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स्याल्दे के सदे मेहरगांव में गहराया पेयजल संकट
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:48 PM IST
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तपन बढ़ने के साथ ही क्षेत्र के कई इलाकों में पेयजल किल्लत भी गहराने लगी है। आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण ग्रामीणों के सम्मुख बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। पारंपरिक स्रोतों का जल स्तर गिर चुका है। उधर, स्याल्दे तहसील के सुदूरवर्ती सदे, मेहरगांव सहित आधा दर्जन गांवों में लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है। बताया गया है कि चकरगांव-घुघुती मोटर मार्ग निर्माण में पेयजल पंपिंग योजना के पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसे आज तक ठीक नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने शीघ्र व्यवस्था बहाल नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
सदे मेहरगांव पेयजल पंपिंग योजना से सदे, मेहरगांव, रिखून, बराखाल, बेल्जाण, लामाढुंगा, रिखून सहित कई गांवों में पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन यहां पिछले कई दिनों से पानी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि 10 से 15 दिन में एक बार पानी आ रहा है वह भी पर्याप्त नहीं है। वयोवृद्ध राज्य आंदोलनकारी पान सिंह रावत का कहना है कि कई बार विभागों के चक्कर लगा दिए गए हैं, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
पीएमजीएसवाई द्वारा चकरगांव-घुघुती मोटर मार्ग बनाया जा रहा है, जिसके चलते योजना के पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गए थे, तमाम प्रयासों के बावजूद आज तक इन्हें ठीक नहीं किया गया है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हो रही है। पारंपरिक नौले, धारे सूख चुके हैं, ग्रामीण गाड़, गधेरों के पानी पर निर्भर हो गए हैं। जानवरों के लिए भी पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। प्रधान कमला देवी, सरोप सिंह, कुंदन सिंह, गोपाल सिंह, लक्षमण राम सहित तमाम ग्रामीणों ने शीघ्र पानी की आपूर्ति नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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सदे मेहरगांव पेयजल पंपिंग योजना से सदे, मेहरगांव, रिखून, बराखाल, बेल्जाण, लामाढुंगा, रिखून सहित कई गांवों में पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन यहां पिछले कई दिनों से पानी की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि 10 से 15 दिन में एक बार पानी आ रहा है वह भी पर्याप्त नहीं है। वयोवृद्ध राज्य आंदोलनकारी पान सिंह रावत का कहना है कि कई बार विभागों के चक्कर लगा दिए गए हैं, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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पीएमजीएसवाई द्वारा चकरगांव-घुघुती मोटर मार्ग बनाया जा रहा है, जिसके चलते योजना के पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गए थे, तमाम प्रयासों के बावजूद आज तक इन्हें ठीक नहीं किया गया है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हो रही है। पारंपरिक नौले, धारे सूख चुके हैं, ग्रामीण गाड़, गधेरों के पानी पर निर्भर हो गए हैं। जानवरों के लिए भी पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। प्रधान कमला देवी, सरोप सिंह, कुंदन सिंह, गोपाल सिंह, लक्षमण राम सहित तमाम ग्रामीणों ने शीघ्र पानी की आपूर्ति नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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