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आशा ने बताई जीवन जीने की शैली, देहदान कर बुढापे को दी मात।
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:16 AM IST
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तीलू रौतेली अवार्ड से सम्मानित साहित्यकार
आशा शैली ने किया देहदान का ऐलान
लालकुआं (नैनीताल)।
तीलू रौतेली अवार्ड से सम्मानित बिंदुखत्ता की वरिष्ठ साहित्यकार आशा शैली ने उम्र के 75 वें बसंत में देहदान का ऐलान किया है। उन्होंने जिलाधिकारी को इससे संबंधित कागज सौंप दिए हैं।
पाकिस्तान के रावलपिंडी के अस्मान खट्टड में दो अगस्त 1942 को जन्मीं आशा शैली शैल सूत्र पत्रिका क़ी संपादक हैं। वह 22 पुस्तकें लिख चुकी हैं। 15 किताबें अभी प्रकाशनाधीन हैं। उनके प्रमुख कहानी संग्रह में नर्सिंग की महक, डूबते सूरज की उदासियां, उपन्यास छाया देवदार की और कविता संग्रह सुधि की सुगंध हैं। उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। 2016 को उनके साहसिक संघर्ष के लिए तीलू रैतेली सम्मान दिया गया था। जीवन में तमाम झंझावतों से जूझकर और विषम आर्थिक परिस्थितियों के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी है। उम्र के इस पड़ाव में जहां व्यक्ति को किसी सहारे की जरूरत होती है आशा ने मिसाल कायम की है। आशा शैली ने कहा कि उनकी एकमात्र अभिलाषा यही है कि वह समाज को कुछ दे जाएं यदि जीते जी वह कुछ ना कर सके तो कम से कम मरने के बाद ही सही वह इस अभिलाषा को पूरा कर सकती है।
फोटो 20एलकेयूपीटी 2
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तीलू रौतेली अवार्ड से सम्मानित साहित्यकार
आशा शैली ने किया देहदान का ऐलान
लालकुआं (नैनीताल)।
तीलू रौतेली अवार्ड से सम्मानित बिंदुखत्ता की वरिष्ठ साहित्यकार आशा शैली ने उम्र के 75 वें बसंत में देहदान का ऐलान किया है। उन्होंने जिलाधिकारी को इससे संबंधित कागज सौंप दिए हैं।
पाकिस्तान के रावलपिंडी के अस्मान खट्टड में दो अगस्त 1942 को जन्मीं आशा शैली शैल सूत्र पत्रिका क़ी संपादक हैं। वह 22 पुस्तकें लिख चुकी हैं। 15 किताबें अभी प्रकाशनाधीन हैं। उनके प्रमुख कहानी संग्रह में नर्सिंग की महक, डूबते सूरज की उदासियां, उपन्यास छाया देवदार की और कविता संग्रह सुधि की सुगंध हैं। उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। 2016 को उनके साहसिक संघर्ष के लिए तीलू रैतेली सम्मान दिया गया था। जीवन में तमाम झंझावतों से जूझकर और विषम आर्थिक परिस्थितियों के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी है। उम्र के इस पड़ाव में जहां व्यक्ति को किसी सहारे की जरूरत होती है आशा ने मिसाल कायम की है। आशा शैली ने कहा कि उनकी एकमात्र अभिलाषा यही है कि वह समाज को कुछ दे जाएं यदि जीते जी वह कुछ ना कर सके तो कम से कम मरने के बाद ही सही वह इस अभिलाषा को पूरा कर सकती है।
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फोटो 20एलकेयूपीटी 2