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प्रभारी तहसीलदार, सर्वे कानूनगो के खिलाफ चार्जशीट की अनुमति मांगी
Updated Wed, 17 Jan 2018 02:13 AM IST
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रुद्रपुर। भूमि मुआवजा घोटाले में जेल में बंद लालकुआं के प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। नैनीताल जिले के रामनगर में विस्थापितों को जमीन आवंटन में हेराफेरी के मामले में मोहन सिंह सहित तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने के लिए नैनीताल पुलिस ने डीएम को पत्र भेजकर इजाजत मांगी है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व रामनगर से विस्थापित किए गए लोगों को नया झिरना में बसाया गया था। लेकिन, लोगों को किए गए जमीन आवंटन में अनियमितताएं हुई थीं। ग्राम प्रधान गुड्डी देवी और ग्रामीणों के हस्ताक्षरों की संयुक्त तहरीर पर 13 जनवरी को रामनगर कोतवाली में तत्कालीन सर्वे नायब तहसीलदार मोहन सिंह, कानूनगो जब्बार हुसैन और लेखपाल जाकिर अली के खिलाफ धारा 420, 468, 471 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। जांच में उजागर हुआ कि पुनर्वास के लिए गजट नोटिफिकेशन में मंजूर रकबा 98.344 हेक्येटर था। लेकिन, बंदोबस्ती प्रक्रिया में स्वीकृत रकबे को बढ़ाने के लिए कईं प्रस्ताव भेजे गए थे। विस्थापितों को दी गई जमीनों में आवंटन किया गया था। नैनीताल पुलिस ने डीएम ऊधमसिंह नगर को भेजे पत्र में तत्कालीन सर्वे लेखपाल जाकिर अली हाल सर्वे कानूनगो खटीमा, तत्कालीन सर्वे नायब तहसीलदार और हाल तहसीलदार लालकुआं मोहन सिंह और तत्कालीन सर्वे कानूनगो जब्बार हुसैन (सेवानिवृत्त) में से मोहन सिंह और जाकिर अली के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया है। हालांकि डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने फिलहाल ऐसा कोई पत्र मिलने से इनकार किया है।
जांच में ये अनियमितताएं मिली थीं
गजट नोटिफिकेशन और सुप्रीम कोर्ट ने विनियमित गांवों पर आगामी 80 सालों तक उत्तराधिकार के अलावा अन्य सभी प्रकार के नामांतरणों पर रोक लगा दी थी। लेकिन, अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर 22 खातेदारों के नाम विक्रय, क्रय और इकरारनामा के द्वारा नामांतरण खातेदार का नाम वसीयत के माध्यम से नामांतरण किया। यह राजपत्र और कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।
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- विस्थापित कुल परिवारों में दो का नाम बिना सार्थक विधिक तर्क के काट दिए गए। कुल 15 परिवारों के नाम विस्थापन सूची में नहीं होने के बाद भी जोड़कर उनको पुनर्वासित कर दिया।
- गजट नोटिफिकेशन में नया झिरना रामनगर में पुनर्वासन का कुल रकबा 98.344 हेक्टेयर निर्धारित था। सर्वे नायब तहसीलदार, सर्वे लेखपाल और सर्वे कानूनगो ने उक्त रकबे का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसमें उक्त रकबे में ही प्रत्येक खातेदार का तीन फीसदी हिस्सा कम करके ग्राम की सड़कें, अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि उल्लिखित कर नक्शा बनाया जाना चाहिए। लेकिन, तीनों ने रकबे को 29.01 हेक्टेयर बढ़ाकर 127.354 हेक्टेयर का नक्शा बना दिया। बढ़ी भूमि पर अनाधिकृत रूप से बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति से लोगों को बसाया।
- बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश/अनुमोदन के तीनों ने कुल 20 खातों का बंटवारा किया, जो प्रचलित विधि के विरुद्ध और गैर कानूनी है।
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कार्बेट टाइगर रिजर्व रामनगर से विस्थापित किए गए लोगों को नया झिरना में बसाया गया था। लेकिन, लोगों को किए गए जमीन आवंटन में अनियमितताएं हुई थीं। ग्राम प्रधान गुड्डी देवी और ग्रामीणों के हस्ताक्षरों की संयुक्त तहरीर पर 13 जनवरी को रामनगर कोतवाली में तत्कालीन सर्वे नायब तहसीलदार मोहन सिंह, कानूनगो जब्बार हुसैन और लेखपाल जाकिर अली के खिलाफ धारा 420, 468, 471 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। जांच में उजागर हुआ कि पुनर्वास के लिए गजट नोटिफिकेशन में मंजूर रकबा 98.344 हेक्येटर था। लेकिन, बंदोबस्ती प्रक्रिया में स्वीकृत रकबे को बढ़ाने के लिए कईं प्रस्ताव भेजे गए थे। विस्थापितों को दी गई जमीनों में आवंटन किया गया था। नैनीताल पुलिस ने डीएम ऊधमसिंह नगर को भेजे पत्र में तत्कालीन सर्वे लेखपाल जाकिर अली हाल सर्वे कानूनगो खटीमा, तत्कालीन सर्वे नायब तहसीलदार और हाल तहसीलदार लालकुआं मोहन सिंह और तत्कालीन सर्वे कानूनगो जब्बार हुसैन (सेवानिवृत्त) में से मोहन सिंह और जाकिर अली के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया गया है। हालांकि डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने फिलहाल ऐसा कोई पत्र मिलने से इनकार किया है।
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जांच में ये अनियमितताएं मिली थीं
गजट नोटिफिकेशन और सुप्रीम कोर्ट ने विनियमित गांवों पर आगामी 80 सालों तक उत्तराधिकार के अलावा अन्य सभी प्रकार के नामांतरणों पर रोक लगा दी थी। लेकिन, अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर 22 खातेदारों के नाम विक्रय, क्रय और इकरारनामा के द्वारा नामांतरण खातेदार का नाम वसीयत के माध्यम से नामांतरण किया। यह राजपत्र और कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।
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- विस्थापित कुल परिवारों में दो का नाम बिना सार्थक विधिक तर्क के काट दिए गए। कुल 15 परिवारों के नाम विस्थापन सूची में नहीं होने के बाद भी जोड़कर उनको पुनर्वासित कर दिया।
- गजट नोटिफिकेशन में नया झिरना रामनगर में पुनर्वासन का कुल रकबा 98.344 हेक्टेयर निर्धारित था। सर्वे नायब तहसीलदार, सर्वे लेखपाल और सर्वे कानूनगो ने उक्त रकबे का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसमें उक्त रकबे में ही प्रत्येक खातेदार का तीन फीसदी हिस्सा कम करके ग्राम की सड़कें, अन्य सार्वजनिक उपयोग की भूमि उल्लिखित कर नक्शा बनाया जाना चाहिए। लेकिन, तीनों ने रकबे को 29.01 हेक्टेयर बढ़ाकर 127.354 हेक्टेयर का नक्शा बना दिया। बढ़ी भूमि पर अनाधिकृत रूप से बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति से लोगों को बसाया।
- बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश/अनुमोदन के तीनों ने कुल 20 खातों का बंटवारा किया, जो प्रचलित विधि के विरुद्ध और गैर कानूनी है।