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स्वच्छ हवा, पानी, भोजन और आवास मानवाधिकार : टंडन
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Mon, 26 Jun 2017 01:32 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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स्वच्छ हवा, पानी, भोजन और आवास मानवाधिकार : टंडन
नैनीताल। स्वच्छ हवा, पानी, भोजन और आवास मानवाधिकार की श्रेणी में आते हैं। कुछ लोग निजी लाभ के लिए खाद्य पदार्थों, फलों और सब्जियों में इंजेक्शन लगाकर उन्हें समय से पूर्व तैयार कर रहे हैं। इससे मानव की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है जो मानवाधिकारों का हनन है। यह बात उत्तराखंड लॉ कमीशन के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेश टंडन ने कही। टंडन रविवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज सभागार में ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्चुअल के 36वें सम्मेलन में बोल रहे थे।
मानवाधिकारों के संरक्षण में बुद्धिजीवियों की भूमिका विषय पर आयोजित सेमिनार में टंडन ने कहा कि यदि मरीज को डॉक्टर व स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं तो यह भी मानवाधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति टंडन ने पुलिस और आर्मी के जवानों के मानवाधिकारों के संरक्षण की पुरजोर वकालत की। अध्यक्षीय संबोधन में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल ने जम्मू कश्मीर में आतंकियों और पत्थरबाजों द्वारा पुलिस कर्मियों व सेना के जवानों के साथ दुर्व्यवहार करने और उनकी हत्या करने को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।
मेरठ से आए सेवानिवृत्त कर्नल एसके वैद्य ने जम्मू कश्मीर में आतंकियों से निपटने के लिए सेना को जरूरत के मुताबिक अधिकार दिए जाने की वकालत की। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के डॉ. अजय मगन, मेरठ के डॉ. पंकज त्यागी, इलाहाबाद हाइकोर्ट के अधिवक्ता एसके गर्ग ने भी संबोधित किया। संचालन डीएसबी परिसर के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रो. नीता बोरा शर्मा ने किया। इससे पूर्व सम्मेलन के मुख्य संयोजक पीएन शर्मा ने अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस मौके पर पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व दर्जा मंत्री शांति मेहरा, दया बिष्ट, तारा बोरा, प्रो. मधुरेंद्र कुमार, प्रो. श्रुति बिष्ट, अनुष्का शर्मा आदि थे।
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छह को कुमाऊं उत्तराखंड रत्न सम्मान
सम्मेलन के दौरान कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल, उत्तराखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता केएन जोशी, पंजाब के अधिवक्ता रायजादा इंद्रजीत वैद्य, पंतजलि योगपीठ हरिद्वार के चिकित्सक डॉ. अजय मगन, मेरठ के डॉ. पंकज त्यागी को कुमाऊं उत्तराखंड रत्न देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा राजस्थान की डॉ. सुनीता को भी सम्मानित किया गया, लेकिन वह सम्मेलन में मौजूद नहीं थीं। न्यायमूर्ति राजेश टंडन, पीएन शर्मा और एसके वैद्य ने सम्मानित किया।
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नैनीताल। स्वच्छ हवा, पानी, भोजन और आवास मानवाधिकार की श्रेणी में आते हैं। कुछ लोग निजी लाभ के लिए खाद्य पदार्थों, फलों और सब्जियों में इंजेक्शन लगाकर उन्हें समय से पूर्व तैयार कर रहे हैं। इससे मानव की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है जो मानवाधिकारों का हनन है। यह बात उत्तराखंड लॉ कमीशन के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेश टंडन ने कही। टंडन रविवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज सभागार में ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्चुअल के 36वें सम्मेलन में बोल रहे थे।
मानवाधिकारों के संरक्षण में बुद्धिजीवियों की भूमिका विषय पर आयोजित सेमिनार में टंडन ने कहा कि यदि मरीज को डॉक्टर व स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं तो यह भी मानवाधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति टंडन ने पुलिस और आर्मी के जवानों के मानवाधिकारों के संरक्षण की पुरजोर वकालत की। अध्यक्षीय संबोधन में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल ने जम्मू कश्मीर में आतंकियों और पत्थरबाजों द्वारा पुलिस कर्मियों व सेना के जवानों के साथ दुर्व्यवहार करने और उनकी हत्या करने को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया।
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मेरठ से आए सेवानिवृत्त कर्नल एसके वैद्य ने जम्मू कश्मीर में आतंकियों से निपटने के लिए सेना को जरूरत के मुताबिक अधिकार दिए जाने की वकालत की। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के डॉ. अजय मगन, मेरठ के डॉ. पंकज त्यागी, इलाहाबाद हाइकोर्ट के अधिवक्ता एसके गर्ग ने भी संबोधित किया। संचालन डीएसबी परिसर के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रो. नीता बोरा शर्मा ने किया। इससे पूर्व सम्मेलन के मुख्य संयोजक पीएन शर्मा ने अतिथियों व प्रतिभागियों का स्वागत किया। इस मौके पर पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व दर्जा मंत्री शांति मेहरा, दया बिष्ट, तारा बोरा, प्रो. मधुरेंद्र कुमार, प्रो. श्रुति बिष्ट, अनुष्का शर्मा आदि थे।
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छह को कुमाऊं उत्तराखंड रत्न सम्मान
सम्मेलन के दौरान कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल, उत्तराखंड हाइकोर्ट के अधिवक्ता केएन जोशी, पंजाब के अधिवक्ता रायजादा इंद्रजीत वैद्य, पंतजलि योगपीठ हरिद्वार के चिकित्सक डॉ. अजय मगन, मेरठ के डॉ. पंकज त्यागी को कुमाऊं उत्तराखंड रत्न देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा राजस्थान की डॉ. सुनीता को भी सम्मानित किया गया, लेकिन वह सम्मेलन में मौजूद नहीं थीं। न्यायमूर्ति राजेश टंडन, पीएन शर्मा और एसके वैद्य ने सम्मानित किया।