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तेंदुओं ने की ग्रामीणों की नींद हराम, सूअर खोद दे रहे हैं काश्तकारों के खेत
Updated Tue, 14 Nov 2017 12:04 AM IST
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। क्षेत्र में वन्य जीवों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। तेंदुए ने दिन दहाड़े जहां ग्रामीणों की हराम कर रखी है, वहीं सूअरों ने खेत खोदकर ग्रामीणों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर उन्हें परेशान किया हुआ है। गवाड़ गांव में दो-दो तेंदुए सक्रिय हैं, जो अब तक कई मवेशियों को अपना निवाला बना चुके हैं। ग्रामीणों ने प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा देने की मांग की है।
ग्राम पंचायत गवाड़ में लंबे समय से दो तेंदुए दिन-दहाड़े घूम रहे हैं। तेंदुओं की गर्जना से ग्रामीणों का डर के मारे हाल बेहाल है। एक पखवाड़े के भीतर तेंदुए ने मुन्नी पांडये की बछिया, गिरीश आर्या की बकरी, कमला देवी की गाय, पनी राम के बैल को निवाला बना चुका है। वहीं रमोती देवी की बछिया उसके चंगुल से बचकर भागने में सफल रही। हालांकि तेंदुए के हमले से वह घायल हो गई। शाम होते ही तेंदुए क्षेत्र में गरजने लगते हैं। प्रधान संगठन के कोषाध्यक्ष हिम्मत सिंह ने प्रभागीय वनाधिकारी को ज्ञापन भेजकर तेंदुओं के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है करते हुए पिंजड़ा लगाने की मांग की है।
दैरी गांव में तेंदुए ने सुभाष चंद्र की चार बकरियों को निवाला बना लिया। तीन बकरियों का अभी तक पता नहीं है। दूसरी तरफ क्षेत्र में सूअरों ने भी खासा आतंक मचाया हुआ है। सुअरों ने खेत खोदकर ग्रामीणों की सब्जी बरबाद कर दी है, जिसके चलते काश्तकार हताश और निराश हैं। उनका कहना है कि सरकार खेती-किसानी बचाने के बड़े दावे करती है, लेकिन जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने को ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं।
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ग्राम पंचायत गवाड़ में लंबे समय से दो तेंदुए दिन-दहाड़े घूम रहे हैं। तेंदुओं की गर्जना से ग्रामीणों का डर के मारे हाल बेहाल है। एक पखवाड़े के भीतर तेंदुए ने मुन्नी पांडये की बछिया, गिरीश आर्या की बकरी, कमला देवी की गाय, पनी राम के बैल को निवाला बना चुका है। वहीं रमोती देवी की बछिया उसके चंगुल से बचकर भागने में सफल रही। हालांकि तेंदुए के हमले से वह घायल हो गई। शाम होते ही तेंदुए क्षेत्र में गरजने लगते हैं। प्रधान संगठन के कोषाध्यक्ष हिम्मत सिंह ने प्रभागीय वनाधिकारी को ज्ञापन भेजकर तेंदुओं के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है करते हुए पिंजड़ा लगाने की मांग की है।
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दैरी गांव में तेंदुए ने सुभाष चंद्र की चार बकरियों को निवाला बना लिया। तीन बकरियों का अभी तक पता नहीं है। दूसरी तरफ क्षेत्र में सूअरों ने भी खासा आतंक मचाया हुआ है। सुअरों ने खेत खोदकर ग्रामीणों की सब्जी बरबाद कर दी है, जिसके चलते काश्तकार हताश और निराश हैं। उनका कहना है कि सरकार खेती-किसानी बचाने के बड़े दावे करती है, लेकिन जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने को ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं।
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