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200 साल पुरानी पांडुलिपियों के संरक्षण की कला सीखने पहुंचे प्रतिभागी
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:01 AM IST
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नैनीताल में पांडुलिपीव संरक्षण की कार्यशाला के दौरान जानकारी देते विषय विषेशज्ञ अनुपम साह।
- फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। 200 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण की कला सीखने 20 प्रशिक्षणार्थी देश भर से नगर में पहुंचे हैं। शनिवार को सैकड़ों पांडुलिपियां लेकर नगर में पहुंचे प्रशिक्षणार्थियों ने इनके रखरखाव की कला सीखी। एक महीने तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में महाराष्ट्र, जम्मू, असोम, राजस्थान समेत देश के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी पहुंचे हैं।
प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हिमसाको (हिमालयन सोसाइटी फॉर हेरिटेज एंड आर्ट) संस्था के निदेशक अनुपम साह और पांडुलिपि विशेषज्ञ ललित पाठक ने किया। प्राचीन और दुर्लभ दस्तावेजों को संरक्षित किए जाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला में कागज, पत्थर, लकड़ी समेत अन्य धातुओं में सैकड़ों वर्ष पूर्व उकेरे गए महत्वपूर्ण तथ्यों के संरक्षण पर मंथन किया गया। संस्था के निदेशक साह ने बताया कि नैनीताल में पांडुलिपि संरक्षण की पहल वर्ष 2006 से की जा रही है।
-कार्यशाला में ये हैं शामिल
तन्मय मिश्रा, जितेंद्र नाथ, राजीव नयन, देनेश्वर गहुकर, विजय श्रीनाथ, गौतम फुकोन, कुनलुंग फुकोन, संतोष कुमार झा, मीनू साह, शरद कांत शर्मा, नामोकर शर्मा, अरविंद कोटियाल, राहुल सिंह बिष्ट, सुगंधा कुमारी, रणवीर सिंह, अंकुश दौगरा, अविनेश शर्मा, तीर्थ कुमार, मीनल, ऋषभ भारद्वाज आदि।
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-27 केंद्र खुले हैं नए
हिमसाको संस्था के निदेशक अनुपम साह ने बताया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन ने भारत में प्राचीन कलाकृति संरक्षण के लिए 27 नए केंद्र खोले हैं। इसमें एक नक्षत्र वेदशाला देवप्रयाग भी शामिल है। नरेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष पहली बार संस्था की ओर से सालभर में दो चरणों में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इससे पहले हर वर्ष एक बाद 30 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता था।
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प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हिमसाको (हिमालयन सोसाइटी फॉर हेरिटेज एंड आर्ट) संस्था के निदेशक अनुपम साह और पांडुलिपि विशेषज्ञ ललित पाठक ने किया। प्राचीन और दुर्लभ दस्तावेजों को संरक्षित किए जाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यशाला में कागज, पत्थर, लकड़ी समेत अन्य धातुओं में सैकड़ों वर्ष पूर्व उकेरे गए महत्वपूर्ण तथ्यों के संरक्षण पर मंथन किया गया। संस्था के निदेशक साह ने बताया कि नैनीताल में पांडुलिपि संरक्षण की पहल वर्ष 2006 से की जा रही है।
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-कार्यशाला में ये हैं शामिल
तन्मय मिश्रा, जितेंद्र नाथ, राजीव नयन, देनेश्वर गहुकर, विजय श्रीनाथ, गौतम फुकोन, कुनलुंग फुकोन, संतोष कुमार झा, मीनू साह, शरद कांत शर्मा, नामोकर शर्मा, अरविंद कोटियाल, राहुल सिंह बिष्ट, सुगंधा कुमारी, रणवीर सिंह, अंकुश दौगरा, अविनेश शर्मा, तीर्थ कुमार, मीनल, ऋषभ भारद्वाज आदि।
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-27 केंद्र खुले हैं नए
हिमसाको संस्था के निदेशक अनुपम साह ने बताया कि राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन ने भारत में प्राचीन कलाकृति संरक्षण के लिए 27 नए केंद्र खोले हैं। इसमें एक नक्षत्र वेदशाला देवप्रयाग भी शामिल है। नरेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष पहली बार संस्था की ओर से सालभर में दो चरणों में कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इससे पहले हर वर्ष एक बाद 30 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता था।