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नगर निगम चुनाव की सरगमियां तेज
Updated Fri, 12 Oct 2018 02:08 AM IST
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नेता
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हल्द्वानी। बर्खास्तगी के बाद भी सरकारी भवन में जमे निवर्तमान मेयर जोगेंद्र रौतेला के पूर्व पीए गणेश फिर चर्चा में हैं। सरकारी भवन खाली कराने के लिए नगर निगम के पहले से ही पसीने छूट रहे थे अब नगर आयुक्त ने सहायक नगर आयुक्त को पत्र भेजकर भवन को बलपूर्वक हटाने को कहा है। उधर, भाजपा की एक लॉबी गणेश के पक्ष में है जबकि दूसरा पक्ष उनकी बेदखली का जोर लगाए हुए है। हालांकि पूर्व पीए इस मामले में कोर्ट के स्टे की बात कह रहे हैं।
सुभाष नगर में नगर निगम का सामुदायिक भवन है। नगर निगम बोर्ड ने इस भवन को मेयर जोगेंद्र रौतेला के कार्यालय के लिए आवंटित किया था। जोगेंद्र रौतेला ने इस भवन को अपने पीए गणेश को रहने के लिए दे दिया था। एक साल पहले गणेश की संलिप्तता निगम की फर्जी रसीद काटने में सामने आई थी। इसके बाद मेयर ने उन्हें हटा दिया था और नगर आयुक्त ने बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद भी गणेश इस भवन में काबिज हैं। सूत्रों के अनुसार रसीद काटने के बाद मामला हाईकोर्ट गया था। वहां से यथास्थिति बनाए रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। अब नगर आयुक्त ने सहायक नगर आयुक्त को पत्र भेजकर बलपूर्वक इस भवन को खाली करने के आदेश दिए हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा का एक पक्ष गणेश को इस भवन से हटाना चाहता है और दूसरी लॉबी उनके पक्ष में है।
नगर आयुक्त ने सरकारी भवन बलपूर्वक खाली कराने को कहा
भाजपा का एक गुट हटाने, दूसरा गुट पक्ष में उतरा
मेरे पास हाईकोर्ट का स्टे है
इस मामले में मुझे हाईकोर्ट कोर्ट से स्टे है इसलिए नगर निगम हटा नहीं सकता। जहां तक रसीद काटने के मामले की बात है, न मेरे पास रसीदें रहती थीं न ही मैंने इन्हें काटा था। मेरे खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई की गई। इसके चलते मुझे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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-गणेश, पूर्व पीए
कोई स्टे नहीं है
इस मामले में कोई स्टे नहीं है। यह सरकारी भवन है। अब गणेश नगर निगम का कर्मचारी नहीं है इसलिए सहायक नगर आयुक्त विजेंद्र चौहान को पत्र लिखकर सुभाष नगर का भवन बलपूर्वक खाली कराने को कहा गया है।
-चंद्र सिंह मर्तोलिया नगर आयुक्त
भाजपा के दो पक्ष वाली कोई बात नहीं है। मैं अब नगर निगम में नहीं हूं। इस मामले में नगर निगम को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
- जोगेंद्र रौतेला, निर्वतमान मेयर
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सुभाष नगर में नगर निगम का सामुदायिक भवन है। नगर निगम बोर्ड ने इस भवन को मेयर जोगेंद्र रौतेला के कार्यालय के लिए आवंटित किया था। जोगेंद्र रौतेला ने इस भवन को अपने पीए गणेश को रहने के लिए दे दिया था। एक साल पहले गणेश की संलिप्तता निगम की फर्जी रसीद काटने में सामने आई थी। इसके बाद मेयर ने उन्हें हटा दिया था और नगर आयुक्त ने बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद भी गणेश इस भवन में काबिज हैं। सूत्रों के अनुसार रसीद काटने के बाद मामला हाईकोर्ट गया था। वहां से यथास्थिति बनाए रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। अब नगर आयुक्त ने सहायक नगर आयुक्त को पत्र भेजकर बलपूर्वक इस भवन को खाली करने के आदेश दिए हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा का एक पक्ष गणेश को इस भवन से हटाना चाहता है और दूसरी लॉबी उनके पक्ष में है।
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नगर आयुक्त ने सरकारी भवन बलपूर्वक खाली कराने को कहा
भाजपा का एक गुट हटाने, दूसरा गुट पक्ष में उतरा
मेरे पास हाईकोर्ट का स्टे है
इस मामले में मुझे हाईकोर्ट कोर्ट से स्टे है इसलिए नगर निगम हटा नहीं सकता। जहां तक रसीद काटने के मामले की बात है, न मेरे पास रसीदें रहती थीं न ही मैंने इन्हें काटा था। मेरे खिलाफ एक पक्षीय कार्रवाई की गई। इसके चलते मुझे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।
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-गणेश, पूर्व पीए
कोई स्टे नहीं है
इस मामले में कोई स्टे नहीं है। यह सरकारी भवन है। अब गणेश नगर निगम का कर्मचारी नहीं है इसलिए सहायक नगर आयुक्त विजेंद्र चौहान को पत्र लिखकर सुभाष नगर का भवन बलपूर्वक खाली कराने को कहा गया है।
-चंद्र सिंह मर्तोलिया नगर आयुक्त
भाजपा के दो पक्ष वाली कोई बात नहीं है। मैं अब नगर निगम में नहीं हूं। इस मामले में नगर निगम को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
- जोगेंद्र रौतेला, निर्वतमान मेयर