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धान को नुकसान पहुंचा रहे पता लपेटक, तना छेदक
Updated Wed, 25 Jul 2018 12:13 AM IST
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सितारगंज। क्षेत्र में वर्षा की कमी धान की फसल पर बीमारियां लेकर आई है। धान की फसल को सींचने के लिए जहां पानी की कमी हो रही है तो वहीं फसलों में कीड़े लगने से भारी नुकसान हो रहा है।
इस बार जुलाई में वर्षा कम होने के कारण जहां खेत सूखे पड़े हैं तो वहीं धान की फसलें भी बीमारी से ग्रसित हो रही हैं। फसल को बीमारी से बचाने के लिए किसानों को महंगी कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग करना पड़ रहा है। साथ ही सारा दिन खेतों में ट्यूबवेल लगाकर पानी की सिंचाई की जा रही है।
कृषि विभाग के विकासखंड प्रभारी सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि बरसात न होने के कारण इस बार धान की फसलों में पत्ता लपेटक व तना छेदक कीड़ों का प्रकोप बढ़ गया है। बताया कि मोनोक्रोटोफास (1.4 एमएल प्रति हेक्टेयर), क्लोरोपायरीफास (2.5 एमएल प्रति हेक्टेयर) और क्यूनालफास (दो लीटर प्रति हेक्टेयर) दवाओं का खेतों में छिड़काव कर इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
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इस बार जुलाई में वर्षा कम होने के कारण जहां खेत सूखे पड़े हैं तो वहीं धान की फसलें भी बीमारी से ग्रसित हो रही हैं। फसल को बीमारी से बचाने के लिए किसानों को महंगी कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग करना पड़ रहा है। साथ ही सारा दिन खेतों में ट्यूबवेल लगाकर पानी की सिंचाई की जा रही है।
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कृषि विभाग के विकासखंड प्रभारी सुभाष चंद्र यादव ने बताया कि बरसात न होने के कारण इस बार धान की फसलों में पत्ता लपेटक व तना छेदक कीड़ों का प्रकोप बढ़ गया है। बताया कि मोनोक्रोटोफास (1.4 एमएल प्रति हेक्टेयर), क्लोरोपायरीफास (2.5 एमएल प्रति हेक्टेयर) और क्यूनालफास (दो लीटर प्रति हेक्टेयर) दवाओं का खेतों में छिड़काव कर इन बीमारियों से बचा जा सकता है।
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