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हल्द्वानी जू सफारी में बनेगा गैंडा संरक्षण ओर प्रजनन केंद्र
Updated Mon, 02 Apr 2018 02:15 AM IST
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गैंडा
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हल्द्वानी। गौलापार अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर में केंद्र सरकार ने गैंडा प्रजनन एवं संरक्षण केंद्र बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। असोम के काजीरंगा के बाद यह उत्तराखंड में देश का दूसरा और उत्तर भारत का पहला केंद्र होगा। 20 हेक्टेयर वन भूमि और सात करोड़ की लागत से बनने वाले इस केंद्र में गैंडे के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाएगा।
गौला पार में 100 हेक्टेयर वन भूमि में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर में विलुप्त वन्य जीवों के प्रजनन और संरक्षण की व्यवस्था है। अब गैंडा प्रजनन एवं संरक्षण प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी दे दी है। यहां गैंडों के उपचार के लिए भी सभी चिकित्सकीय सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। केंद्र ने अनुदान की 60 प्रतिशत धनराशि (करीब 4.20 करोड़ रुपये) भी जारी कर दी है।
वन विभाग के प्रस्ताव को केंद्र ने दी मंजूरी, 4.20 करोड़ रुपये जारी
देश का दूसरा और उत्तर भारत का पहला होगा केंद्र
गैंडों के उपचार को चिकित्सकीय सेवाएं भी मुहैया होंगी
तराई के जंगल गैंडे के लिए हैं मुफीद
गैंडे के लिए घास, पानी, कीचड़, दलदली जमीन वाले जंगल मुफीद माने जाते हैं। तराई पूर्वी और तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल में गैंडों को यह सुविधा मिल सकती है। गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में पैदा होने वाले गैंडोें को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति के बाद तराई के जंगल में छोड़ा जा सकता है।
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ये होंगे फायदे
- नैनीताल, रामनगर, हल्द्वानी त्रिकोणीय पर्यटक सर्किट विकसित होगी
- हल्द्वानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी
- वन विभाग और स्थानीय युवाओं को फायदा
जू में गैंडा संरक्षण और प्रजनन केंद्र के लिए भारत सरकार की मंजूरी मिल गई है। यह उत्तर भारत का पहला केंद्र होगा। यहां जख्मी गैंडों के उपचार की भी व्यवस्था की जाएगी।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, निदेशक अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर
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गौला पार में 100 हेक्टेयर वन भूमि में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर में विलुप्त वन्य जीवों के प्रजनन और संरक्षण की व्यवस्था है। अब गैंडा प्रजनन एवं संरक्षण प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी दे दी है। यहां गैंडों के उपचार के लिए भी सभी चिकित्सकीय सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी। केंद्र ने अनुदान की 60 प्रतिशत धनराशि (करीब 4.20 करोड़ रुपये) भी जारी कर दी है।
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वन विभाग के प्रस्ताव को केंद्र ने दी मंजूरी, 4.20 करोड़ रुपये जारी
देश का दूसरा और उत्तर भारत का पहला होगा केंद्र
गैंडों के उपचार को चिकित्सकीय सेवाएं भी मुहैया होंगी
तराई के जंगल गैंडे के लिए हैं मुफीद
गैंडे के लिए घास, पानी, कीचड़, दलदली जमीन वाले जंगल मुफीद माने जाते हैं। तराई पूर्वी और तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल में गैंडों को यह सुविधा मिल सकती है। गैंडा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में पैदा होने वाले गैंडोें को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति के बाद तराई के जंगल में छोड़ा जा सकता है।
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ये होंगे फायदे
- नैनीताल, रामनगर, हल्द्वानी त्रिकोणीय पर्यटक सर्किट विकसित होगी
- हल्द्वानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी
- वन विभाग और स्थानीय युवाओं को फायदा
जू में गैंडा संरक्षण और प्रजनन केंद्र के लिए भारत सरकार की मंजूरी मिल गई है। यह उत्तर भारत का पहला केंद्र होगा। यहां जख्मी गैंडों के उपचार की भी व्यवस्था की जाएगी।
-डॉ. पराग मधुकर धकाते, निदेशक अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर