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हवा के झोंके से पटरी से उतरे दो यात्री कोच
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पटरी से उतरा इंजन
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी/लालकुआं। आंधी और बारिश से बृहस्पतिवार शाम जनजीवन प्रभावित हो गया। लालकुआं रेलवे स्टेशन यार्ड में खड़े ट्रेन के दो कोच हवा के तेज के झोंके से बगैर इंजन के दौड़ने लगे। गनीमत रही कि दोनों कोच कुछ दूरी के बाद रेलवे फाटक से पहले पटरी से उतर गए। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सूचना के बाद रेलवे में खलबली मच गई। देर रात रेल कर्मी दोनों कोचों को पटरी पर लाने में सफल हुए। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के पीआरओ राजेंद्र सिंह ने कोच के डिरेल होने की घटना की जांच की बात कही है।
रेलवे द्वारा शून्य दुर्घटना का दावा अक्सर यहां खोखला साबित हो रहा है। बृहस्पतिवार को रेलवे स्टेशन यार्ड पर दो अतिरिक्त यात्री कोच खड़े थे। नियमानुसार कोच के पहिए लकड़ी के गुटके और चेन से रोके जाते हैं लेकिन रेल कर्मियों द्वारा ऐसा नही करने पर दोनों कोच तेज हवा के झोंके आने पर अचानक पटरी पर दौड़ने लगे। इस दौरान कुछ दूरी तय करने के बाद दोनों कोच रेलवे फाटक से पहले पटरी से उतर कर जाम हो गए। अगर कोच पटरी से नही उतरते तो कुछ आगे चलकर रेलवे फाटक तक पहुंच सकते थे। जहां पर वाहनों की आवाजाही के दौरान हादसा हो सकता था। घटना की सूचना के बाद सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेलपथ नीरज कुमार के नेतृत्व में रेल कर्मियों ने कोच को पटरी पर चढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिया। रात करीब सवा दस बजे कोच को पटरी लाया गया। उधर, स्टेशन अधीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि तेज आंधी में कोच पटरी पर गुटके को तोड़कर आगे बढ़ गया था। जिसे नियंत्रित करने के लिए डिरेल किया गया, ताकि बड़ी दुर्घटना ना हो सके। उनके अनुसार केवल एक कोच ही डिरेल हुआ। इस दौरान किसी भी ट्रेन का संचालन प्रभावित नहीं हुआ।
हवा के झोंकों से बिना इंजन के दौड़ पड़े कोच
लालकुआं रेलवे स्टेशन पर हादसा, रेलवे फाटक से पहले पटरी से उतरने पर टला हादसा
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रेलवे द्वारा शून्य दुर्घटना का दावा अक्सर यहां खोखला साबित हो रहा है। बृहस्पतिवार को रेलवे स्टेशन यार्ड पर दो अतिरिक्त यात्री कोच खड़े थे। नियमानुसार कोच के पहिए लकड़ी के गुटके और चेन से रोके जाते हैं लेकिन रेल कर्मियों द्वारा ऐसा नही करने पर दोनों कोच तेज हवा के झोंके आने पर अचानक पटरी पर दौड़ने लगे। इस दौरान कुछ दूरी तय करने के बाद दोनों कोच रेलवे फाटक से पहले पटरी से उतर कर जाम हो गए। अगर कोच पटरी से नही उतरते तो कुछ आगे चलकर रेलवे फाटक तक पहुंच सकते थे। जहां पर वाहनों की आवाजाही के दौरान हादसा हो सकता था। घटना की सूचना के बाद सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेलपथ नीरज कुमार के नेतृत्व में रेल कर्मियों ने कोच को पटरी पर चढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिया। रात करीब सवा दस बजे कोच को पटरी लाया गया। उधर, स्टेशन अधीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि तेज आंधी में कोच पटरी पर गुटके को तोड़कर आगे बढ़ गया था। जिसे नियंत्रित करने के लिए डिरेल किया गया, ताकि बड़ी दुर्घटना ना हो सके। उनके अनुसार केवल एक कोच ही डिरेल हुआ। इस दौरान किसी भी ट्रेन का संचालन प्रभावित नहीं हुआ।
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हवा के झोंकों से बिना इंजन के दौड़ पड़े कोच
लालकुआं रेलवे स्टेशन पर हादसा, रेलवे फाटक से पहले पटरी से उतरने पर टला हादसा