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लखपत 53 की उम्र में 50 नरभक्षियों को कर चुके चित-कोर्डिनेशन
Updated Sun, 17 Jun 2018 11:52 PM IST
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गरुड़(बागेश्वर) शिकारी लखपत सिंह रावत 53 साल की उम्र में 50 आदमखोर जंगली जानवरों को अपनी 315 बोर की राइफल से मार चुुके हैं। इसमें 48 तेंदुए एक शेर और एक शेरनी शामिल हैं। उनका कहना है किसी तेंदुए पर पर गोली चलाने से पहले वह यह सुनिश्चित कर लेते हैं वह आदमखोर है कि नहीं।
शिकारी लखपत सिंह चमोली जिले के गैरसैण ब्लॉक के ग्वाड़ मल्ला के मूल निवासी हैं। पेशे से शिक्षक हैं। बंदूक चलाने का अच्छा अनुभव होने पर सरकार ने इन्हें 2002 में शिकारी का दर्जा दिया। शिकारी लखपत ने बताया कि मैंने सबसे पहले 2002 में आदिबदरी में एक आदमखोर तेंदुए को मारा था। 2016 में जामनगर तराई पश्चिमी में एक शेरनी को मार गिराया जबकि रामनगर में एक शेर को भी ढेर किया।
उन्होंने बताया कि वह अब तक 48 तेंदुओं को मार चुके हैं। उन्होंने बताया कि हरीगनरी के जंगल में चार से अधिक तेंदुए हैं। शनिवार की रात मैने जिस तेंदुए को मारा वहीं तेंदुआ आदमखोर था और भूख से भटक रहा था। पशु चिकित्साधिकारी पीके पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के दौरान आमदखोर तेंदुए के पेट में मांस के टुकड़े नहीं मिले, कुछ बाल मिले हैं । इससे लगता है कि तेंदुआ भूखा था। डीएफओ आरके सिंह ने बताया कि हरीनगरी में मारा गया तेंदुआ ही आदमखोर था।
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शिकारी लखपत सिंह चमोली जिले के गैरसैण ब्लॉक के ग्वाड़ मल्ला के मूल निवासी हैं। पेशे से शिक्षक हैं। बंदूक चलाने का अच्छा अनुभव होने पर सरकार ने इन्हें 2002 में शिकारी का दर्जा दिया। शिकारी लखपत ने बताया कि मैंने सबसे पहले 2002 में आदिबदरी में एक आदमखोर तेंदुए को मारा था। 2016 में जामनगर तराई पश्चिमी में एक शेरनी को मार गिराया जबकि रामनगर में एक शेर को भी ढेर किया।
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उन्होंने बताया कि वह अब तक 48 तेंदुओं को मार चुके हैं। उन्होंने बताया कि हरीगनरी के जंगल में चार से अधिक तेंदुए हैं। शनिवार की रात मैने जिस तेंदुए को मारा वहीं तेंदुआ आदमखोर था और भूख से भटक रहा था। पशु चिकित्साधिकारी पीके पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के दौरान आमदखोर तेंदुए के पेट में मांस के टुकड़े नहीं मिले, कुछ बाल मिले हैं । इससे लगता है कि तेंदुआ भूखा था। डीएफओ आरके सिंह ने बताया कि हरीनगरी में मारा गया तेंदुआ ही आदमखोर था।
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