{"_id":"5be73975bdec226930330cae","slug":"151541880181-nainital-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जोहार महोत्सव में आई सिसूण और बुरांश की चाय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जोहार महोत्सव में आई सिसूण और बुरांश की चाय
Updated Sun, 11 Nov 2018 01:37 AM IST
विज्ञापन
coffee leaf tea
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी के जोहार महोत्सव में इस बार सिसूंण और बुरांश की चाय ने धूम मचाई है। इसके साथ ही ज्या (नमकीन चाय) की भी जोहारी शौका समाज के लोगों में काफी डिमांड है। जोहार महोत्सव में जोहार क्षेत्र के व्यंजनों, ऊनी वस्त्रों, जैकेट, वास्कट, कुमाऊंनी टोपी, सिसूंण के जैकेट, ऊंनी जैकेट आदि के भी स्टाल लगे हैं। स्टालों पर दिनभर खरीददारों की भारी भीड़ उमड़ी।
तिब्बत के व्यापारिक मार्ग का चित्रण करने वाले नैन सिंह रावत के मूल गांव निवासी मिलम जलथा (मुनस्यारी) प्रेम रावत ने यहां विभिन्न उत्पादों के स्टाल लगाए हैं। इनमें मुख्य रूप से पहली बार सिसूंण और बुरांश की चाय स्टाल पर रखी है। यह चाय लीवर, शुगर, कैंसर जैसे असाध्य रोगों के लिए गुणकारी बताई गई है। सिसूंण की एक डिप चाय में डाल देने से यह काफी अच्छा स्वाद देती है। इसके अलावा उन्होंने चंवर गाय की पूछ, सिसूंण की जैकेट, ऊंनी भेड़ के ऊन की जैकेट, वास्टक, नैन सिंह रावत के नाम के टी शर्ट आदि भी स्टाल पर रखे हैं।
बौन मुनस्यारी से आई संजीवनी समूह की भवानी रावत ने ज्या (नमकीन चाय) का स्टाल लगाया है, जो लोगों को खूब भा रहा है। शंकर सिंह लस्पाल आदि के स्टालों में जंबूी, गंद्रेैंणी, अटीक, कटीक, तिमूर, भांग, राजमा, सफेद राजमा, लाल राजमा, जंगली जीरा, मासी गोकुल धूप, सूखा मीट आदि की भरमार है। नानाखेप मुनस्यारी की चंपा पांगती ने कुमाऊंनी टोपी का स्टाल लगाया है। प्रयास महिला शौका समिति की गीता रावत, हंसा रावत, हेमा पांगती, तारा पांगती, नंदा टोलिया, बसंती मर्तोलिया, कौशल्या धर्मशक्तू ने मडुवे की रोटी, भुमला, तिमूर की चटनी और कापे की सब्जी का स्टाल लगाया है। निर्मला सुमत्याल ने जूट के बैग, मोबाइल पर्स, हैंड पर्स का स्टाल लगाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
तिब्बत के व्यापारिक मार्ग का चित्रण करने वाले नैन सिंह रावत के मूल गांव निवासी मिलम जलथा (मुनस्यारी) प्रेम रावत ने यहां विभिन्न उत्पादों के स्टाल लगाए हैं। इनमें मुख्य रूप से पहली बार सिसूंण और बुरांश की चाय स्टाल पर रखी है। यह चाय लीवर, शुगर, कैंसर जैसे असाध्य रोगों के लिए गुणकारी बताई गई है। सिसूंण की एक डिप चाय में डाल देने से यह काफी अच्छा स्वाद देती है। इसके अलावा उन्होंने चंवर गाय की पूछ, सिसूंण की जैकेट, ऊंनी भेड़ के ऊन की जैकेट, वास्टक, नैन सिंह रावत के नाम के टी शर्ट आदि भी स्टाल पर रखे हैं।
विज्ञापन
बौन मुनस्यारी से आई संजीवनी समूह की भवानी रावत ने ज्या (नमकीन चाय) का स्टाल लगाया है, जो लोगों को खूब भा रहा है। शंकर सिंह लस्पाल आदि के स्टालों में जंबूी, गंद्रेैंणी, अटीक, कटीक, तिमूर, भांग, राजमा, सफेद राजमा, लाल राजमा, जंगली जीरा, मासी गोकुल धूप, सूखा मीट आदि की भरमार है। नानाखेप मुनस्यारी की चंपा पांगती ने कुमाऊंनी टोपी का स्टाल लगाया है। प्रयास महिला शौका समिति की गीता रावत, हंसा रावत, हेमा पांगती, तारा पांगती, नंदा टोलिया, बसंती मर्तोलिया, कौशल्या धर्मशक्तू ने मडुवे की रोटी, भुमला, तिमूर की चटनी और कापे की सब्जी का स्टाल लगाया है। निर्मला सुमत्याल ने जूट के बैग, मोबाइल पर्स, हैंड पर्स का स्टाल लगाया है।
विज्ञापन