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एकलपीठ के आदेश पर हस्तक्षेप करने से किया इंकार
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:58 PM IST
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अदालत
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बदरी केदार मंदिर समिति मामले में सरकार को झटका
नैनीताल।
हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को एक बार फिर झटका देते हुए बदरीनाथ केदार समिति को भंग करने के सरकार के आदेश पर एकलपीठ की ओर से रोक लगाने के खिलाफ दायर स्पेशल अपील को निस्तारित किया है। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार किया और कहा कि सरकार एकलपीठ के समक्ष ही अपना पक्ष रखे। खंडपीठ ने छह जुलाई की तिथि नियत की है।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सरकार की ओर से स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ की ओर से 15 जून 2017 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। एकलपीठ ने समिति भंग करने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी।
एकलपीठ के समक्ष देहरादून निवासी दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने याचिका दायर कर कहा था कि आठ जून 2017 को सचिव धर्मस्व ने समिति को दोबारा भंग कर दिया। इससे पहले भी धर्मस्व सचिव शैलेश बगौली ने एक अप्रैल 2017 को समिति को भंग किया था, जिस पर पूर्व में न्यायालय की एकलपीठ ने 30 मई 2017 को आदेश पारित कर समिति को बहाल करने के आदेश दिए थे।
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नैनीताल।
हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को एक बार फिर झटका देते हुए बदरीनाथ केदार समिति को भंग करने के सरकार के आदेश पर एकलपीठ की ओर से रोक लगाने के खिलाफ दायर स्पेशल अपील को निस्तारित किया है। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार किया और कहा कि सरकार एकलपीठ के समक्ष ही अपना पक्ष रखे। खंडपीठ ने छह जुलाई की तिथि नियत की है।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सरकार की ओर से स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ की ओर से 15 जून 2017 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। एकलपीठ ने समिति भंग करने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी।
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एकलपीठ के समक्ष देहरादून निवासी दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने याचिका दायर कर कहा था कि आठ जून 2017 को सचिव धर्मस्व ने समिति को दोबारा भंग कर दिया। इससे पहले भी धर्मस्व सचिव शैलेश बगौली ने एक अप्रैल 2017 को समिति को भंग किया था, जिस पर पूर्व में न्यायालय की एकलपीठ ने 30 मई 2017 को आदेश पारित कर समिति को बहाल करने के आदेश दिए थे।
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