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मनरेगा श्रमिकों दो माह से नहीं मिली मजदूरी , खाने के पड़े लाले
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:57 PM IST
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गरुड़(बागेश्वर)। मनरेगा श्रमिकों के खाते में दो माह से मजदूरी का रुपया नहीं आने से आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। समय पर मजदूरी न मिलने से परेशान कई श्रमिकों ने मनरेगा में काम करना छोड़ दिया है।
विकास खंड गरुड़ में मनरेगा के अंतर्गत दस हजार से अधिक कार्यशील मनरेगा श्रमिक पंजीकृत हैं। वर्तमान में करीब छह सौ मजदूर काम कर रहे हैं। इनके मजदूरों के खातों में समय पर मजदूरी का रुपया नहीं आ पा रहा है। जिससे इन्हें आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। जिससे कई मजदूरों ने मनरेगा में काम करना छोड़ दिया है। ब्लाक में गत वर्ष तक पंद्रह सौ से ज्यादा मजदूर मनरेगा के काम में लगे थे। इस साल इनकी संख्या करीब छह सौ ही रह गई है।
कनिष्ठ प्रमुख प्रकाश कोहली ने बताया कि उनके गांव पचना में वर्तमान में चालीस मजदूर मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। मनरेगा श्रमिकों के खातों में दो माह से शासन से मजदूरी का रुपया नहीं आया। दीवाली में भी मजदूरी न मिलने से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत भंडारी, नैकाना की प्रेमा परिहार, सुराग के रघुवीर सिंह, जखेड़ा के ईश्वर परिहार, माल्दे की कमला बिष्ट, कौसानी के रवींद्र नेगी, हरीनगरी के लक्ष्मण राम आर्या, नरग्वाड़ी के राजेंद्र परिहार ने बताया कि मनरेगा अधिनियम के अंतर्गत मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान 14 दिन के भीतर करने का प्रावधान है। लेकिन शासन के उदासीन कार्य प्रणाली के चलते मनरेगा श्रमिकों को दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। बीडीओ बीसी पंत ने बताया कि दो माह से अकुशल श्रमिकों के खातों में मजदूरी का धन शासन से नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि कुशल श्रमिकों के खातों में मजदूरी का धन अवमुक्त करने के संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
विकास खंड गरुड़ में मनरेगा के अंतर्गत दस हजार से अधिक कार्यशील मनरेगा श्रमिक पंजीकृत हैं। वर्तमान में करीब छह सौ मजदूर काम कर रहे हैं। इनके मजदूरों के खातों में समय पर मजदूरी का रुपया नहीं आ पा रहा है। जिससे इन्हें आर्थिक तंगी से जूझना पड़ रहा है। जिससे कई मजदूरों ने मनरेगा में काम करना छोड़ दिया है। ब्लाक में गत वर्ष तक पंद्रह सौ से ज्यादा मजदूर मनरेगा के काम में लगे थे। इस साल इनकी संख्या करीब छह सौ ही रह गई है।
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कनिष्ठ प्रमुख प्रकाश कोहली ने बताया कि उनके गांव पचना में वर्तमान में चालीस मजदूर मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं। मनरेगा श्रमिकों के खातों में दो माह से शासन से मजदूरी का रुपया नहीं आया। दीवाली में भी मजदूरी न मिलने से उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत भंडारी, नैकाना की प्रेमा परिहार, सुराग के रघुवीर सिंह, जखेड़ा के ईश्वर परिहार, माल्दे की कमला बिष्ट, कौसानी के रवींद्र नेगी, हरीनगरी के लक्ष्मण राम आर्या, नरग्वाड़ी के राजेंद्र परिहार ने बताया कि मनरेगा अधिनियम के अंतर्गत मनरेगा श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान 14 दिन के भीतर करने का प्रावधान है। लेकिन शासन के उदासीन कार्य प्रणाली के चलते मनरेगा श्रमिकों को दो माह से मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। बीडीओ बीसी पंत ने बताया कि दो माह से अकुशल श्रमिकों के खातों में मजदूरी का धन शासन से नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि कुशल श्रमिकों के खातों में मजदूरी का धन अवमुक्त करने के संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।