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सता की छटपटाहट को कार्यकर्ताओं से आस
Updated Mon, 23 Apr 2018 02:15 AM IST
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कांग्रेस
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हल्द्वानी। कांग्रेस के नेता अब सत्ता में वापसी का मूलमंत्र कार्यकर्ताओं को बता रहे हैं और संघर्ष करने से लेकर बाहर निकलने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। कार्यकर्ताओं में भी पद और सम्मान को लेकर उबाल है तो बड़े नेताओं में मतभेद और मन भेद साफ दिख रहा है। यह बैठक भी यह सवाल छोड़ गई कि क्या अनुग्रह के ग्रह कांग्रेस को एकसूत्र में पिरो सकेंगे?
29 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली जन आक्रोश रैली के लिए भीड़ जुटाने की बारी आई तो प्रदेश प्रभारी अनुग्रह सिंह सहित अन्य नेताओं को कार्यकर्ता याद आए। सभी ने कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात की और उनका दर्द जानने की पैरवी भी की। गुटबाजी और नेताओं की परिक्रमा से दूर रहने की नसीहत दी गई। पूरी बैठक के दौरान महिला नेत्री पद और सम्मान न मिलने की बात आपस में करती रहीं। पूर्व सीएम ने भी कहा कि सफलता के लिए संघर्ष करना पड़ता है और संघर्ष के लिए चलना पड़ता है।
बैठक के दौरान बडे़ नेताओं के मतभेद और मनभेद साफ नजर आए। ऐसे में कांग्रेस खेमेबंदी से उबरकर एकजुट नजर आएगी यह असंभव सा लगता है। कांग्रेस के बड़े नेता भी जानते हैं कि सत्ता तक पहुंचने का मूलमंत्र पार्टी का कार्यकर्ता है। साफ है कि इसी वजह से बैठक में नेताओं को कार्यकर्ताओं की याद आई। ऐसे में देखना होगा कि इस बैठक के बाद कांग्रेस के आला नेता कार्यकर्ताओं का दर्द सुनते हैं या फिर बैठक के साथ ही बातें भी खत्म हो जाएंगी। नए प्रदेश प्रभारी को भी कांग्रेस में चल रही धड़ेबाजी का एहसास हो गया है। उनके सामने भी कांग्रेस परिवार को एक सूत्र में बांधने की चुनौती है।
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नेताओं को सत्ता में वापसी को एक बार फिर कार्यकर्ताओं से आस
पद और सम्मान को लेकर कार्यकर्ताओं में है उबाल, बड़ों के मन भेद और मतभेद भी हुए सार्वजनिक
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29 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली जन आक्रोश रैली के लिए भीड़ जुटाने की बारी आई तो प्रदेश प्रभारी अनुग्रह सिंह सहित अन्य नेताओं को कार्यकर्ता याद आए। सभी ने कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात की और उनका दर्द जानने की पैरवी भी की। गुटबाजी और नेताओं की परिक्रमा से दूर रहने की नसीहत दी गई। पूरी बैठक के दौरान महिला नेत्री पद और सम्मान न मिलने की बात आपस में करती रहीं। पूर्व सीएम ने भी कहा कि सफलता के लिए संघर्ष करना पड़ता है और संघर्ष के लिए चलना पड़ता है।
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बैठक के दौरान बडे़ नेताओं के मतभेद और मनभेद साफ नजर आए। ऐसे में कांग्रेस खेमेबंदी से उबरकर एकजुट नजर आएगी यह असंभव सा लगता है। कांग्रेस के बड़े नेता भी जानते हैं कि सत्ता तक पहुंचने का मूलमंत्र पार्टी का कार्यकर्ता है। साफ है कि इसी वजह से बैठक में नेताओं को कार्यकर्ताओं की याद आई। ऐसे में देखना होगा कि इस बैठक के बाद कांग्रेस के आला नेता कार्यकर्ताओं का दर्द सुनते हैं या फिर बैठक के साथ ही बातें भी खत्म हो जाएंगी। नए प्रदेश प्रभारी को भी कांग्रेस में चल रही धड़ेबाजी का एहसास हो गया है। उनके सामने भी कांग्रेस परिवार को एक सूत्र में बांधने की चुनौती है।
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