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एमबी को दो करोड़ मिलने पर लग सकता है अड़ंगा
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हल्द्वानी। एमबीपीजी कॉलेज के लिए बुरे दिन चले रहे हैं। रूसा से महाविद्यालय के विकास कार्यों के लिए दो करोड़ की धनराशि मिलने पर अड़ंगा लगने के आसार पैदा हो गए हैं।
एमबीपीजी कॉलेज में रंगाई-पुताई समेत विभिन्न विकास कार्यों के लिए महाविद्यालय प्रशासन ने उच्चशिक्षा निदेशालय को डीपीआर भेज कर कार्य कराने की अनुमति मांगी थी मगर उच्चशिक्षा निदेशक द्वारा एक माह के भीतर कार्य कराने की अनुमति नहीं दी गई जिसके फलस्वरूप एमबी कालेज में स्वीकृति की प्रत्याशा में चल रहे विभिन्न विकास कार्य बुधवार को रोक दिए गए। महाविद्यालय में ये सभी कार्य अगस्त के प्रथम सप्ताह में होने वाले नैक निरीक्षण के मद्देनजर कराए जा रहे थे ताकि नैक के निरीक्षण में अच्छी ग्रेडिंग मिलने पर महाविद्यालय को यूजीसी से अनुदान मिलने में कोई बाधा न आए। अब कालेज प्रशासन सीमित संसाधनों में ही छोटे मोटे कार्य कराकर काम चलाने में जुटा है।
इधर, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) कार्यालय देहरादून से महाविद्यालय के लिए स्वीकृत दो करोड़ का बजट मिलने में व्यवधान पैदा होने की बात सामने आ रही है। बताते हैं कि रूसा से उसी महाविद्यालय को संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए बजट दिया जा सकता है जिसे नैक की मान्यता प्राप्त हो। इस कारण रूसा से एमबीपीजी कालेज को अगले माह मिलने वाले दो करोड़ भी अब खटाई में पड़ने के आसार हैं क्योंकि एमबी कालेज के पास भी अभी नैक की मान्यता नहीं है तथा जो अगस्त में नैक का निरीक्षण होना है उसमें भी क्या ग्रेडिंग मिलेगी कुछ नहीं कहा जा सकता। उधर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एससी पंत का कहना है कि एमबी कॉलेज के आगणन का हम परीक्षण कर रहे हैं।
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एमबीपीजी कॉलेज को दो करोड़ मिलने पर लग सकता है अड़ंगा
रूसा से बिना नैक मान्यता के महाविद्यालय धनराशि दिए जाने का प्रावधान नहीं
प्रदेश में संचालित 102 डिग्री कालेजों में से सिर्फ 17 को नैक का ग्रेड मिला हुआ है। एमबीपीजी कालेज को रूसा से दो करोड़ की राशि दी जानी थी उसे अभी तक फैकल्टी के मानक के कारण नहीं दिया जा सका था। अब फैकल्टी पूरी होने की सूचना मिली है।
- डा. रचना नौटियाल, रूसा प्रभारी एवं सहायक निदेशक उच्चशिक्षा
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एमबीपीजी कॉलेज में रंगाई-पुताई समेत विभिन्न विकास कार्यों के लिए महाविद्यालय प्रशासन ने उच्चशिक्षा निदेशालय को डीपीआर भेज कर कार्य कराने की अनुमति मांगी थी मगर उच्चशिक्षा निदेशक द्वारा एक माह के भीतर कार्य कराने की अनुमति नहीं दी गई जिसके फलस्वरूप एमबी कालेज में स्वीकृति की प्रत्याशा में चल रहे विभिन्न विकास कार्य बुधवार को रोक दिए गए। महाविद्यालय में ये सभी कार्य अगस्त के प्रथम सप्ताह में होने वाले नैक निरीक्षण के मद्देनजर कराए जा रहे थे ताकि नैक के निरीक्षण में अच्छी ग्रेडिंग मिलने पर महाविद्यालय को यूजीसी से अनुदान मिलने में कोई बाधा न आए। अब कालेज प्रशासन सीमित संसाधनों में ही छोटे मोटे कार्य कराकर काम चलाने में जुटा है।
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इधर, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) कार्यालय देहरादून से महाविद्यालय के लिए स्वीकृत दो करोड़ का बजट मिलने में व्यवधान पैदा होने की बात सामने आ रही है। बताते हैं कि रूसा से उसी महाविद्यालय को संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए बजट दिया जा सकता है जिसे नैक की मान्यता प्राप्त हो। इस कारण रूसा से एमबीपीजी कालेज को अगले माह मिलने वाले दो करोड़ भी अब खटाई में पड़ने के आसार हैं क्योंकि एमबी कालेज के पास भी अभी नैक की मान्यता नहीं है तथा जो अगस्त में नैक का निरीक्षण होना है उसमें भी क्या ग्रेडिंग मिलेगी कुछ नहीं कहा जा सकता। उधर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. एससी पंत का कहना है कि एमबी कॉलेज के आगणन का हम परीक्षण कर रहे हैं।
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एमबीपीजी कॉलेज को दो करोड़ मिलने पर लग सकता है अड़ंगा
रूसा से बिना नैक मान्यता के महाविद्यालय धनराशि दिए जाने का प्रावधान नहीं
प्रदेश में संचालित 102 डिग्री कालेजों में से सिर्फ 17 को नैक का ग्रेड मिला हुआ है। एमबीपीजी कालेज को रूसा से दो करोड़ की राशि दी जानी थी उसे अभी तक फैकल्टी के मानक के कारण नहीं दिया जा सका था। अब फैकल्टी पूरी होने की सूचना मिली है।
- डा. रचना नौटियाल, रूसा प्रभारी एवं सहायक निदेशक उच्चशिक्षा