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लाखों की लागत से बनीं दर्शक दीर्घा भी तोड़ दी
Updated Sun, 14 Jan 2018 02:21 AM IST
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हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज में लालबहादुर शास्त्री सभागार निर्माण का स्थल बदलने के चक्कर में सांसद निधि से लाखों की लागत से खेल मैदान में बनी दर्शक दीर्घा की सीढ़ियां तोड़ डाली गई। इतना ही नहीं वॉलीबाल और बास्केटबाल कोर्ट भी सभागार की भेंट चढ़ गए। दोनों कोर्ट को ध्वस्त कर दिया गया। इस नुकसान का मामला भी शासन की जांच में शामिल है। इधर, सभागार निर्माण का स्थल बदलने को लेकर शासन द्वारा तलब करने पर शनिवार को प्राचार्य फाइल को दुरुस्त करने में लगे रहे। निर्माण एजेंसी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सीके सकलानी को भी बुलाया गया था।
एमबीपीजी कॉलेज में निर्माणाधीन लालबहादुर शास्त्री सभागार का निर्माण स्थल बदलने के मामले में शासन ने प्राचार्य को 16 जनवरी को तलब किया है। पूर्व स्थल पर निर्माण पर लाखों का खर्च होने के बाद फिर दूसरे स्थान पर सभागार का निर्माण होने पर शासन ने गंभीर एतराज जताया है। वर्तमान में जिस स्थान पर सभागार का निर्माण हो रहा है वहां खेल मैदान हुआ करता था। इसमें क्रीड़ा प्रतियोगिताएं होने के साथ छात्र यहां पर प्रेक्टिस भी किया करते थे। करीब पांच साल पहले छात्रसंघ के पदाधिकारियों की मांग पर सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने खेल मैदान में दर्शक दीर्घा बनाने के लिए सांसद निधि से पांच लाख रुपये दिए थे। छात्रनेताओं ने दर्शक दीर्घा बनवाई थी जिसे सभागार निर्माण कराने के चलते तुड़वा दिया गया।
खेल मैदान के आधे हिस्से में सभागार का निर्माण चलने के कारण कॉलेज परिसर में कहीं भी बड़ा खेल मैदान नहीं बचा है। छात्र-छात्राओं को प्रेक्टिस तक नहीं कर पा रहे। कालेज में निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर तथा कुछ अन्य लोग शासन की आपत्ति का ठोस जवाब तैयार करने में लगे रहे। प्रोजेक्ट मैनेजर भी अपनी गर्दन बनाने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि कॉलेज में कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों और खरीदारी आदि का ब्योरा भी शासन ने मांगा है।
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सभागार निर्माण का स्थल छात्रहित में बदला : प्राचार्य
कॉलेज में सभागार के निर्माण का स्थल महाविद्यालय विकास समिति के निर्णय के आधार पर बदला गया। इस कमेटी में नौ वरिष्ठ प्राध्यापक शामिल हैं। यह निर्णय छात्रहित में लिया गया। सभागार का स्थान बदलने के निर्णय में छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने भी सहमति जताई थी इसलिए शासन से कोई अनुमति नहीं ली गई। कॉलेज में किस स्थान पर क्या निर्माण होना है, इसका निर्णय करने का अधिकार प्राचार्य को है। जिस स्थान पर पहले था सभागार वह गेट से सटा होने के कारण उससे अधिक समस्या थी।
- डॉ. जगदीश प्रसाद, प्राचार्य एमबीपीजी कॉलेज
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एमबीपीजी कॉलेज में निर्माणाधीन लालबहादुर शास्त्री सभागार का निर्माण स्थल बदलने के मामले में शासन ने प्राचार्य को 16 जनवरी को तलब किया है। पूर्व स्थल पर निर्माण पर लाखों का खर्च होने के बाद फिर दूसरे स्थान पर सभागार का निर्माण होने पर शासन ने गंभीर एतराज जताया है। वर्तमान में जिस स्थान पर सभागार का निर्माण हो रहा है वहां खेल मैदान हुआ करता था। इसमें क्रीड़ा प्रतियोगिताएं होने के साथ छात्र यहां पर प्रेक्टिस भी किया करते थे। करीब पांच साल पहले छात्रसंघ के पदाधिकारियों की मांग पर सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने खेल मैदान में दर्शक दीर्घा बनाने के लिए सांसद निधि से पांच लाख रुपये दिए थे। छात्रनेताओं ने दर्शक दीर्घा बनवाई थी जिसे सभागार निर्माण कराने के चलते तुड़वा दिया गया।
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खेल मैदान के आधे हिस्से में सभागार का निर्माण चलने के कारण कॉलेज परिसर में कहीं भी बड़ा खेल मैदान नहीं बचा है। छात्र-छात्राओं को प्रेक्टिस तक नहीं कर पा रहे। कालेज में निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर तथा कुछ अन्य लोग शासन की आपत्ति का ठोस जवाब तैयार करने में लगे रहे। प्रोजेक्ट मैनेजर भी अपनी गर्दन बनाने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि कॉलेज में कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों और खरीदारी आदि का ब्योरा भी शासन ने मांगा है।
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सभागार निर्माण का स्थल छात्रहित में बदला : प्राचार्य
कॉलेज में सभागार के निर्माण का स्थल महाविद्यालय विकास समिति के निर्णय के आधार पर बदला गया। इस कमेटी में नौ वरिष्ठ प्राध्यापक शामिल हैं। यह निर्णय छात्रहित में लिया गया। सभागार का स्थान बदलने के निर्णय में छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने भी सहमति जताई थी इसलिए शासन से कोई अनुमति नहीं ली गई। कॉलेज में किस स्थान पर क्या निर्माण होना है, इसका निर्णय करने का अधिकार प्राचार्य को है। जिस स्थान पर पहले था सभागार वह गेट से सटा होने के कारण उससे अधिक समस्या थी।
- डॉ. जगदीश प्रसाद, प्राचार्य एमबीपीजी कॉलेज