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हरीशताल से लिए मिट्टी के पचास फीसदी नमूने पास
Updated Fri, 29 Jun 2018 02:08 AM IST
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soil testing
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हल्द्वानी। ओखलकांडा ब्लॉक में हरीशताल के आसपास के क्षेत्र की मिट्टी चाय की खेती के लिए मुफीद पाई गई है। चाय विकास बोर्ड की ओर से जांच के लिए एकत्र किए गए मिट्टी के आधे नमूने पास हो गए हैं। बोर्ड अब आसपास के क्षेत्रों से भी मिट्टी की जांच करा रहा है।
तत्कालीन आयुक्त के निर्देश पर छह माह पहले चाय विकास बोर्ड ने ओखलकांडा के डूंगरीगांव से चाय उत्पादन के लिए मिट्टी के नमूनों की जांच कराई थी। इस गांव की मिट्टी तो चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त मिली थी लेकिन गांव में सिंचाई सुविधा न होने के कारण विभाग ने डूंगरी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। बाद में हरीशताल और आसपास के क्षेत्र की मिट्टी को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया था। श्यामखेत स्थित चाय बागान के प्रभारी एनसी पांडे ने बताया कि हरीशताल क्षेत्र से मिट्टी के 60 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 30 नमूने सही मिले हैं जबकि शेष की जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही मनरेगा के तहत हरीशताल और आसपास के क्षेत्रों में चाय की खेती का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। बजट मिलने पर इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
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तत्कालीन आयुक्त के निर्देश पर छह माह पहले चाय विकास बोर्ड ने ओखलकांडा के डूंगरीगांव से चाय उत्पादन के लिए मिट्टी के नमूनों की जांच कराई थी। इस गांव की मिट्टी तो चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त मिली थी लेकिन गांव में सिंचाई सुविधा न होने के कारण विभाग ने डूंगरी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। बाद में हरीशताल और आसपास के क्षेत्र की मिट्टी को जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया था। श्यामखेत स्थित चाय बागान के प्रभारी एनसी पांडे ने बताया कि हरीशताल क्षेत्र से मिट्टी के 60 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 30 नमूने सही मिले हैं जबकि शेष की जांच चल रही है। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही मनरेगा के तहत हरीशताल और आसपास के क्षेत्रों में चाय की खेती का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। बजट मिलने पर इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
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