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150 वर्ष बाद हो रही अद्भुत खगोलीय घटना
Updated Sun, 28 Jan 2018 02:52 AM IST
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नैनीताल। वर्ष 2018 का पहला ग्रहण पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जो 31 जनवरी को पूरे भारत में देखा जा सकेगा। इसकी खासियत है कि 150 वर्ष के अंतराल के बाद एक साथ तीन घटनाओं का संगम होगा, जो इसे बेहद आकर्षक बना देगा। बुधवार को जनवरी में दूसरी बार पूर्णिमा यानी फुल मून होगा। एक ही माह में दूसरी बार पूर्णिमा पड़ने की घटना ब्लू मून कहलाती है इसलिए यह ब्लू मून होगा।
सूर्यास्त के दौरान ग्रहण होने के कारण चांद पूरा अदृश्य न होकर लालिमा लिए दिखाई देगा। ऐसे चांद को ब्लड मून कहा जाता है। साथ ही इस रात चांद अपनी कक्षा में धरती के बेहद करीब होने के कारण आकार में काफी बड़ा भी नजर आएगा। ऐसे चांद को सुपर मून कहा जाता है। यह ग्रहण विश्व के अनेक देशों में अलग-अलग समय पर वहां सूर्योदय या सूर्यास्त के आसपास देखा जा सकेगा। भारत में ग्रहण की अवधि लगभग पौने चार घंटे की होगी, जिसमें 1:32 मिनट तक पूर्ण ग्रहण होगा। दिल्ली में शाम 5:53 बजे ग्रहण शुरू होगा। इस समय क्षितिज से नीचे होने के कारण चांद ग्रहण के साथ ही उदय होता दिखेगा। दिल्ली में शाम 6:59 बजे पूर्ण ग्रहण नजर आएगा जो 1:32 मिनट रहने के बाद क्रमश: घटने लगेगा। 9:38 बजे ग्रहण समाप्त होगा। आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के निदेशक डॉ. अनिल पांडे ने बताया कि 31 जनवरी को चांद अपनी कक्षा में अपेक्षाकृत पृथ्वी के बहुत निकट होगा, क्योंकि इन दिनों चांद पृथ्वी से सामान्य दूरी से कम के परिक्रमा पथ पर है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार इस दूरी पर चंद्रमा का आकार सामान्य से लगभग सात प्रतिशत बड़ा और इसकी चमक करीब 14 फीसदी ज्यादा नजर आती है।
चमक ज्यादा होने के कारण इसकी लालिमा भी ज्यादा होगी
वैज्ञानिकों के अनुसार चांद के ब्लू मून, ब्लड मून, सुपर मून होने की तीन घटनाएं एक साथ 150 वर्ष के बाद घटित हो रही हैं। इससे पूर्व यह घटना 1866 में हुई थी। केवल ब्लू मून के अवसर पर लगने वाला अगला ग्रहण भी 2028 में ही लगेगा। इस कारण वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह ग्रहण भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, चीन, मेक्सिको, थाईलैंड सहित विश्व के तमाम देशों में देखा जा सकेगा।
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सूर्यास्त के दौरान ग्रहण होने के कारण चांद पूरा अदृश्य न होकर लालिमा लिए दिखाई देगा। ऐसे चांद को ब्लड मून कहा जाता है। साथ ही इस रात चांद अपनी कक्षा में धरती के बेहद करीब होने के कारण आकार में काफी बड़ा भी नजर आएगा। ऐसे चांद को सुपर मून कहा जाता है। यह ग्रहण विश्व के अनेक देशों में अलग-अलग समय पर वहां सूर्योदय या सूर्यास्त के आसपास देखा जा सकेगा। भारत में ग्रहण की अवधि लगभग पौने चार घंटे की होगी, जिसमें 1:32 मिनट तक पूर्ण ग्रहण होगा। दिल्ली में शाम 5:53 बजे ग्रहण शुरू होगा। इस समय क्षितिज से नीचे होने के कारण चांद ग्रहण के साथ ही उदय होता दिखेगा। दिल्ली में शाम 6:59 बजे पूर्ण ग्रहण नजर आएगा जो 1:32 मिनट रहने के बाद क्रमश: घटने लगेगा। 9:38 बजे ग्रहण समाप्त होगा। आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के निदेशक डॉ. अनिल पांडे ने बताया कि 31 जनवरी को चांद अपनी कक्षा में अपेक्षाकृत पृथ्वी के बहुत निकट होगा, क्योंकि इन दिनों चांद पृथ्वी से सामान्य दूरी से कम के परिक्रमा पथ पर है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार इस दूरी पर चंद्रमा का आकार सामान्य से लगभग सात प्रतिशत बड़ा और इसकी चमक करीब 14 फीसदी ज्यादा नजर आती है।
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चमक ज्यादा होने के कारण इसकी लालिमा भी ज्यादा होगी
वैज्ञानिकों के अनुसार चांद के ब्लू मून, ब्लड मून, सुपर मून होने की तीन घटनाएं एक साथ 150 वर्ष के बाद घटित हो रही हैं। इससे पूर्व यह घटना 1866 में हुई थी। केवल ब्लू मून के अवसर पर लगने वाला अगला ग्रहण भी 2028 में ही लगेगा। इस कारण वैज्ञानिक इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह ग्रहण भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, चीन, मेक्सिको, थाईलैंड सहित विश्व के तमाम देशों में देखा जा सकेगा।
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