{"_id":"5a4fd66e4f1c1b0a788b6dc8","slug":"161515181678-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"15 पंचायत प्रतिनिधियों का सपना टूटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15 पंचायत प्रतिनिधियों का सपना टूटा
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। दो से अधिक संतान वालों को निकाय चुनाव न लड़ने के कानून के चलते नगर निगम में शामिल नए गांवों के 15 पंचायत प्रतिनिधियों का सपना टूट गया है। नगर निगम में 36 गांवों के शामिल होने से इन प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि उन्हें निगम में जनप्रतिनिधित्व का मौका मिल जाएगा।
नगर निकाय के चुनाव अप्रैल में प्रस्तावित हैं। नगर निगम के सीमा विस्तार में 36 गांवों को शामिल किया गया है। गांव के निगम में शामिल होने से 36 गांव के पंचायत प्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त हो गई है। शासन से जीओ के बाद इन पंचायत प्रतिनिधियों के जल्द बस्ते जमा हो जाएंगे। अब कई ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य निकाय चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। दो से अधिक संतान वाले निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इन नियमों में 10 ग्राम प्रधान और पांच पंचायत सदस्य आ रहे हैं। इससे ये चुनाव में पहले ही बाहर हो गए हैं। उधर वार्ड के परिसीमन के बाद राजनीति तेज हो गई है। निकाय चुनाव लड़ने के लिए नेताओं ने तैयारी शुरू कर दी है।
निकाय चुनाव में कांग्रेस मेयर, नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष के अलावा किसी को भी सिंबल नहीं देती है। उधर भाजपा सभी को सिंबल देती है। ऐसे में कई नेता भाजपा के सिंबल से तो कई नेता कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निकाय के चुनाव अप्रैल में प्रस्तावित हैं। नगर निगम के सीमा विस्तार में 36 गांवों को शामिल किया गया है। गांव के निगम में शामिल होने से 36 गांव के पंचायत प्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त हो गई है। शासन से जीओ के बाद इन पंचायत प्रतिनिधियों के जल्द बस्ते जमा हो जाएंगे। अब कई ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य निकाय चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। दो से अधिक संतान वाले निकाय चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इन नियमों में 10 ग्राम प्रधान और पांच पंचायत सदस्य आ रहे हैं। इससे ये चुनाव में पहले ही बाहर हो गए हैं। उधर वार्ड के परिसीमन के बाद राजनीति तेज हो गई है। निकाय चुनाव लड़ने के लिए नेताओं ने तैयारी शुरू कर दी है।
विज्ञापन
निकाय चुनाव में कांग्रेस मेयर, नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष के अलावा किसी को भी सिंबल नहीं देती है। उधर भाजपा सभी को सिंबल देती है। ऐसे में कई नेता भाजपा के सिंबल से तो कई नेता कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
विज्ञापन