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युवती के गर्भ का परीक्षण कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए
Updated Sat, 07 Jul 2018 02:15 AM IST
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने रेप पीड़ित नाबालिग के गर्भपात करने की अनुमति से संबंधित प्रार्थना पत्र की सुनवाई करते हुए सीएमओ नैनीताल को तीन वरिष्ठ डॉक्टरों का एक पैनल गठित कर युवती के गर्भ का परीक्षण कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी।
न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। एक नाबालिग युवती ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि वह 16 वर्ष की हैै और बलात्कार पीड़ित है। इस कृत्य के बाद वह 21 सप्ताह की गर्भवती है। उसे नारी निकेतन हल्द्वानी में रखा गया। जहां से वह 16 जून 2018 को अपनी मां के घर गई है और उसने अपना मेडिकल टेस्ट कराया और गर्भपात कराना चाहा, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि 1971 की धारा 3 के अनुसार 20 हफ्ते से ज्यादा के गर्भ का चिकित्सीय समापन नहीं किया जा सकता। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। कोर्ट ने सीएमओ नैनीताल को आदेशित किया है कि वह तीन वरिष्ठ चिकित्सकों का पैनल तैयार कर युवती व उसके गर्भ की व्यापक जांच कर रिपोर्ट कोर्ट को दें। डॉक्टरों का यह पैनल सात जुलाई को युवती व उसके गर्भ का मेडिकल परीक्षण करेगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने पीड़िता की पहचान को उजागर न करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने दिया आदेश, परीक्षण की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी
नाबालिग का गर्भपात कराने से मना कर दिया था डॉक्टरों ने
पीड़ित ने हाईकोर्ट से गर्भपात की अनुमति के लिए की थी गुहार
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न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। एक नाबालिग युवती ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि वह 16 वर्ष की हैै और बलात्कार पीड़ित है। इस कृत्य के बाद वह 21 सप्ताह की गर्भवती है। उसे नारी निकेतन हल्द्वानी में रखा गया। जहां से वह 16 जून 2018 को अपनी मां के घर गई है और उसने अपना मेडिकल टेस्ट कराया और गर्भपात कराना चाहा, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि 1971 की धारा 3 के अनुसार 20 हफ्ते से ज्यादा के गर्भ का चिकित्सीय समापन नहीं किया जा सकता। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। कोर्ट ने सीएमओ नैनीताल को आदेशित किया है कि वह तीन वरिष्ठ चिकित्सकों का पैनल तैयार कर युवती व उसके गर्भ की व्यापक जांच कर रिपोर्ट कोर्ट को दें। डॉक्टरों का यह पैनल सात जुलाई को युवती व उसके गर्भ का मेडिकल परीक्षण करेगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने पीड़िता की पहचान को उजागर न करने के निर्देश दिए हैं।
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हाईकोर्ट ने दिया आदेश, परीक्षण की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी
नाबालिग का गर्भपात कराने से मना कर दिया था डॉक्टरों ने
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