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आईएएस में मन्नू की मुंहमांगी मुराद पहले ही प्रयास में हुई पूरी
Updated Sat, 28 Apr 2018 02:12 AM IST
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नैनीताल। सेंट मेरीज स्कूल की पूर्व छात्रा अपूर्वा पांडे ‘मन्नू’ ने पहले ही प्रयास में आईएएस की परीक्षा में 39वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपना और परिजनों का सपना पूरा कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अपूर्वा जीजीआईसी नैनीताल में रसायन विज्ञान की शिक्षिका मीना पांडे और कोटाबाग पॉलिटेक्निक के अध्यापक किशन चंद्र पांडे की पुत्री हैं।
अपूर्वा ने 2010 में सेंट मेरीज स्कूल से हाईस्कूल और बीरशिबा हल्द्वानी से इंटर करके जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उनका परिवार अमरावती कॉलोनी हल्द्वानी में रहता है। अपूर्वा के चाचा डॉ. विमल पांडे, चाची सीमा पांडे नैनीताल में डीएसबी परिसर में भौतिकी के प्राध्यापक हैं। उनका भाई इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट से बैचलर ऑफ मैथमेटिक्स कर रहा है। अपूर्वा ने बीटेक के बाद एक वर्ष घर पर ही रह कर आईएएस की तैयारी की। इसके लिए उन्होंने बिल्कुल नए विषय राजनीतिशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंध चुनकर पहले ही प्रयास में सफलता की बुलंदियां छू लीं। घर में दुलार से मन्नू नाम से पुकारी जाने वाली अपूर्वा ने बताया कि उनका बचपन से ही आईएएस बनने का ख्वाब था। इसके लिए उन्होंने भरपूर परिश्रम किया लेकिन उसके माता-पिता ने उनका सपना पूरा करने को उससे भी ज्यादा परिश्रम किया और वही उनके प्रेरणा स्रोत रहे।
रीडिंग और डिबेट हैं हॉबी
नैनीताल। अपूर्वा को बचपन से ही किताबें पढ़ने, वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने का शौक था। वादविवाद में उन्होंने अनेक पुरस्कार भी जीते और यह दोनों शौक आईएएस में मददगार भी बने।
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अनुशासन और लगन से मिलती है मंजिल
नैनीताल। अपूर्वा का कहना है कि अनुशासन, लगन, सतत प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इस परीक्षा के लिए पांच से छह घंटे पढ़ाई की। परीक्षा से तीन माह पहले से उन्होंने 12 घंटे प्रतिदिन पढ़ाई की।
शिक्षा, लैंगिक समानता प्राथमिकता रहेगी
नैनीताल। आईएएस बनने के बाद अपूर्व का इरादा देश की शिक्षा व्यवस्था, जेंडर की समानता के सुधार के लिए कार्य करने का है। यातायात व्यवस्था में सुधार करना भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।
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अपूर्वा ने 2010 में सेंट मेरीज स्कूल से हाईस्कूल और बीरशिबा हल्द्वानी से इंटर करके जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। उनका परिवार अमरावती कॉलोनी हल्द्वानी में रहता है। अपूर्वा के चाचा डॉ. विमल पांडे, चाची सीमा पांडे नैनीताल में डीएसबी परिसर में भौतिकी के प्राध्यापक हैं। उनका भाई इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट से बैचलर ऑफ मैथमेटिक्स कर रहा है। अपूर्वा ने बीटेक के बाद एक वर्ष घर पर ही रह कर आईएएस की तैयारी की। इसके लिए उन्होंने बिल्कुल नए विषय राजनीतिशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंध चुनकर पहले ही प्रयास में सफलता की बुलंदियां छू लीं। घर में दुलार से मन्नू नाम से पुकारी जाने वाली अपूर्वा ने बताया कि उनका बचपन से ही आईएएस बनने का ख्वाब था। इसके लिए उन्होंने भरपूर परिश्रम किया लेकिन उसके माता-पिता ने उनका सपना पूरा करने को उससे भी ज्यादा परिश्रम किया और वही उनके प्रेरणा स्रोत रहे।
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रीडिंग और डिबेट हैं हॉबी
नैनीताल। अपूर्वा को बचपन से ही किताबें पढ़ने, वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने का शौक था। वादविवाद में उन्होंने अनेक पुरस्कार भी जीते और यह दोनों शौक आईएएस में मददगार भी बने।
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अनुशासन और लगन से मिलती है मंजिल
नैनीताल। अपूर्वा का कहना है कि अनुशासन, लगन, सतत प्रयास से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इस परीक्षा के लिए पांच से छह घंटे पढ़ाई की। परीक्षा से तीन माह पहले से उन्होंने 12 घंटे प्रतिदिन पढ़ाई की।
शिक्षा, लैंगिक समानता प्राथमिकता रहेगी
नैनीताल। आईएएस बनने के बाद अपूर्व का इरादा देश की शिक्षा व्यवस्था, जेंडर की समानता के सुधार के लिए कार्य करने का है। यातायात व्यवस्था में सुधार करना भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।