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ई वे बिल ने निकाल दी ट्रांसपोर्ट कारोबार की हवा
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:29 AM IST
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हल्द्वानी। ट्रांसपोर्ट कारोबार की रफ्तार नोट बंदी के ब्रेकर से आए झटके से संभल नहीं पाई थी कि अब जीएसटी और ई वे बिल ने इस कारोबार की हवा निकाल दी है। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो ई वे बिल लागू होने के बाद 50 फीसदी कारोबार चौपट हो गया है।
कुमाऊं की आर्थिक राजधानी हल्द्वानी में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर बसाया गया है। यहां छोटी बड़ी तकरीबन 50-60 ट्रांसपोर्ट हैं। इन ट्रांसपोर्ट से 2500-3000 ट्रकों से मैदानी और पर्वतीय इलाकों में माल ढोने का काम किया जाता है। वहीं जीएसटी के ई वे बिल लागू होेने का हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने विरोध किया था। इधर ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की मौत के बाद यह मुद्दा गरमा गया है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की मानें नोटबंदी और जीएसटी ने कारोबार पूरी तरह चौपट कर दिया। बची हुई कसर ई वे बिल ने पूरी कर दी है। तकनीकी तौर पर ई वे बिल जेनरेट करने में नाकाम कारोबारी गाड़ी नहीं भेज पा रहे हैं। भाड़ा नहीं मिल रहा है और गाड़ी कि किस्तों, संचालन खर्च वगैरह का बोझ बढ़ता जा रहा है।
ट्रांसपोर्टरों ने बताई समस्याएं
- तकनीकी तौर पर ई वे बिल जेनरेट करने में ट्रांसपोर्टर के छूट रहे पसीने
- तकनीकी दक्ष कर्मी की नियुक्ति करें तो 10-15 हजार का अतिरिक्त बोझ
- ट्रांसपोर्ट 24 घंटे का काम है, ऐसे में 8 घंटे की तीन शिफ्ट में कर्मी तैनात करने होंगे जिससे 50 हजार तक बेवजह देने होंगे
- ई वे बिल नहीं जेनरेट तो माल नहीं भेज सकते
- कंप्यूटर, इंटरनेट का भी खर्चा बढ़ा
-सर्वर, इंटरनेट की गड़बड़ी का खामियाजा भी भुगतना होगा
अभी नहीं है जरूरी ई वे बिल
सहायक राज्य आयुक्त मानवेंद्र सिंह का कहना है कि ई वे बिल अभी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए जरूरी नहीं है। अभी सिर्फ ट्रायल किया जा रहा है, अगर कारोबारियों को ई वे बिल जेनरेट में समस्या आ रही है तो राज्य कर अधिकारियों को बताएं जिससे कि तकनीकी टीम को बताकर इनका निस्तारण किया जा सके।
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कुमाऊं की आर्थिक राजधानी हल्द्वानी में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ट्रांसपोर्ट नगर बसाया गया है। यहां छोटी बड़ी तकरीबन 50-60 ट्रांसपोर्ट हैं। इन ट्रांसपोर्ट से 2500-3000 ट्रकों से मैदानी और पर्वतीय इलाकों में माल ढोने का काम किया जाता है। वहीं जीएसटी के ई वे बिल लागू होेने का हल्द्वानी के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने विरोध किया था। इधर ट्रांसपोर्टर प्रकाश पांडे की मौत के बाद यह मुद्दा गरमा गया है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की मानें नोटबंदी और जीएसटी ने कारोबार पूरी तरह चौपट कर दिया। बची हुई कसर ई वे बिल ने पूरी कर दी है। तकनीकी तौर पर ई वे बिल जेनरेट करने में नाकाम कारोबारी गाड़ी नहीं भेज पा रहे हैं। भाड़ा नहीं मिल रहा है और गाड़ी कि किस्तों, संचालन खर्च वगैरह का बोझ बढ़ता जा रहा है।
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ट्रांसपोर्टरों ने बताई समस्याएं
- तकनीकी तौर पर ई वे बिल जेनरेट करने में ट्रांसपोर्टर के छूट रहे पसीने
- तकनीकी दक्ष कर्मी की नियुक्ति करें तो 10-15 हजार का अतिरिक्त बोझ
- ट्रांसपोर्ट 24 घंटे का काम है, ऐसे में 8 घंटे की तीन शिफ्ट में कर्मी तैनात करने होंगे जिससे 50 हजार तक बेवजह देने होंगे
- ई वे बिल नहीं जेनरेट तो माल नहीं भेज सकते
- कंप्यूटर, इंटरनेट का भी खर्चा बढ़ा
-सर्वर, इंटरनेट की गड़बड़ी का खामियाजा भी भुगतना होगा
अभी नहीं है जरूरी ई वे बिल
सहायक राज्य आयुक्त मानवेंद्र सिंह का कहना है कि ई वे बिल अभी ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के लिए जरूरी नहीं है। अभी सिर्फ ट्रायल किया जा रहा है, अगर कारोबारियों को ई वे बिल जेनरेट में समस्या आ रही है तो राज्य कर अधिकारियों को बताएं जिससे कि तकनीकी टीम को बताकर इनका निस्तारण किया जा सके।
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