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पांच पीएचसी के डाक्टरों की नौकरी खतरे में
Updated Mon, 02 Apr 2018 02:36 AM IST
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नैनीताल। जिले की पांच पीएचसी पर तैनात डॉक्टर आदि कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा है। भारत सरकार की ओर से बजट रोक देने से कई डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, एएनएम की नौकरी जाना लगभग तय हो गया है। सीएमओ ने शासनादेश आने के बाद पीएचसी बंद करने की बात कही है।
जिले में पांच शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जो हल्द्वानी के शनिबाजार, मंगलपड़ाव, राजपुरा, काठगोदाम में स्थित हैं। एक शहरी पीएचसी रामनगर में है। यह सभी पीएचसी एनजीओ के माध्यम से संचालित हैं। इनमें इस समय डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, एएनएम समेत कई कर्मचारी तैनात हैं। इस वित्तीय वर्ष भारत सरकार ने इन पीएचसी को चलाने के लिए कोई बजट नहीं रखा है। ऐसे में इन्हें बंद करने की घोषणा कर दी गई है। इससे केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। सीएमओ डॉ. एमएम तिवारी ने बताया कि बजट न मिलने के कारण सरकार पीएचसी को बंद कर सकती है या फिर इन्हें चलाने के लिए कोई दूसरा उपाय कर सकती है। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई आदेश नहीं नहीं आया। आदेश आने के बाद केंद्रों को बंद करने पर फैसला लिया जाएगा।
- शहरी गरीबों को परेशानी होगी
अगर पीएचसी बंद होती हैं तो सबसे ज्यादा परेशानी शहरी गरीबों को होगी। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि भले ही केंद्र मानकों के अनुरूप नहीं हों, लेकिन इनसे गरीबों को मदद मिल रही है। अब यह केंद्र बंद होने से गरीबों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इन केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को नौकरी जाने का दुख सहना पड़ेगा।
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जिले में पांच शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जो हल्द्वानी के शनिबाजार, मंगलपड़ाव, राजपुरा, काठगोदाम में स्थित हैं। एक शहरी पीएचसी रामनगर में है। यह सभी पीएचसी एनजीओ के माध्यम से संचालित हैं। इनमें इस समय डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, एएनएम समेत कई कर्मचारी तैनात हैं। इस वित्तीय वर्ष भारत सरकार ने इन पीएचसी को चलाने के लिए कोई बजट नहीं रखा है। ऐसे में इन्हें बंद करने की घोषणा कर दी गई है। इससे केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। सीएमओ डॉ. एमएम तिवारी ने बताया कि बजट न मिलने के कारण सरकार पीएचसी को बंद कर सकती है या फिर इन्हें चलाने के लिए कोई दूसरा उपाय कर सकती है। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई आदेश नहीं नहीं आया। आदेश आने के बाद केंद्रों को बंद करने पर फैसला लिया जाएगा।
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- शहरी गरीबों को परेशानी होगी
अगर पीएचसी बंद होती हैं तो सबसे ज्यादा परेशानी शहरी गरीबों को होगी। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि भले ही केंद्र मानकों के अनुरूप नहीं हों, लेकिन इनसे गरीबों को मदद मिल रही है। अब यह केंद्र बंद होने से गरीबों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इन केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को नौकरी जाने का दुख सहना पड़ेगा।
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