाकिस्तानियों को धूल चटाई थी। युद्ध के बाद उनको 1972 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया। सूबेदार के पद से वे सेवानिवृत्त हुए।
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आनंद सिंह ठठोला
हल्द्वानी। वरिष्ठ नागरिक जनकल्याण समिति के अध्यक्ष एवं नौ सेना के पेटी आफिसर आनंद सिंह ठठोला ने बताया कि युद्ध के दौरान भारतीय नौ सैनिक हिंद महासागर को छोड़कर जल मार्ग से अरब सागर में प्रवेश कर रहे थे। इस बीच तीन दिसंबर 1971 को एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने गुजरात के जामनगर से उड़ान भरी। रात 11 बजे विमानों ने कराची के ऊपर बम बरसाए और सुरक्षित वापस लौट आए। इधर हिंद महासागर से अरब सागर की तरफ जा रही सेना ने रात 12 बजे जल मार्ग से कराची को निशाना बनाकर मिसाइल बोटों से बंदरगाह और तोपखाने को भारी क्षति पहुंचाई।
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सेवानिवृत्त कर्नल मनोहर सिंह चौहान
पिथौरागढ़ जिले के दंतोली के मूल निवासी सेवानिवृत्त कर्नल मनोहर सिंह चौहान सेवानिवृत्त होने के बाद परिवार के साथ डहरिया में रहते हैं। उन्होंने बताया कि तीन दिसंबर 1971 को वह जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में गोरखा रेजीमेंट के 27 जवानों के साथ मोर्चा संभाले हुए थे। रात के समय अचानक दुश्मनों ने घास में आग लगा दी। उस समय वह चार माह की नौकरी में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। हमारे जवानों ने पाक सेना के नजदीक आने पर जवाबी फायरिंग की। दुश्मन नुकसान उठाने के बाद पीछे लौट गए। पाकिस्तान की सेना ने तीन बार हमला किया। गोरखा रेजीमेंट के दो जवान मारे गए। वह खुद भी घायल हो गए थे। दुश्मनों ने पानी, रसद की लाइन काट दी थी लेकिन भारतीय सेना ने उनको भागने पर मजबूर कर दिया। युद्ध के बाद उनको वीर चक्र से सम्मानित किया गया। 2004 में कर्नल के पद से मनोहर सिंह सेवानिवृत्त हुए।
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सेवानिवृत्त सूबेदार शेर सिंह
पॉलीशीट में रहने वाले सूबेदार शेर सिंह युद्ध को याद करते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश की राजनीति और खटास के बारे में बताते हैं। उन्होंने बताया कि तीन दिसंबर की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा युद्ध का ऐलान होने पर उन्होंने भारत बांग्लादेश की सीमा निर्भयपुर में मोर्चा संभाला। उस समय शेर सिंह नायक के पद पर तैनात थे। नायक की टुकड़ी ने पाकिस्तान के दो मोर्चों को ध्वस्त किया और आठ पाक सैनिकों को ढेर किया। यहां चार पाकिस्तानियों को बंदी बनाया गया। इसके पहले उन्होंने मुक्तिवाहिनी के साथ बांग्लादेश की तरफ से भी पाकिस्तानियों को धूल चटाई थी। युद्ध के बाद उनको 1972 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया। सूबेदार के पद से वे सेवानिवृत्त हुए।
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आनंद सिंह ठठोला
हल्द्वानी। वरिष्ठ नागरिक जनकल्याण समिति के अध्यक्ष एवं नौ सेना के पेटी आफिसर आनंद सिंह ठठोला ने बताया कि युद्ध के दौरान भारतीय नौ सैनिक हिंद महासागर को छोड़कर जल मार्ग से अरब सागर में प्रवेश कर रहे थे। इस बीच तीन दिसंबर 1971 को एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने गुजरात के जामनगर से उड़ान भरी। रात 11 बजे विमानों ने कराची के ऊपर बम बरसाए और सुरक्षित वापस लौट आए। इधर हिंद महासागर से अरब सागर की तरफ जा रही सेना ने रात 12 बजे जल मार्ग से कराची को निशाना बनाकर मिसाइल बोटों से बंदरगाह और तोपखाने को भारी क्षति पहुंचाई।