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शासन ने नहीं सुना तो लेंगे हाईकोर्ट की शरण
Updated Wed, 15 Aug 2018 12:53 AM IST
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सितारगंज में राजकीय पॉलिटेक्निक शक्तिफार्म के प्रवक्ता द्वारा इस्तीफा दिए जाने के मामले में अभी तक कोई सुनवाई न होने पर अब प्रवक्ता ने हाईकोर्ट की शरण लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने कालेज के प्रधानाचार्य को पत्र लिखकर कहा कि अगर उनके मामले का जल्द निस्तारण न किया गया तो वह हाईकोर्ट जाएंगे।
शासन ने गत आठ जून को सिडकुल स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक के इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवक्ता एमके वर्मा का यहां से द्वाराहाट कालेज में स्थानांतरण कर दिया था। जिस पर प्रवक्ता वर्मा ने नियमानुसार स्थानांतरण न किए जाने का आरोप लगाते हुए बीती 23 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद कालेज प्रबंधन में हड़कंप मचा है। गत चार अगस्त को प्रवक्ता ने तकनीकी शिक्षा के अपर सचिव को पत्र लिखकर प्रधानाचार्य के आदेशानुसार शासकीय चार्ज हस्तांतरित करने की सूचना दी थी। मामले में अभी तक शासन स्तर से कोई भी सुनवाई न होने पर अब प्रवक्ता ने प्रधानाचार्य को पत्र देकर कहा कि अगर, नियम विरुद्ध स्थानांतरण के मामले में एक सप्ताह के भीतर सुनवाई नहीं हुई तो वह हाईकोर्ट की शरण लेंगे। कहा कि स्थानांतरण मामले पर किसी भी निर्णय से अभी तक उन्हें अवगत नहीं कराया गया और चार्ज हस्तांतरण कराया जा रहा है। कहा कि दो माह का वेतन भी नहीं दिया गया। जिससे वह आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं।
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शासन ने गत आठ जून को सिडकुल स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक के इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रवक्ता एमके वर्मा का यहां से द्वाराहाट कालेज में स्थानांतरण कर दिया था। जिस पर प्रवक्ता वर्मा ने नियमानुसार स्थानांतरण न किए जाने का आरोप लगाते हुए बीती 23 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद कालेज प्रबंधन में हड़कंप मचा है। गत चार अगस्त को प्रवक्ता ने तकनीकी शिक्षा के अपर सचिव को पत्र लिखकर प्रधानाचार्य के आदेशानुसार शासकीय चार्ज हस्तांतरित करने की सूचना दी थी। मामले में अभी तक शासन स्तर से कोई भी सुनवाई न होने पर अब प्रवक्ता ने प्रधानाचार्य को पत्र देकर कहा कि अगर, नियम विरुद्ध स्थानांतरण के मामले में एक सप्ताह के भीतर सुनवाई नहीं हुई तो वह हाईकोर्ट की शरण लेंगे। कहा कि स्थानांतरण मामले पर किसी भी निर्णय से अभी तक उन्हें अवगत नहीं कराया गया और चार्ज हस्तांतरण कराया जा रहा है। कहा कि दो माह का वेतन भी नहीं दिया गया। जिससे वह आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं।
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