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आरएफसी की बर्खास्तगी नहीं सेवा विस्तार खत्म किया
Updated Fri, 06 Oct 2017 02:11 AM IST
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हल्द्वानी। चावल घोटाले में कुमाऊं के संभागीय खाद्य नियंत्रक को बर्खास्त करने का ढोल पीटने वाली प्रदेश सरकार ने हकीकत में नियंत्रक विष्णु सिंह धानिक का सेवा विस्तार ही समाप्त किया। कहा तो यह गया था कि धानिक को बर्खास्त करने का आदेश मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति को दिए हैं। प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश में अब साफ है कि धानिक का सेवा विस्तार समाप्त किया गया है।
कांग्रेस की सरकार ने संभागीय खाद्य नियंत्रक और समाज कल्याण निदेशक के पद पर विष्णु सिंह धानिक को पहले छह माह का सेवा विस्तार दिया था। इसके बाद एक फरवरी 2017 को एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया। सेवा विस्तार की शर्तों में साफ उल्लेख है कि ‘सेवा विस्तार को सरकार एक वर्ष से अन्यून कर सकती है या एक माह की लिखित सूचना देकर या ऐसी सूचना के बदले में वेतन और भत्ते देकर ऐसे दिए गए सेवा विस्तार एवं विस्तारित सेवा विस्तार की अवधि को समाप्ति के पूर्व समाप्त कर सकती है।’ तीन अक्तूबर को प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि धानिक की प्रदत्त सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाने की राज्यपाल ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है।
प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश से जाहिर है कि धानिक को अब सरकार सेवा विस्तार की शर्तों के तहत एक महीने का वेतन और भत्ते भी देगी। यह तब है जबकि धानिक का सेवा विस्तार एक फरवरी 2018 को समाप्त हो रहा था। प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश के बाद अब सवाल ये उठता है कि लगभग पांच सौ करोड़ के अनाज घोटाले को लेकर क्या सरकार संजीदा है? या यह मामला राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए ही उछाला गया है। प्रमुख सचिव के आदेश और धानिक को हटाने के बाद कांग्रेस-भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप से यह साबित भी हो रहा है। अब मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। यह तब है जबकि सरकार ने पहला ही कदम बेहद कमजोर उठाया।
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कुमाऊं संभाग के पूर्व खाद्य नियंत्रक की बर्खास्तगी का ढोल पीटती रही प्रदेश की सरकार
शर्तों के अनुसार धानिक को एक माह का वेतन और भत्ते भी देने पड़ेंगे
जीरो टालरेंस वाली सरकार की मंशा पर भी उठे सवाल
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कांग्रेस की सरकार ने संभागीय खाद्य नियंत्रक और समाज कल्याण निदेशक के पद पर विष्णु सिंह धानिक को पहले छह माह का सेवा विस्तार दिया था। इसके बाद एक फरवरी 2017 को एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया। सेवा विस्तार की शर्तों में साफ उल्लेख है कि ‘सेवा विस्तार को सरकार एक वर्ष से अन्यून कर सकती है या एक माह की लिखित सूचना देकर या ऐसी सूचना के बदले में वेतन और भत्ते देकर ऐसे दिए गए सेवा विस्तार एवं विस्तारित सेवा विस्तार की अवधि को समाप्ति के पूर्व समाप्त कर सकती है।’ तीन अक्तूबर को प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि धानिक की प्रदत्त सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाने की राज्यपाल ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है।
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प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश से जाहिर है कि धानिक को अब सरकार सेवा विस्तार की शर्तों के तहत एक महीने का वेतन और भत्ते भी देगी। यह तब है जबकि धानिक का सेवा विस्तार एक फरवरी 2018 को समाप्त हो रहा था। प्रमुख सचिव की ओर से जारी आदेश के बाद अब सवाल ये उठता है कि लगभग पांच सौ करोड़ के अनाज घोटाले को लेकर क्या सरकार संजीदा है? या यह मामला राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए ही उछाला गया है। प्रमुख सचिव के आदेश और धानिक को हटाने के बाद कांग्रेस-भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप से यह साबित भी हो रहा है। अब मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। यह तब है जबकि सरकार ने पहला ही कदम बेहद कमजोर उठाया।
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कुमाऊं संभाग के पूर्व खाद्य नियंत्रक की बर्खास्तगी का ढोल पीटती रही प्रदेश की सरकार
शर्तों के अनुसार धानिक को एक माह का वेतन और भत्ते भी देने पड़ेंगे
जीरो टालरेंस वाली सरकार की मंशा पर भी उठे सवाल