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एसटीएच में आई बैंक की स्थापना के प्रयास तेज
Updated Sat, 24 Nov 2018 01:32 AM IST
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आई बैंक
- फोटो : Demo Pic
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में आई बैंक की स्थापना के प्रयास तेज हो गए हैं। शुक्रवार को तीन सदस्यीय नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने अस्पताल परिसर का भ्रमण कर आई बैंक के लिए आधारभूत सुविधाओं की जांच की। पहले चरण की जांच में अस्पताल को आई बैंक के लिए उपयुक्त माना गया।
सुशीला तिवारी अस्पताल में पिछले कई वर्षों से आई बैंक की स्थापना के प्रयास चल रहे हैं। शुक्रवार को गाजियाबाद से आई बैंक एसोसिएशन के पदाधिकारी डा. बीके तिवारी, बेस अस्पताल की डा. रश्मि तिवारी और देहरादून से पहुंचे स्टेशन प्रोग्राम आफीसर (एसपीओ) डा. बीसी काला ने सुशीला तिवारी अस्पताल में मौजूद ऑपरेशन थियेटर समेत पूरे परिसर का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान तीनों चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि अस्पताल में आई बैंक की स्थापना के लिए आधारभूत सुविधाएं और जरूरी मशीनें उपलब्ध हैं लिहाजा अस्पताल में आई बैंक की स्थापना की जा सकती है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को इस संबंध में कागजी कार्रवाई शीघ्र पूरी करने को कहा। इस दौरान एसटीएच के चिकित्सक डा. नितिन मल्होत्रा और डा. विमलेश शर्मा ने टीम को जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराई। डा. मलहोत्रा और डा. शर्मा ने बताया कि निकट भविष्य में उक्त टीम एक बार और सर्वे करेगी तत्पश्चात उम्मीद है कि जल्द ही अस्पताल में आई बैंक की स्थापना हो जाएगी।
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25 लाख का मिला था अनुदान
हल्द्वानी। एसटीएच में आई बैंक की स्थापना के लिए वर्ष 2007 से प्रयास चल रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के बाद सरकार ने आई बैंक की स्थापना के लिए एसटीएच को 25 लाख रुपये का अनुदान भी दे चुकी है। अनुदान की इस धनराशि से अस्पताल में आई बैंक के लिए आधारभूत सुविधाएं जुटाने के साथ-साथ अलग-अलग क्षमता के माइक्रोस्कोप समेत कई अन्य मशीनें भी खरीदी जा चुकी हैं।
एसटीएच में संभव हो जाएगा नेत्र प्रत्यारोपण
हल्द्वानी। निकट भविष्य में यदि सुशीला तिवारी अस्पताल में आई बैंक की स्थापना होती है तो इसमें स्थानीय स्तर पर नेत्र प्रत्यारोपण भी हो सकेगा। एसटीएच के चिकित्सक डा. नितिन मल्होत्रा और डा. विमलेश शर्मा के मुताबिक पूर्व में महीने में तीन से चार ऐसे मामले आते हैं जब उन्हें नेत्रदान कर चुके व्यक्ति की आंखों की पुतली निकालनी होती है। उन्होंने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुतली निकालने के बाद उसे प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भेजा जाता है जहां उक्त पुतली को जरूरतमंद व्यक्ति को प्रत्यारोपित किया जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि नेत्र बैंक बनने के बाद स्थानीय स्तर पर नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।
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सुशीला तिवारी अस्पताल में पिछले कई वर्षों से आई बैंक की स्थापना के प्रयास चल रहे हैं। शुक्रवार को गाजियाबाद से आई बैंक एसोसिएशन के पदाधिकारी डा. बीके तिवारी, बेस अस्पताल की डा. रश्मि तिवारी और देहरादून से पहुंचे स्टेशन प्रोग्राम आफीसर (एसपीओ) डा. बीसी काला ने सुशीला तिवारी अस्पताल में मौजूद ऑपरेशन थियेटर समेत पूरे परिसर का निरीक्षण किया।
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निरीक्षण के दौरान तीनों चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि अस्पताल में आई बैंक की स्थापना के लिए आधारभूत सुविधाएं और जरूरी मशीनें उपलब्ध हैं लिहाजा अस्पताल में आई बैंक की स्थापना की जा सकती है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को इस संबंध में कागजी कार्रवाई शीघ्र पूरी करने को कहा। इस दौरान एसटीएच के चिकित्सक डा. नितिन मल्होत्रा और डा. विमलेश शर्मा ने टीम को जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराई। डा. मलहोत्रा और डा. शर्मा ने बताया कि निकट भविष्य में उक्त टीम एक बार और सर्वे करेगी तत्पश्चात उम्मीद है कि जल्द ही अस्पताल में आई बैंक की स्थापना हो जाएगी।
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25 लाख का मिला था अनुदान
हल्द्वानी। एसटीएच में आई बैंक की स्थापना के लिए वर्ष 2007 से प्रयास चल रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के बाद सरकार ने आई बैंक की स्थापना के लिए एसटीएच को 25 लाख रुपये का अनुदान भी दे चुकी है। अनुदान की इस धनराशि से अस्पताल में आई बैंक के लिए आधारभूत सुविधाएं जुटाने के साथ-साथ अलग-अलग क्षमता के माइक्रोस्कोप समेत कई अन्य मशीनें भी खरीदी जा चुकी हैं।
एसटीएच में संभव हो जाएगा नेत्र प्रत्यारोपण
हल्द्वानी। निकट भविष्य में यदि सुशीला तिवारी अस्पताल में आई बैंक की स्थापना होती है तो इसमें स्थानीय स्तर पर नेत्र प्रत्यारोपण भी हो सकेगा। एसटीएच के चिकित्सक डा. नितिन मल्होत्रा और डा. विमलेश शर्मा के मुताबिक पूर्व में महीने में तीन से चार ऐसे मामले आते हैं जब उन्हें नेत्रदान कर चुके व्यक्ति की आंखों की पुतली निकालनी होती है। उन्होंने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुतली निकालने के बाद उसे प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भेजा जाता है जहां उक्त पुतली को जरूरतमंद व्यक्ति को प्रत्यारोपित किया जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि नेत्र बैंक बनने के बाद स्थानीय स्तर पर नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।