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राज्य बनने के बाद जंगलों में लगी सबसे बड़ी आग

Sun, 17 Jun 2018 01:08 AM IST
Updated Sun, 17 Jun 2018 01:08 AM IST
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राज्य बनने के बाद जंगलों में लगी सबसे बड़ी आग
हल्द्वानी। राज्य बनने के बाद इस बार जंगलों में सबसे ज्यादा आग लगने की घटनाएं हुई हैं। इसमें भारी पैमाने पर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। सामान्य तौर पर वन विभाग 15 जून को फायर सीजन समाप्त कर देता है, लेकिन इस बार की घटनाओं के मद्देनजर 18 जून को बैठक में सभी पहलुओं की समीक्षा कर फैसला लेने की बात वनाधिकारी कर रहे हैं।
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राज्य बनने से पूर्व सबसे भीषण आग 1995 में लगी थी, उस वक्त एकीकृत उत्तर प्रदेश में दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में जंगल को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद सबसे भीषण आग 2016 में लगी थी। उस समय 2074 घटनाओं में 4434 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा। उस वक्त आग की घटनाएं बेकाबू होने लगी थी, तो आग बुझाने में एयर फोर्स से मदद मांगनी पड़ी। 2017 में आग काफी हद तक काबू में रही लेकिन इस साल आग ने रौद्र रूप दिखाया है। 16 जून तक प्रदेश में आग लगने की 2151 घटनाओं में करीब 4481 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है, इसमें 86 लाख रुपये से अधिक की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। आग बुझाने के लिए दस हजार से ज्यादा वन कर्मी, फायर वॉचर आदि लगाने पड़े थे। आग बुझाने के लिए राज्य सरकार ने 12.5 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था।
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2151 घटनाओं में 4481 हेक्टेयर जंगल जल गया
2016 की घटनाओं को भी पीछे छोड़ा
86 लाख से अधिक की वन संपदा को नुकसान पहुंचा
सहमा वन विभाग, फायर सीजन की समाप्ति घोषित करने से बचा


20 से 31 मई का समय सबसे भार पड़ा
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता के अनुसार राज्य गठन के बाद जंगल में सबसे भीषण आग लगने की घटनाएं हुई है। इसका एक बड़ा कारण तापमान में वृद्धि होना था। 20 से 31 मई घटनाओं की दृष्टि से सबसे संवेदनशील रहा है। उत्तरकाशी, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल जिले में सबसे ज्यादा घटनाएं हुई हैं। सामान्य तौर पर 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन होता है लेकिन अभी फायर सीजन समाप्त नहीं किया गया है, इस संबंध 18 जून को फैसला किया जाएगा।
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तीन साल की घटनाएं
वर्ष घटनाएं प्रभावित क्षेत्रफल
2016 2074 4434 हेक्टेयर
2017 805 1245 हेक्टेयर
2018 2151 4481 हेक्टेयर (16 जून तक)

गढ़वाल मंडल में सबसे ज्यादा लगी आग
रीजन घटनाएं क्षेत्रफल
गढ़वाल 970 2533.5
कुमाऊं 641 1273.9
वन्यजीव 75 161.636
शिवालिक 465 511
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