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एचएनबी विवि के छात्र संघ पदाधिकारियों को राहत
Updated Sat, 06 Jan 2018 01:41 AM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने एचएनबी विश्वविद्यालय के छात्र संघ पदाधिकारियों को राहत देते हुए अग्रिम आदेशों तक उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक बढ़ा दी है। मामले की अगली सुनवाई फरवरी में होगी।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 25 दिसंबर 2017 को सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग श्रीनगर की ओर से छात्र संघ अध्यक्ष व सचिव को पत्र भेजकर इनकी चौरास पुल से पैदल झूला मार्ग को निर्माण कार्य के लिए पत्र भेजा गया था। लेकिन 26 दिसंबर 2017 को आश्वासन के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न करने पर वहां पर छात्रों का लोनिवि के कर्मचारियों से झगड़ा हो गया। इस पर छात्र संघ पदाधिकारियों व अन्य के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण पर पूर्व में हाइकोर्ट ने छात्रों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद सरकार व अधिशासी अभियंता के अधिवक्ता की ओर से अपना जवाब कोर्ट में पेश किया गया तथा अंतरिम आदेश को निरस्त करने की मांग की गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन में याचीगण जांच में सहयोग कर रहे हैं। याचिका में कहा कि उन्हें इस मुकदमे में गलत रूप में फंसाया गया है।
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न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 25 दिसंबर 2017 को सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग श्रीनगर की ओर से छात्र संघ अध्यक्ष व सचिव को पत्र भेजकर इनकी चौरास पुल से पैदल झूला मार्ग को निर्माण कार्य के लिए पत्र भेजा गया था। लेकिन 26 दिसंबर 2017 को आश्वासन के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न करने पर वहां पर छात्रों का लोनिवि के कर्मचारियों से झगड़ा हो गया। इस पर छात्र संघ पदाधिकारियों व अन्य के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इस प्रकरण पर पूर्व में हाइकोर्ट ने छात्रों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के बाद सरकार व अधिशासी अभियंता के अधिवक्ता की ओर से अपना जवाब कोर्ट में पेश किया गया तथा अंतरिम आदेश को निरस्त करने की मांग की गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन में याचीगण जांच में सहयोग कर रहे हैं। याचिका में कहा कि उन्हें इस मुकदमे में गलत रूप में फंसाया गया है।
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